Shivesh Kumar: कौन हैं शिवेश कुमार, नितिन नवीन के साथ जाएंगे राज्यसभा? बिहार भाजपा में हलचल तेज
Shivesh Kumar: बिहार की राजनीति में मंगलवार को एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने बिहार की दो सीटों के लिए जो नाम तय किए हैं, उनमें सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व विधायक शिवेश कुमार राम का है। वहीं, पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी राज्यसभा भेजने का औपचारिक फैसला ले लिया है।
इस निर्णय को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के 'सोशल इंजीनियरिंग' और 'कैडर आधारित' राजनीति के एक मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से शिवेश कुमार के चयन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा अपने पुराने और वफादार समर्पित कार्यकर्ताओं को बड़ा सम्मान देने की रणनीति पर काम कर रही है।

बिहार भाजपा में नई हलचल, दो सीटों पर दिग्गजों का दांव
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव के लिए भाजपा ने अपने कोटे की दो सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का नाम लंबे समय से चर्चा में था, लेकिन शिवेश कुमार राम के नाम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
नितिन नवीन वर्तमान में पटना की बांकीपुर सीट से विधायक हैं और हाल ही में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनका संसद के ऊपरी सदन में जाना तय माना जा रहा था, लेकिन दूसरे उम्मीदवार के रूप में शिवेश कुमार को चुनकर भाजपा ने अपने दलित वोट बैंक और पुराने पारिवारिक संबंधों को साधने की कोशिश की है।
कौन हैं शिवेश कुमार? विरासत और संघ का साथ
शिवेश कुमार को राजनीति विरासत में मिली है, लेकिन उनका सफर जमीन से जुड़ा रहा है। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री मुनीलाल के पुत्र हैं, जिन्होंने 1996 से 2004 के बीच सासाराम संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। शिवेश की पहचान केवल एक नेता के पुत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रखर संगठनकर्ता के तौर पर भी है।
राजनीतिक शुरुआत: शिवेश ने बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ जुड़कर वैचारिक ट्रेनिंग ली।
विधायक का सफर: उन्होंने साल 2010 में भोजपुर की अगिआंव (SC) विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर अपनी चुनावी पारी की सफल शुरुआत की थी।
संगठनात्मक अनुभव: विधायक रहने के दौरान वे बिहार विधानसभा की अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश संगठन में राज्य सचिव, उपाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
केंद्रीय नेतृत्व का 'नया संतुलन' और रणनीतिक संकेत
राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार इकाई ने पांच नामों का पैनल दिल्ली भेजा था, लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति ने उन कयासों को दरकिनार करते हुए शिवेश कुमार पर भरोसा जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सासाराम सीट पर हार के बावजूद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजकर यह संदेश दिया है कि वह अपने समर्पित नेताओं को मझधार में नहीं छोड़ती।
वहीं, नितिन नवीन को राज्यसभा भेजने का फैसला उनके संगठनात्मक कद को और मजबूत करेगा। अब सबकी निगाहें 5 मार्च को होने वाले नामांकन पर टिकी हैं, जहां एनडीए के अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ये उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश करेंगे।
With AI Inputs
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