Bihar News: नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग पर चिराग का दो टूक जवाब, JDU को लग सकती है मिर्ची
Nitish Kumar Bharat Ratna Demand: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'भारत रत्न' देने की मांग ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जेडीयू नेता केसी त्यागी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के बाद एनडीए के भीतर ही सुर बदलते नजर आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस पर सधी हुई लेकिन दो टूक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत रत्न जैसा सर्वोच्च सम्मान किसी के मांगने या चाहने से नहीं, बल्कि एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मिलता है।
चिराग के इस बयान को नीतीश की दावेदारी पर एक 'परोक्ष झटके' के रूप में देखा जा रहा है, जिसने गठबंधन के भीतर की खींचतान को उजागर कर दिया है।

Chirag Paswan on Nitish Kumar: भारत रत्न की मांग और चिराग का 'दो टूक' जवाब
जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की वकालत शुरू हुई तो चिराग पासवान ने स्पष्ट कर दिया कि यह सम्मान राजनीतिक मांग का विषय नहीं है। शनिवार को पटना पहुंचे चिराग ने कहा कि भारत रत्न देने की अपनी एक गरिमा और लंबी प्रक्रिया होती है। उन्होंने संकेत दिया कि केवल पत्र लिखने या नारेबाजी करने से किसी को काबिल नहीं माना जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो भी इस सम्मान के योग्य होगा, उसे चयन प्रक्रिया के माध्यम से यह जरूर मिलेगा।
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Bihar News: नीतीश के नेतृत्व की तारीफ और 'काबिलियत' पर तर्क
भले ही चिराग ने मांग करने के तरीके पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन की सराहना करने में कंजूसी नहीं की। चिराग ने माना कि पिछले दो दशकों में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है और वह इस सम्मान के 'अधिकार के काबिल' हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चिराग का यह बयान संतुलन बनाने की कोशिश है, जिसमें उन्होंने एक तरफ प्रक्रिया का हवाला देकर खुद को तटस्थ रखा और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का सम्मान कर गठबंधन धर्म निभाया।
लालू परिवार पर कानूनी शिकंजे और चिराग की राय
लैंड फॉर जॉब मामले में लालू यादव और उनके परिवार पर आरोप तय होने पर चिराग ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने अगर आरोप तय किए हैं, तो निश्चित रूप से सामने ठोस तथ्य और सबूत रहे होंगे। चिराग ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है और देश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि सजा क्या होगी यह वक्त बताएगा, लेकिन दोष सिद्ध होने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
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एनडीए में 'क्रेडिट वॉर' और भविष्य की राजनीति
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग के पीछे जेडीयू की रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने नेता की छवि को 'महान' साबित करने की है। वहीं, चिराग पासवान का बयान यह दर्शाता है कि वह बिहार एनडीए में खुद को एक स्वतंत्र और तर्कसंगत नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। भारत रत्न की इस मांग ने एनडीए के भीतर एक 'साइलेंट क्रेडिट वॉर' शुरू कर दी है, जहां हर दल अपनी प्रासंगिकता साबित करने में जुटा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।












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