Bihar News: स्कूलों में छुट्टी कम करने का फ़ैसला कहीं बिगाड़ न दे 'महागठबंधन' का खेल, जानिए कैसे?
School Holidays Decreased News Hindi: बिहार के सरकारी स्कूलों की छुट्टियां कम करने पर सियासत तेज़ गो चुकी है। सरकार के इस फ़ैसला का शिक्षक संघ विरोध कर रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे धर्म विशेष को खुश करने का फ़ैसला बताते हुए सियासी माइलेज की तैयारी कर रही है। छुट्टियों पर सियासत से आगामी चुनाव में महागठबंधन का खेल बिगड़ सकता है।
बिहार में पहली बार रक्षाबंधन के दिन सभी सरकारी स्कूल खुले, शिक्षक तो मौजूद रहे लेकिन बच्चों की मौजूदगी बहुत ही कम नज़र आए। शिक्षा विभाग की तरफ़ छुट्टी में कटौती के फ़ैसले से शिक्षकों में काफी नाराज़गी है। बिहार के विभिन्न ज़िलों के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश की कॉपी को जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया।

शिक्षकों का कहना है कि अगर सरकार ने इस फ़ैसले को वापस नहीं लिया तो, प्रदेश भर के सभी स्कूलों के शिक्षक उग्र आंदोलन करेंगे। इसके साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को वोट नहीं देंगे।
कुमारी सुधा ( प्राचार्य, मिलर स्कूल उच्च माध्यमिक विद्यालय) ने बताया कि उनके स्कूल में 962 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है, 700 के बच्चों की हमेशा हाज़िरी होती है। पहली बार ऐसा हुआ है कि स्कूल में सिर्फ़ 13 बच्चे ही मौजूद रहे। अचानक छुट्टी कम करने का जारी हुआ जो कि हैरान करने वाला फ़ैसला था।
शिक्षकों का कहना है कि बिहार के लोग त्योहार को महत्व देते हैं, स्कूल में ज़्यादातर बच्चे गांव के होते हैं तो वह लोग त्योहार पर गांव चले गए। यही वजह है कि रक्षाबंधन के मौक़े पर स्कूल में बच्चों की मौजूदगी ना के बराबर रही। उन्होंने ने कहा अचानक ऐसा नोटिस आना वज्रपात की तरह था, इससे महिला शिक्षकों को काफी परेशानी हुई है।
शिक्षक संघ ने आदेश की कॉपी जलाकर शिक्षा विभाग के फैसले का विरोध किया। सुधीर कुमार सिंह (अध्यक्ष, बिहार अराजपति प्रांभिक शिक्षक संघ) ने कहा कि यह सरकार का तानाशाही रवैया है, जो कि बर्दाश्त करने लायक नहीं है। शिक्षकों पर जबरदस्ती फ़ैसले थोपे जा रहे हैं।
सबसे पहले सरकार ने कहा कि शिक्षक अब बोरा बेचेंगे। उसके बाद शिक्षकों को मिड डे मील में लगाया यह सभी चीज़े भी ग़ैर शैक्षणिक हैं। शिक्षकों से जनगणना का काम करवाया गया। सरकारी स्कूल तो सरकारी दफ्तर बना चुका है। बच्चों की पढ़ाई छोड़कर शिक्षकों को विभिन्न कार्य करवाए जा रहे हैं। अब तो बस शिक्षकों से शौचालय साफ और सड़क पर झाड़ू लगवाना बाकी रह गया है।
शिक्षक संघ काला पट्टा लगाकर सरकार द्वारा जारी आदेश के खिलाफ रोष प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने अपने फ़ैसले को वापस नहीं लिया तो आंदोलन करेंगे। चुनाव के समय में भी सरकार के खिलाफ वोट करेंगे। इसलिए सरकार से मांग है कि अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करे।












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