Bihar Elections 2025: नौकरी में आरक्षण पर चुनावी रण में अब भी पीछे, पहले फेज में कितनी हैं महिला कैंडिडेट्स?
Bihar Elections 2025 Phase 1 Voting: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में महिलाओं की भागीदारी अब भी बहुत कम दिखाई दे रही है। 6 नवंबर को होने वाले मतदान में कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 122 महिलाएं हैं - यानी कुल उम्मीदवारों का 9.3 प्रतिशत। इसका मतलब है कि करीब 91 प्रतिशत उम्मीदवार पुरुष हैं। यह आंकड़ा बिहार की राजनीति में गहरी लैंगिक असमानता को दिखाता है।
पहले चरण में 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी। औसतन हर सीट पर करीब 11 उम्मीदवार हैं। इस चरण में कई सीटों पर नामांकन वापसी के बाद भी मुकाबला रोचक बना हुआ है। जैसे गोपालगंज, अलीनगर, बरौली और महुआ जैसी सीटों पर उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए, जिससे कई दलों में अंदरूनी खींचतान भी सामने आई है।

उम्र और अनुभव का संतुलन
इस बार ज्यादातर उम्मीदवारों की उम्र 30 से 50 साल के बीच है। औसतन उम्मीदवारों की उम्र 47 साल बताई जा रही है। युवाओं की संख्या कम है, जबकि बीच की उम्र वाले उम्मीदवार ज्यादा हैं। कुछ वरिष्ठ नेता भी आखिरी बार किस्मत आजमा रहे हैं।
दलों का समीकरण
पहले चरण में सबसे ज्यादा उम्मीदवार स्वतंत्र हैं। कुल उम्मीदवारों में 35 प्रतिशत बिना किसी पार्टी के मैदान में हैं।पार्टीवार आंकड़े इस तरह हैं:
* राजद (RJD): 72 उम्मीदवार
* कांग्रेस: 24 उम्मीदवार
* जदयू (JD-U): 57 उम्मीदवार
* भाजपा (BJP): 48 उम्मीदवार
* अन्य और स्वतंत्र: 1,113 उम्मीदवार
यह दिखाता है कि इस बार पारंपरिक दलों के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग चुनाव लड़ रहे हैं।
गठबंधनों में 'दोस्ती और टकराव' दोनों
महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) ने 121 से ज्यादा उम्मीदवार उतारे हैं क्योंकि कुछ सीटों पर "फ्रेंडली कॉन्टेस्ट" यानी दोस्ताना मुकाबले हो रहे हैं। वहीं, एनडीए (BJP-JD(U)) और ग्रैंड डेमोक्रेटिक अलायंस में भी अंदरूनी खींचतान और सीट अदला-बदली जारी है। मरहौरा सीट पर एनडीए ने स्वतंत्र उम्मीदवार अंकित कुमार को समर्थन दिया क्योंकि एलजेपी की उम्मीदवार सीमा सिंह का नामांकन रद्द हो गया था।
अपराध और राजनीति का रिश्ता बरकरार
पहले चरण में हर तीन में से एक उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। यह भी दिखाता है कि बिहार की राजनीति में अपराध और राजनीति का पुराना रिश्ता अब भी कमजोर नहीं पड़ा है।
बड़ी तस्वीर
बिहार का चुनावी परिदृश्य इस बार भी जटिल और असमान है। कम महिला उम्मीदवार, ज्यादा स्वतंत्र प्रत्याशी और दलों के बीच टूट-फूट-यह सब मिलकर इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं। यह पहला चरण सिर्फ वोटों की गिनती नहीं, बल्कि यह परख भी करेगा कि बिहार की राजनीति कितनी बदली है - और कितनी वैसी ही बनी हुई है।












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