Bihar SIR: बिहार वोटर लिस्ट से 2 लाख नाम हटाने की मांग! 13 लाख नए मतदाता भी सामने, चुनाव से पहले बड़ा खुलासा
Bihar SIR: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग (ECI) ने विस्तृत आंकड़े जारी किए है। जिसमें खुलासा हुआ कि करीब 1.97 लाख लोगों ने नाम हटाने (exclusion) की मांग की है, जबकि केवल 29,872 लोगों ने नाम जोड़ने (inclusion) का आवेदन दिया है।
लेकिन सबसे बड़ा सरप्राइज यह है कि इस दौरान 13.3 लाख नए मतदाता यानी पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। यह सब कुछ चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत सामने आया है।

कितने नाम हटे और कितने जुड़े?
चुनाव आयोग के मुताबिक -1,97,764 लोगों ने नाम हटाने (exclusion) की मांग की है। 29,872 लोगों ने नाम जोड़ने (inclusion) का आवेदन दिया है। वहीं 33,771 दावों और आपत्तियों का निपटारा सात दिन के भीतर कर दिया गया।
1 अगस्त 2025 को जारी किए गए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.24 करोड़ मतदाता शामिल थे, जो पहले की लिस्ट से 65 लाख कम है। अब लगभग 2 लाख और नाम हटाने की मांग और 3 लाख संदेहास्पद मतदाताओं पर नोटिस जारी होने के बाद यह संख्या और भी घट सकती है।
क्यों हट रहे हैं नाम वोटर लिस्ट से?
दरअसल, चुनावी कानूनों के तहत किसी भी व्यक्ति या पार्टी को यह अधिकार है कि अगर उन्हें लगता है कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम गलत या गैरकानूनी तरीके से शामिल किया गया है, तो वे उसका विरोध कर सकते हैं। दूसरी ओर, अगर किसी योग्य व्यक्ति का नाम छूट गया है तो वह अपना नाम जोड़ने की मांग कर सकता है।
जारी किए गए नए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.24 करोड़ नाम दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पहले की लिस्ट से करीब 65 लाख कम है। इसकी बड़ी वजह है SIR आदेश (24 जून 2025), जिसके तहत 2003 के बाद वोटर बने सभी लोगों को जन्मतिथि और जन्मस्थान के दस्तावेज जमा करने पड़े। 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वालों को अपने माता-पिता की नागरिकता संबंधी डॉक्यूमेंट भी देने पड़े। यानी, नागरिकता साबित किए बिना अब वोटर लिस्ट में नाम दर्ज नहीं होगा।
13 लाख नए वोटरों का रजिस्ट्रेशन
चुनाव आयोग ने बताया कि 1 अगस्त से अब तक 13,30,000 फॉर्म-6 आवेदन मिले हैं, जो मुख्य रूप से 18 साल पूरे कर चुके नए मतदाताओं के हैं। इनमें से 61,000 से अधिक आवेदन प्रोसेस भी हो चुके हैं। साथ ही, आयोग ने कहा कि 33,771 दावे और आपत्तियां कानूनी तौर पर तय समय (7 दिन) में निपटा दिए गए हैं।
पार्टियों ने भी दाखिल किए दावे
अब तक राजनीतिक दलों के बूथ-स्तरीय एजेंटों ने भी वोटर लिस्ट को लेकर आपत्तियां दर्ज की हैं। 25 दावे नाम जोड़ने के लिए किए गए हैं और 103 दावे नाम हटाने के लिए दाखिल हुए हैं।
3 लाख 'डाउटफुल वोटरों' को नोटिस
सबसे बड़ा विवाद उन मतदाताओं को लेकर है जिन्हें "संदिग्ध" या "नागरिकता प्रमाण अधूरा" पाया गया है। आयोग ने ऐसे करीब 3 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजा है।
सबसे ज्यादा नोटिस उन जिलों में दिए गए हैं जहां सीमापार प्रवास (cross-border migration) की आशंका है -किशनगंज, सहारस, सुपौल, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, कटिहार मधुबनी।
खासतौर पर किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सुपौल जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है, और यहीं सबसे ज्यादा नोटिस दिए गए हैं।
एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी (नाम न छापने की शर्त पर) ने कहा कि ये नोटिस केवल उन्हीं को भेजे गए हैं जिनके "डाउटफुल क्रेडेंशियल" की पुष्टि जिले की रिपोर्ट से हुई है।
पार्टियों की अलग-अलग रणनीति, 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
इस मसले पर राजनीतिक दलों की भूमिका भी अलग-अलग दिख रही है। CPI(ML)-लिबरेशन ने 117 बहिष्कार (exclusion) और 15 समावेशन (inclusion) आवेदन दिए। राजद (RJD) ने 10 इनक्लूजन आवेदन दाखिल किए। राजद का आरोप है कि उसने 500 से अधिक आवेदन दिए थे, लेकिन आयोग ने सिर्फ कुछ ही स्वीकार किए। पार्टी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसकी सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा - "हमारे बूथ एजेंटों ने 500 से ज्यादा आवेदन दाखिल किए, लेकिन चुनाव आयोग केवल इस आधार पर उन्हें खारिज कर रहा है कि वे एक खास प्रारूप में नहीं हैं।" सत्ता पक्ष NDA (BJP, JD(U), LJP(RV)) ने अब तक कोई दावा/आपत्ति दाखिल नहीं की।
आगे क्या होगा?
दावे और आपत्तियों की अंतिम तारीख 1 सितंबर 2025 है। चुनाव आयोग के अनुसार, वोटर लिस्ट की अंतिम कॉपी 30 सितंबर 2025 को जारी की जाएगी। फिलहाल, 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.11% ने अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं और उनका वेरिफिकेशन जारी है। बिहार में इस साल नवंबर 2025 में चुनाव होने की संभावना है। चुनाव की तारीखें नवंबर में घोषित होने की संभावना है।
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