Bihar News: बिहार का प्रमोद कौन? PM मोदी और राष्ट्रपति का बनाया फेक वीडियो, मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार
PM Modi Fake Video: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के AI-जेनरेटेड फेक वीडियो बनाने वाले युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रमोद कुमार राज पर आरोप है कि उसने अत्याधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की आवाज और तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की।
पुलिस के अनुसार, इस तरह की भ्रामक सामग्री का उद्देश्य जनता को गुमराह करना और लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रति अविश्वास पैदा करना था। इस गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पर डीपफेक (Deepfake) के बढ़ते खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

Bihar News Hindi: भ्रामक सामग्री और आरोपी की पहचान
मुजफ्फरपुर पुलिस ने बोचहा थाना क्षेत्र के भगवानपुर से प्रमोद कुमार राज को दबोचा है। आरोपी ने कथित तौर पर एआई (AI) टूल्स का उपयोग कर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम और चेहरे का दुरुपयोग किया। उसने न केवल इन फर्जी वीडियो और ऑडियो क्लिप्स को बनाया, बल्कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर प्रसारित भी किया। पुलिस ने आरोपी के पास से वह मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है, जिसका इस्तेमाल इस आपत्तिजनक कंटेंट को बनाने और शेयर करने के लिए किया गया था।
गिरफ्तारी के पीछे का मुख्य कारण
पुलिस का कहना है कि आरोपी का मकसद बेहद खतरनाक था। इस फेक कंटेंट के जरिए वह देश के सर्वोच्च कार्यालयों की गरिमा और प्रतिष्ठा को धूमिल करना चाहता था। एआई-जेनरेटेड फर्जी वीडियो से आम जनता के बीच भ्रम फैलने का खतरा था, जिससे सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा कम हो सकता था। पुलिस ने इसे सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है, जिसे समय रहते नाकाम करना कानून-व्यवस्था के लिए अनिवार्य था।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर खतरा
जांच अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की मनगढ़ंत सामग्री से देश विरोधी भावनाएं भड़कने और अफवाहें फैलने की प्रबल संभावना थी। वर्तमान दौर में डीपफेक वीडियो का उपयोग सामाजिक अशांति फैलाने के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे पदों से जुड़ी फेक क्लिप्स कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती थीं। इसी गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इसे केवल एक डिजिटल अपराध न मानकर सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना है।
स्पेशल टीम की कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुजफ्फरपुर जिला पुलिस ने एक स्पेशल टीम का गठन किया था। तकनीकी सर्विलांस और खुफिया जानकारी के आधार पर टीम ने आरोपी के ठिकाने पर छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस अब आरोपी के आपराधिक इतिहास की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह किसी बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है। फिलहाल केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से डेटा रिकवरी करने में जुटी है।












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