नीतीश कैबिनेट में बीजेपी से 6 नए चेहरे शामिल, कौन-कौन पहली बार बने मंत्री, क्या रहा जातीय समीकरण? सबकुछ जानिए

Bihar New Cabinet Ministers 2024: बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए की नई सरकार का शुक्रवार को पहला मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है। इसमें बीजेपी से जिन 12 नेताओं को जगह मिली है, उनमें से 6 पहली बार मंत्री बनाए गए हैं।

वहीं नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के 9 विधायकों को भी मौका दिया गया है। इस कैबिनेट विस्तार के माध्यम से बीजेपी और जेडीयू ने जातीय समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की है।

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मंत्रिमंडल विस्तार पर आने वाले चुनावों का असर
कुल मिलाकर इस मंत्रिमंडल विस्तार पर आने वाले लोकसभा चुनावों और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का असर साफ दिख रहा है।

अगर शुक्रवार को शपथ लेने वाले एनडीए के सभी मंत्रियों को देखें तो इसमें 6 सवर्ण, 6 दलित (SC), 4 अति पिछड़ा (EBC), 4 पिछड़ा (BC) और 1 मुस्लिम एमएलए-एमलसी को मौका दिया गया है। इस विस्तार में बीजेपी से 6 विधायकों को पहली बार मंत्री बनने का चांस मिला है।

बीजेपी के 6 नेताओं को पहली बार मंत्री बनने का मिला मौका
1) नितीन नवीन: नितीन नवीन बीजेपी के दिग्गज नेता रहे नवीन किशोर सिन्हा के बेटे हैं। नितीन नवीन पटना की बांकीपुर सीट से 4 बार के विधायक हैं। वह छत्तीसगढ़ में पार्टी के सह-प्रभारी भी हैं।

2) डॉ दिलीप जायसवाल: दिलीप जायसवाल बिहार विधान परिषद में भाजपा के उप मुख्य सचेतक रह चुके हैं। वे तीसरी बार के एमएलसी हैं। 2014 में इन्होंने किशनगंज लोकसभा सीट से भी भाग्य आजमाया था। ये पूर्णिया, अररिया और किशनगंज से एमएलसी हैं।

3) हरि सहनी: भाजपा नेता हरि सहनी भी विधान परिषद के सदस्य हैं। इन्होंने मैथिली में शपथ ली है। इससे पहले ये विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष थे। 2015 में दरभंगा की बहादुरपुर सीट से विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

4) केदार प्रसाद गुप्ता: केदार प्रसाद गुप्ता अभी कुढ़नी विधानसभा सीट से एमएलए हैं। 2022 में हुए उपचुनाव में इन्होंने शानदार जीत हासिल की थी।

5) सुरेंद्र मेहता: पहली बार मंत्री बने सुरेंद्र मेहता बछवाड़ा विधानसभा सीट के भाजपा विधायक हैं।

6) संतोष सिंह: संतोष सिंह भी बिहार विधान परिषद सदस्य हैं और बीजेपी ने इन्हें पहली बार मंत्री बनने का मौका दिया है। ये रोहतास-कैमूर से एमएलसी हैं।

भाजपा ने इस तरह से साधा जातीय समीकरण
बीजेपी ने अपने 12 एमएलए और एमएलसी के माध्यम से कैसे जातीय समीकरण को साधने की कोशिश की है, उसके लिए आगे की लिस्ट देख सकते हैं-
1) रेणु देवी- नोनिया (अति पिछड़ा)
2) मंगल पांडेय- ब्राम्हण (सवर्ण)
3) नीतीश मिश्रा- ब्राम्हण (सवर्ण)
4) नीरज कुमार सिंह- राजपूत (सवर्ण)
5) नितीन नवीन- कायस्थ (सवर्ण)
6) दिलीप जायसवाल- वैश्य (पिछड़ा)
7) संतोष सिंह- राजपूत (सवर्ण)
8) जनक राम- दलित
9) केदार प्रसाद गुप्ता- वैश्य (पिछड़ा)
10) हरी सहनी- मल्लाह (अति पिछड़ा)
11) कृष्णनंदन पासवान- पासवान (दलित)
12) सुरेंद्र मेहता- कुशवाहा (पिछड़ा)

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