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बिहार में बढ़ा कोरोना का खतरा, संदिग्धों के गायब होने से चिंता बढ़ी

संदिग्धों के गायब होने से बिहार में बढ़ा कोरोना का खतरा

पटना। दिल्ली का तबलीगी जमात मरकज भारत में कोरोना का एटम बम साबित हो सकता है। इसमें शामिल सात लोगों की मौत हो चुकी है। 120 से अधिक कोरोना पोजिटिव मिले हैं। जांच रिपोर्ट मिलने पर ये संख्या और बढ़ेगी। चूंकि कई लोग यहां से बिना जांच के ही बाहर निकल गये हैं, इसलिए पोजिटिव लोगों की संख्या का सही आकलन भी मुश्किल हो गया है। इससे बिहार पर भी तबाही का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। दिल्ली मरकज में शामिल 86 लोग बिहार आ चुके हैं। यह कार्यक्रम 15 मार्च को ही खत्म हो गया था। दिल्ली से आये लोग कब से बिहार में हैं और यहां कितनों के सम्पर्क में आये हैं, यह किसी को नहीं मालूम। ये बिना किसी स्क्रीनिंग और जांच के ही बिहार में रह रहे हैं। जब दो दिन पहले दिल्ली में इनका भांडा फूटा तो बिहार का मामला सामने आया। ये कहां हैं और किस हाल में हैं, इसकी अभी खोज ही हो रही है। अभी तक इनमें से 37 लोगों का ही पता लगाया जा सका है। बाकी 49 लोग की तलाश जारी है। हैरानी ही बात ये है कि ये 49 लोग खुद आगे आ कर अपनी पहचान नहीं बता रहे हैं। ऐसे लोगों के छिपने से स्थिति बिगड़ सकती है।

मरकज की नीयत पर सवाल

मरकज की नीयत पर सवाल

बिहार सरकार की अपील के बाद भी दिल्ली मरकज से आये लोग अपनी पहचान छिपा रहे हैं। अगर उनकी वजह से संक्रमण फैला तो इसके लिए कौन जिम्मेवार होगा ? वे कहां हैं और किस हाल में हैं, यह पता लगाने के लिए प्रशासन को खुद कोशिश करनी पड़ रही है। इस कोशिश में पुलिस पर हमले भी हो रहे हैं। इससे मरकज की नीयत पर तो सवाल उठ ही रहे हैं प्रशासनिक अफसरों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है। गुरुवार को जब मधुबनी के गीदड़गंज गांव की एक मस्जिद में पुलिस संदिग्ध लोगों को तलाश में गयी तो उस पर हमला कर दिया गया। इस मामले में एसपी, आइजी और कमिश्नर के अलग-अलग बयान से भ्रम की स्थिति बन गयी। प्रशासन की जीप को हमलावरों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। अफसरों को वहां से जान बचा कर भागना पड़ा। इस मामले में आइजी ने कहा कि मस्जिद में बाहरी लोगों की सूचना पर एसडीओ वहां सत्यापन के लिए गये थे लेकिन इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू हो गयी। इस घटना के तार निजामुद्दीन से जुड़े हैं या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। दूसरी तरफ कमिश्नर ने कहा, माना जा रहा है कि गीदड़गंज से कोई निजामुद्दीन नहीं गया था, इसलिए कोरोना संक्रमण की कोई आशंका नहीं है। एसपी ने कहा कि यह दो गुटों का विवाद है।

दिल्ली मरकज के 37 लोगों की पहचान

दिल्ली मरकज के 37 लोगों की पहचान

दिल्ली मरकज में बिहार के किस जिले से कितने लोग दिल्ली गये थे इसकी अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। जिलास्तर पर इनकी तलाश जारी है। दिल्ली से प्राप्त सूचना के मुताबिक मरकज में शामिल हुए 86 लोग बिहार आये हैं। इनमें 37 की पहचान हो चुकी है। इन 37 लोगों में 17 पटना के, 7 कटिहार और 13 बक्सर के हैं। इन 37 लोगों को क्वारेंटाइन में रखा गया है और इनके सैंपल जांच के लिए भेजे गये हैं। बिहार आने के बाद ये कितने लोगों से मिले हैं इसकी भी जांच हो रही है। खबरों के मुताबिक गया के तीन लोग भी दिल्ली गये थे लेकिन उनकी कोई सूचना नहीं है।

21 मार्च को अररिया आया था एक जत्था

21 मार्च को अररिया आया था एक जत्था

दिल्ली के तबलीगी मरकज में शामिल होने के बाद एक जत्था सीमांचल एक्सप्रेस से 21 मार्च को अररिया आया था। यह जत्था 86 लोगों से अलग है या नहीं, जांच का विषय है। इस जत्थे में 10 लोग शामिल थे जिनमें एक आस्ट्रेलिया और नौ मलेशिया के नागरिक थे। इसमें से एक मलेशियाई युवक मो. खैरानी बिन लुकमान की अररिया में मौत हो गयी थी। अररिया के डीएम ने लुकमान की मौत को स्वभाविक माना था। उसे अररिया में ही दफनाया गया था। इसकी सूचना प्रशासनिक स्तर पर दी गयी थी। इसी तरह 22 मार्च को अवध असम एक्सप्रेस से मरकज के 13 लोगों का जत्था किशनगंज आया था। इसमें इंडोनेशिया के 10, मलेशिया के एक नगरिक शामिल हैं। शेष दो भारतीय हैं। ये लोग किशनगंज में एक कार्यक्रम करना चाहते थे जिसके लिए प्रसासन ने मंजूरी नहीं दी। किशनगंज में इनको क्वारेंटाइन में रखने की एहतियात बरती गयी थी।

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