विभिन्न सरकारी योजनाओं को लेकर की गई बैठक, खेती के लिए किसानों को मिलेंगे 54 हज़ार रुपये!
गया जिला पदाधिकारी ने कहा कि टपका सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए सभी पंचायत के मुखिया अपने क्षेत्र के किसानों को जागरूक करें। टपकन सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के लिए 1 एकड़ में लगभग 60 हजार रुपये लगते हैं।

Gaya News: गया उप विकास आयुक्त, सह प्रभारी जिला पदाधिकारी विनोद दुहन ने सभी प्रखंड के पदाधिकारियों और पंचायत मुखियाके साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंगम के ज़रिए समीक्षा बैठक की गई। गर्मी के मौसम में गया जिले के शहरी और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक चापाकल की स्थिति के संबंध चर्चा की गई। गर्मी के मौसम में किसी भी टोले और कस्बे में पानी की किल्लत नहीं हो, इसके लिए अभी से ही माइक्रो लेवल पर सर्वेक्षण करवाने का निर्देश सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को दिया गया है।
विनोद दुहन ने कहां की प्रखंडों की सभी पंचायतों के टोलो और कस्बों में अच्छी तरह से सर्वेक्षण कराएं जाएं, कहीं कोई भी खराब चापाकल नहीं छूटे। पंचायत सचिव, टोला सेवक इत्यादि कर्मियों को सर्वेक्षण का दायित्व देते हुए कहा की जिला स्तर से जारी फॉर्मेट में सारा डिटेल भरते हुए 7 दिनों के अंदर सर्वेक्षण का कार्य करवाएं। सर्वेक्षण करने से यह आकलन किया जा सकेगा कि किस प्रखंड के किस टोले में चापाकल की स्थिति क्या है। वहीं जिला पदाधिकारी ने पंचायत के मुखिया से रूबरू होते हुए कहा कि गया जिला सूखाग्रस्त क्षेत्र के साथ-साथ कृषि पर निर्भर क्षेत्र भी माना जाता है। सूखाग्रस्त को ध्यान में रखते हुए टपका सिंचाई को बढ़ावा दिया जाना आवश्यकता है।
गया जिला पदाधिकारी ने कहा कि टपका सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए सभी पंचायत के मुखिया अपने क्षेत्र के किसानों को जागरूक करें। टपकन सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के लिए 1 एकड़ में लगभग 60 हजार रुपये लगते हैं। बिहार सरकार द्वारा टपकन सिंचाई योजना लागू करने के लिए जिले के किसानों को 54 हजार रुपये का सब्सिडी देगी। किसानों को टपकन सिंचाई प्रणाली की सुविधा लेने में सिर्फ़ 6 हजार रुपये का खर्च आएगा। किसान कम पानी में भी अच्छे खेती कर सकते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि अपने पंचायत के किसानों को जागरूक करें ताकि वह लोग ज्यादा से ज्यादा इस योजना का लाभ ले सकें। एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या फिर अपने प्रखंड के प्रखंड कृषि पदाधिकारी से भी संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि परैया, टनकुप्पा तथा बाराचट्टी के किसान पहले से ही टपकन सिंचाई योजना का लाभ ले रहे हैं।
पंचायत के सभी मुखिया को बताया गया कि गया जिले में जिस तरह से मशरूम और लेमन ग्रास की खेती में काफी आगे है। उसी प्रकार जिले में तिलकुट के लिए भी काफी प्रसिद्ध है, परंतु तिलकुट बनाने के लिए तील दूसरे राज्यों एवं जिलों से क्रय किए जाते हैं। इन सभी चीजों को देखते हुए तिल की खेती पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए उत्कृष्ट क्वालिटी के तिल का बीज कानपुर से लाया जा रहा है तथा जिले में बड़े पैमाने पर क्लस्टर को चिन्हित करते हुए तिल की खेती हेतु किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
बैठक में सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को कहा कि गया जिला पूरे पहाड़ियों से घिरा हुआ और सूखाग्रस्त क्षेत्र भी है। जिले में बरसात के पानी को किस तरह संचय किया जाए इस पर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि जल संचयन के लिए एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ को जोड़कर पहाड़ के पानी बर्बाद ना हो, इस पर भी विचार करें। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र वार जल संचयन हेतु कोई प्लान है, तो उसे वरीय पदाधिकारी को सूचित करें, ताकि जल संचयन हेतु विशेष कार्य किया जा सके।
इसके उपरांत अग्रिम बैंक प्रबंधक पदाधिकारी द्वारा बिहार सरकार के कल्याणकारी योजनाएं तथा किसानों तथा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को विभिन्न प्रकार के दिए जाने वाले ऋण के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी से 15 अगस्त तक वित्तीय समावेशन से सशक्तिकरण योजना सभी प्रखंडों में संचालित किया जाएगा इस योजना के तहत प्रत्येक शनिवार को विभिन्न प्रखंडों में अति स्थापित बैंक द्वारा कैंप आयोजित कर उस पंचायत प्रखंड के लोगों को नया खाता खोलने ऋण उपलब्ध कराने तथा अन्य बैंक से संबंधित कार्य करने पर जागरूक किया जाएगा इस कैंप के आयोजन का मुख्य उद्देश्य रहेगा की प्रत्येक व्यक्ति को बैंक से जोड़ा जाना है।
बैठक में जिला उद्योग पदाधिकारी द्वारा भी विभिन्न योजनाओं के बारे में अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य योजना हेतु 1 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक इकाई स्थापित करने के लिए लोन दिया जाता है, जिसके लिए 35% अनुदान दिया जाता है। कोई भी इच्छुक व्यक्ति आवेदन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में काफी आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत अधिकतम 10 लाख रुपए तक का ऋण दिया जाता है, जिसमें 50% का अनुदान रहता है तथा शेष 50% लोन को 84 किस्तों में काफी कम ब्याज पर दिया जाता है। अंत में उप विकास आयुक्त ने सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों तथा सभी माननीय मुखियागण से अनुरोध किया कि अपने क्षेत्र के किसानों/ व्यक्तियों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु उन्हें जागरूक करें ताकि आपके प्रखंड के सभी व्यक्ति इन सभी योजनाओं से लाभान्वित हो सके तथा अपनी व्यक्तिगत जीवन शैली को और बेहतर बना सके।
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