Bihar Politics: छोड़िए पुरानी बातें, वक्त होने पर दरवाज़े क्या बर्लिन की दीवारें गिर गईं- शाहनवाज़ हुसैन
Shahnawaz Hussain on Bihar Politics: बिहार में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल के पास एनडीए के साथ मिलकर सरकार बनाने की दावेदारी भी पेश कर दी है।
कुछ ही घंटों के बाद जदयू नेता नीतीश कुमार एक बार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उनके साथ 8 और मंत्री भी शपथ लेंगे। बिहार में मचे सियासी घमासान के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी भी शुरू हो गई है।

भाजपा के साथ नीतीश कुमार के जाने के बाद उनके द्वारा राजद से गठबंधन के दौरान की गई बयानबाज़ी और नीतीश कुमार के लिए भाजपा के दरवाज़े बंद हो चुके हैं। इस मामले पर मीडिया ने भाजपा के दिग्गज नेता शहनवाज़ हुसैन से प्रतिक्रिया जानी।
मीडिया से मुखातिब होते हुए शहनवाज़ हुसैन ने कहा कि छोड़िए पुरानी बातें, वक्त होने पर दरवाजे क्या बर्लिन की दीवारें गिर गई थी, पूरी 40 सीटें जीतेंगे। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बिहार में अच्छे दिन जल्द ही आने वाले हैं। भाजपा के साथ गठबंधन कर नीतीश कुमार सरकार बना रहे हैं वाले हैं।
आपको बता दें कि नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद भाजपा नेताओं ने एक बार फिर से बिहार की सभी 40 सीटों पर जीत का दावा शुरू कर दिया है। बिहार में नीतीश कुमार का महागठबंधन से नाता टूटने के बाद इंडिया गठबंधन को तो झटका लगा ही है। इसके साथ ही केंद्र की सियासत पर भी काफी असर पड़ा है।
'इंडिया गठबंधन' के तहत आगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश के सहारे भाजपा को मात देने की सियासी बिसात बिछाई जा रही थी। नीतीश कुमार के अलग होते ही राजद-जदयू के साथ मिलकर कांग्रेस के चुनाव लड़ने का सपना टूट गया। नीतीश कुमार ने ही विपक्षी एकता को मज़बूत करने की नींव रखी थी और अब उन्होंने ही साथ छोड़ दिया है। नीतीश कुमार के किनारे होने से इंडिया गठबंधन की सांसे उखड़ने लगी हैं।
नीतीश कुमार की इंडिया गठबंधन से दूरी की सबसे बड़ी वजह अंदरुनी कलह बताई जा रही है। नीतीश कुमार ने इस उम्मीद में विपक्षी एकता को मज़बूत किया था, ताकि उन्हें उचित सम्मान मिल सके। लेकिन उन्हें इंडिया गठबंधन में ना संरक्षक बनाया गया और ना ही पीएम उम्मीदवार।
इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर भी नीतीश कुमार कहते रहे लेकिन उसपर भी कोई बात नहीं हो रही थी। नीतीश कुमार ने जिस मकसद से विपक्ष को एकजुट किया वह पूरा नहीं हो रहा था। इसलिए वह ख़ुद को ठगा महसूस कर रहे थे। आखिर में उन्होंने ऐसा क़दम उठा लिया जिस्से सभी को उनकी अहमियत का अंदाज़ा हो गया।












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