Bihar SIR जांच में बड़ा खुलासा, 35 लाख वोटरों का नहीं है कोई अता-पता, कहां गए ये मतदाता?

Bihar SIR: बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिविजन में करीब 35 लाख वोटर या तो अपने पते पर नहीं मिल रहे हैं या फिर स्थायी रूप से वहां से पलायन कर चुके हैं। यह आंकड़ा मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर ऐसे समय में जब भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पूरे देश में विशेष इंटेंसिव रिविजन शुरू करने जा रहा है।

बिहार में इतनी बड़ी संख्या में वोटरों का लापता मिलना संकेत देता है कि अगर यह प्रक्रिया देशभर में होती है तो और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। कई राजनीतिक दलों ने पहले भी मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चिंता जताई थी, खासकर हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में मतदाताओं की गिनती को लेकर।

Bihar SIR

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक राजनीतिक विश्लेषकों ने भी देश की मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अयोग्य व्यक्तियों के नाम सूची में शामिल होने से लोकतंत्र की नींव हिल सकती है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़ें?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 तक भारत में करीब 2.04 करोड़ बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर चिंता और बढ़ जाती है। 1 जनवरी 2024 तक देश में 96.88 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के होने से, किसी भी तरह की गड़बड़ी या विसंगति का असर चुनावी प्रक्रिया पर गहरा हो सकता है।

भारत निर्वाचन आयोग ने 24 जून को जारी एक आदेश में बताया कि वह बिहार में विशेष इंटेंसिव रिविजन की प्रक्रिया शुरू करेगा, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

इस प्रक्रिया के तहत 1 अगस्त से 1 सितंबर तक कोई भी पात्र मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म जमा कर सकता है या फिर किसी गलत नाम या त्रुटि के खिलाफ आपत्ति दर्ज कर सकता है।

अवैध प्रवासियों का मुद्दा भी विवाद का विषय

अवैध प्रवासियों का मुद्दा भी मतदाता सूची प्रबंधन को और जटिल बना देता है। गृह मंत्रालय के मुताबिक भारत में लगभग 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी और 40,000 से अधिक रोहिंग्या प्रवासी रह रहे हैं, जो मुख्यतः जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में बसे हुए हैं।

चूंकि इन अवैध प्रवासियों का देश में प्रवेश बिना वैध दस्तावेजों के होता है, इसलिए उनकी सटीक संख्या का आकलन करना बहुत कठिन हो जाता है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें देश से बाहर करने की प्रक्रिया लगातार जारी है, लेकिन चुनावी सूची में इनके संभावित प्रभाव को लेकर राष्ट्रीय चिंता बनी हुई है।

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