Heritage Of Bihar: जल मंदिर में बोली लगाकर चढ़ाया जाता है लड्डू, वजन जानकर हैरान रह जाएंगे आप
Heritage Of Bihar
Heritage Of Bihar: बिहार में कई ऐतिहासिक धरोहरें जिनकी अलग-अलग मान्यता है। पूरे देश में दिवाली की धूम है, रोशनी के त्योहार से जुड़ी कई दिलचस्प खबरें पढ़ने को मिल रही हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको नालंदा जिला मुख्यालय से क़रीब 11 किलोमीटर दूर स्थित जल मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। जैन धर्मावलंबियों के आस्था का केंद्र पावापुरी के पवित्र जल मंदिर का दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं।

दिवाली पर और ज्यादा बढ़ जाती है अहमियत
जल मंदिर की अहमियत हर साल दिवाली पर और ज्यादा बढ़ जाती है। ग़ौरतलब है कि इस साल दिवाली के मौके पर भगवान महावीर का 2548वां निर्वाण दिवस है। इस खास मौके पर बेहतरीन आयोजन कर मंदिर खास पूजा-अर्चना की जाती है। आपको बता दें कि इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्वेतांबर और दिगंबर जैन अनुयायी आयोजन में शिरकत करते हैं।
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दीपोत्सव में बड़ी तादाद में पहुंचते हैं जैन धर्मावलंबी
निर्वाण दिवस के मौके पर पावापुरी में विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है। स्थानीय बुज़ुर्गों की मानें तो भगवान महावीर का दिवाली (कार्तिक मास की अमावस्या) की आधी रात में परिनिर्वाण हुआ था। इसलिए जल मंदिर में हर साल दीप उत्सव मनाया जाता है। दीपोत्सव देखने के लिए बड़ी तादाद में जैन धर्मावलंबी पहुंचते हैं। जल मंदिर में बोली लगाकर लड्डू (लाडो) चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है। श्वेतांबर और दिगंबर श्रद्धालुओं के बीच मंदिर में लड्डू चढ़ाने के लिए बोली लगाई जाती है। ज्यादा बोली लगाने वाले श्रद्धालु मंदिर में लड्डू चढ़ाने का अवसर मिलता है।

लड्डू बनाने के लिए दूसरे प्रदेश से आते हैं कारीगर
जल मंदिर के पुजारी की मानें तो भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के दिन 1 किलो वजन से लेकर 51 किलो वजन तक का लाडू चढ़ाया जाता है। लड्डू बनाने के लिए विशेष रूप से दूसरे प्रेदशों से कारीगर बुलाये जाते हैं। इस बार लड्डू बनाने के लिए राजस्थान और महाराष्ट्र से कारीगर बुलाए गए हैं। जैन श्वेताम्बर और दिगंबर प्रबंधन अपनी निगरानी में शुद्ध देसी घी के लड्डू बनवाते हैं। इसके बाद जैन श्रद्धालु अपने माथे पर लड्डू लेकर निर्वाण स्थल के आखिर छोर तक जाते हैं। फिर वहां जल मंदिर में लड्डू अर्पित किया जाता है।

निर्वाण महोत्सव पर मेले का आयोजन
निर्वाण महोत्सव के मद्देनज़र पावापुरी में दिवाली मेले का भी आयोजन होता है। इस दौरान काफी तादाद में जैन श्रद्धालु रथ यात्रा में शिरकत करते हैं। इस दौरान पावापुरी के विभिन्न जैन मंदिरों में चांदी के रथ पर भगवान महावीर को भ्रमण कराया जाता है। रथ यात्रा खत्म होने के बाद जल मंदिर (पावापुरी निर्वाण स्थान) में पूजा-अर्चना की जाती है। चारों तरफ जल और बीच में पावापुरी मंदिर की भव्यता देखने काफी दूर-दूर से लोग पहुंते हैं।

84 बीघा के तालाब के बीचों बीच बना है जल मंदिर
कोरोना काल के दौरान 2 साल से आयोजन नहीं हुआ था, इसलिए इस साल बहुत ज्यादा भीड़ उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बाबत जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली है। आपको बता दें कि भगवान महावीर की निर्वाण स्थली के रूप में जलमंदिर को जाना जाता है। करीब 84 बीघा के तालाब के बीचों बीच सफेद संगमरमर के मंदिर में भगवान महावीर और उनके दो शिष्यों की चरण पादुका रखी हुईं है।
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