Bihar News: 'वोट दे बिहारी, नौकरी ले बाहरी', Domicile की मांग पर प्रदेश में चढ़ा सियासी पारा
Bihar News, RJD Election Manifesto 2020: बिहार में बाहरी प्रदेशों के युवाओं को रोज़गार मिलने से बिहार के युवाओं में नाराज़गी देखने को मिल रही है। बिहार के नौजवानों की मांग है कि सरकार डोमिसाइल लागू करे, राजद ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में बिहारी युवाओं के रोज़गार के बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन तेजस्वी सत्ता का सुख पाते ही जनता का दुख भूल गए। वोट दे रहे हैं बिहारी और नौकरी ले रहे हैं बिहारी।
युवाओं का कहना है कि दूसरे प्रदेश से लोग बिहार में आकर राज्यकर्मी का दर्जा ले रहे हैं, और बिहार के युवा दूसरे प्रदेश में जाकर राजमिस्त्री बन रहे हैं। वहीं युवाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो पलटी मारने के लिए जाने जाते हैं ही, अब उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी पलटी मार दी है।

युवाओं का कहना है जब तेजस्वी यादव चुनावी रैली कर रहे थे तो, उन्होंने बड़े-बड़े दावे कर रहे थे। सत्ता में आते ही सरकारी नौकरी झारखंड और उत्तर प्रदेश वालों के खुल गया। जब बिहार सरकार बिहारी युवाओं को रोज़गार नहीं दे रही तो दूसरे प्रदेश में हम लोग मज़दूरी ही करेंगे ना। सरकार हमारी और नौकरी दूसरे करें बाहरी।
आपको बता दें कि BPSC द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा में 1 लाख 22 हज़ार अभ्यर्थी कामयाब हुए है, शिक्षकों की जल्द ही नियुक्ति होने वाली है। इस मुद्दे का राजद सियासी माइलेज लेने में जुटी हुई थी। वहीं जब BPSC द्वारा जारी आंकड़ों में दूसरे प्रदेश के युवाओं की तादाद ज्यादा दिखने पर बिहार के युवा नाराज़ हो गए।
BPSC के आंकड़ों के मुताबिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में बिहार के बाहर के 12 फीसद अभ्यर्थी कामयाब हुए हैं। कक्षा 1 से लेकर 5 तक के लिए भर्ती परीक्षा में काफी तादाद में झारखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के अभ्यर्थियों ने कामयाबी हासिल की है। वहीं 30 फीसदी से ज़्यादा नियोजित शिक्षकों ने बाज़ी मारी है।
आंकड़ों के जारी होने के बाद बिहार के लोगों का कहना है कि प्रदेश के युवाओं को सरकार ने ठग लिया है। हम लोगों के हाथ में आई नौकरी दूसरे को दे दिए जाने से ठगी का अहसास हो रहा है। इसी ज़िम्मेदार बिहार सरकार है।
प्रदेश सरकार ने ही देशभर के अभ्यर्थियों को बिहार में आवेदन की छूट दी थी। इसी का अंजाम हम लोग भुगत रहे हैं। राजद के घोषणा पत्र में था कि उनकी सरकार आने पर 85 फीसदी बिहार के लोगों के लिए आरक्षण होगा, जो कि सिर्फ एक जुमला था।












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