IAS केके पाठक ने संभाला कार्यभार तो RJD ने उठाया सवाल, ललन सिंह ने कहा- राजद से पूछकर करें तैनाती?
पटना। बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद नीतीश सरकार एक बार फिर से सिस्टम को दुरूस्त करने में जुट गई है। बीते 16 नवंबर को सात घंटे तक चली हाई लेवल की बैठक में अधिकारियों को टास्क दिया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो अफसर शराबबंदी को फेल करने में जुटे हैं उन्हें माफ नहीं करेंगे। सीएम ने साफ-साफ कहा है कि शराब मिलने पर वहां के थानेदार जिम्मेदार होंगे और मिलीभगत की बात सामने आने पर बर्खास्त किया जाएगा। वहीं सीएम नीतीश ने एक बार फिर आईएएस अफसर केके पाठक को मद्य निषेध विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाकर यह साफ संदेश दिया है कि सरकार शराबबंदी को लेकर कड़ा रूख अख्तियार कर रही है।

सेंट्रल डेपुटेशन से वापस बिहार लौटे के.के. पाठक मद्य निषेध विभाग के अपर मुख्य सचिव बनाये जाने के बाद पटना के विकास भवन स्थित मुख्यालय पहुंचे और गुरूवार को कार्यभार संभाल लिया। सारे अधिकारी व कर्मी समय से पहले कार्यालय में मौजूद थे। अब तक मद्य निषेध विभाग का जिम्मा संभाल रहे चैतन्य प्रसाद ने के.के. पाठक को विभाग का प्रभार दिया। प्रभार लेने के साथ ही केके पाठक एक्शन मोड में आ गये। उन्होंने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक ली और जानकारी प्राप्त की। इसके बाद विभाग के मंत्री सुनील कुमार के साथ भी बैठे।
वहीं राजद द्वारा केके पाठक की नियुक्ति पर सवाल उठाए जाने को लेकर जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजद के सवाल उठाने का क्या मतलब। यह सरकार का काम है। क्या राजद बताएगी कि कौन से पदाधिकारी कहा पदस्थापित होंगे।
तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर लिखा कि कल शराबबंदी पर मुख्यमंत्री जी से मैंने 15 सवाल पूछे थे।उनके पास एक भी सवाल का जवाब नहीं था इसलिए कथित समीक्षा बैठक की मीडिया ब्रीफ़िंग के लिए उन्होंने अधिकारियों को ही आगे कर दिया। अगर वो शराबबंदी को लेकर गंभीर है तो उन्हें व जमीनी वास्तविक सवालों से ऐसे डरना एवं बचना नहीं चाहिए












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