वक्फ संशोधन बिल को Supreme Court में चुनौती, हाजी परवेज़ सिद्दीकी ने पार्टी से ख़िलाफ़ क्यों उठाया ये क़दम?
Haji Mohammad Parwez Siddiqui Challenge Waqf Bill In Supreme Court: वक्फ संशोधन अधिनियम पर देश भर में सियासी संग्राम मचा हुआ है। पक्ष विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। वहीं जदयू के नेताओं में भी नाराज़गी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में जदयू के दिग्गज नेता और अल्प संख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हाजी मोहम्म परवेज़ सिद्दीकी ने पार्टी में रहते हुए संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
अल्पसंख्यक नेताओं को यह डर है कि वक्फ अधिनियम में संशोधन मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और हितों को कमजोर कर सकता है। वक्फ अधिनियम पर विवाद ने अब सियासी रंग ले लिया है, खास तौर पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पर इसका असर पड़ा है। वक्फ कानून पर भाजपा का खुलकर समर्थन करने के बाद पार्टी खुद को दुविधा में पा रही है। इस वजह से आंतरिक मतभेद और सार्वजनिक इस्तीफे भी हो रहे हैं।

इन चुनौतियों के बावजूद, जेडीयू नेताओं ने मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह कदम पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर करता है, क्योंकि कुछ सदस्य पार्टी के भीतर रहते हुए भी अधिनियम का सक्रिय रूप से विरोध कर रहे हैं।
वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक मुस्लिमों का हक छीनने की कोशिश है। बिहार और पंजाब में कई ऐसे उदाहरण हैं कि ज़मीन को वक्फ कर दिया गया और उस पर अवैध रूप से दूसरे ने अपना हक जता लिया है।
ऐसे में तो आने वाले दिनों में जो पुराने मदरसे मस्जिद वक्फ की ज़मीन पर हैं, उसे भी चुनौती देकर कोई भी विवादित प्रॉपर्टी करार दे देगा। नए वक्फ विधेयक के आने के साथ ही, मदरसों और स्कूलों सहित वक्फ संपत्तियों पर संचालित कई शैक्षणिक संस्थानों को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। विधेयक में इन प्रतिष्ठानों को अपनी ज़मीन के लिए उचित दस्तावेज़ उपलब्ध कराने का आदेश दिया जाएगा।
इस निर्देश ने कई लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इनमें से काफी संख्या में संपत्तियों में आवश्यक कागजी कार्रवाई का अभाव है। यह समस्या मुख्य रूप से उस समय से उत्पन्न हुई है जब मुस्लिम समुदाय में शिक्षा का स्तर कम था, जिससे दस्तावेज़ीकरण एक गौण प्राथमिकता बन गई थी।
इस नए कानून के निहितार्थ बहुत दूरगामी हैं, खास तौर पर मुस्लिम शिक्षा ढांचे के लिए। कई मदरसे कई सालों से विभिन्न वक्फ संपत्तियों पर चल रहे हैं। कई जगह ऐसी हैं जहां स्कूल चल रहे हैं। कई ऐसी जमीनें हैं जहां मदरसे सालों से चल रहे हैं। नया वक्फ बिल लागू होने के बाद जमीन के कागज मांगेंगे, अगर नहीं दिए तो उनपर संकट आ सकती है।
वक्फ की बहुत सी जमीन ऐसी है जिसके कागज नहीं हैं, इसकी बड़ी वजह यह है कि मुसलमान शिक्षित नहीं थे। इसका असर मुस्लिम शिक्षा, निजी मदरसों पर भी पड़ेगा। उचित भूमि दस्तावेज के बिना संचालित कई शैक्षणिक संस्थानों की निरंतरता के बारे में यह मौजूदा अनिश्चितता एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
नया वक्फ विधेयक, वक्फ संपत्तियों को विनियमित करने और संभावित रूप से सुरक्षित करने के उद्देश्य से, अनजाने में मुस्लिम समुदाय के भीतर शैक्षिक प्रगति में बाधा उत्पन्न कर सकता है। यह स्थिति न केवल संपत्ति के स्वामित्व के लिए कानूनी दस्तावेज के महत्व पर जोर देती है, बल्कि आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए शैक्षिक पहुंच और निरंतरता पर व्यापक प्रभावों को भी उजागर करती है।
वक्फ बिल में संशोधन कर मुस्लिम समुदाय के पक्ष को कमज़ोर करने की कोशिश है। मुझे पूरा यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम समुदायों के हित में फ़ैसला करेगा। उम्मीद कि ऐसा समाधान निकलेगा जो शैक्षणिक संस्थानों और वक्फ संपत्तियों की विरासत दोनों की रक्षा करेगा। इस कानून का प्रभाव केवल विनियामक अनुपालन से आगे बढ़कर मुस्लिम समुदाय के भीतर शैक्षिक अवसर और सांस्कृतिक विरासत पर भी पड़ेगा।
जदयू में रहते हुए पार्टी के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में बिल को चुनौती देने पर परवेज़ सिद्दीकी ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार से कई बार मुलाक़ात हुई है। हमेशा उन्होंने मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए ही काम करते आए हैं। सीएम नीतीश कुमार को चाहिए की वह मीडिया के सामने आए और रुख साफ़ करें कि किन परिस्थितियों में उनकी पार्टी ने समर्थन दिया है। जदयू का क्या वीज़न है।
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