Bihar Election: बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर विपक्ष डरा क्यों है? तेजस्वी बोले- ये वोट काटने की तैयारी
Bihar Election 2025 (Voter list revision): बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच रस्साकशी शुरू हो चुकी है। इस बीच एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है-वोटर लिस्ट का रिवीजन। इसे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) भी कहा जाता है।
दरअसल, चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन" की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो 29 जुलाई तक चलेगी। इसके तहत मतदाताओं से नए फॉर्म भरवाए जा रहे हैं और पुराने रिकॉर्ड्स की पुष्टि की जा रही है। बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) घर-घर जाकर गणना पत्र (इम्युमरेशन फॉर्म) बांट रहे हैं। लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष, खासकर राजद नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, गंभीर आशंका जता रहे हैं।

विपक्ष के आरोप के बीच चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि हर मतदाता को यह फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा करना होगा। आयोग का कहना है कि इस कवायद का मकसद फर्जी मतदाताओं की पहचान करना और नए योग्य वोटरों को लिस्ट में शामिल करना है। चुनाव आयोग ने यह भी आश्वासन दिया कि इस विशेष अभियान के दौरान कोई भी वास्तविक मतदाता सूची से बाहर नहीं रहेगा।
🔴 तेजस्वी यादव का आरोप: "बिहार के वोटरों से अधिकार छीने जा रहे हैं"
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग पर दबाव डाल रही है। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि बिहार की पूरी वोटर लिस्ट को रद्द कर दिया जाए और 1987 से पहले के कागजों के आधार पर नई लिस्ट तैयार की जाए-वो भी सिर्फ 25 दिनों में।
तेजस्वी ने लिखा,
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचन आयोग को बिहार की समस्त मतदाता सूची को निरस्त कर केवल 25 दिन में 1987 से पूर्व के कागजी सबूतों के साथ नई मतदाता सूची बनाने का निर्देश दिया है। चुनावी हार की बौखलाहट में ये लोग अब बिहार और बिहारियों से मतदान का अधिकार छीनने का षड्यंत्र कर रहे हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर ये आपका वोट काटेंगे ताकि मतदाता पहचान पत्र ना बन सके। फिर ये आपको राशन, पेंशन, आरक्षण, छात्रवृत्ति सहित अन्य योजनाओं से वंचित कर देंगे।''
🔴 चुनाव आयोग के फैसले पर रोक की मांग
चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के विशेष रिवीजन की प्रक्रिया के फैसले को लेकर INDIA गठबंधन (महागठबंधन) की नाराजगी साफ नजर आ रही है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। माना जा रहा है कि INDIA गठबंधन जल्द ही इस मामले को लेकर चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत कर सकता है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह केवल मतदाताओं पर नहीं, बल्कि बिहार के लोगों की नागरिकता और पहचान पर हमला है। उन्होंने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया और कहा, "यह बिहारियों के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश है।"
🔴 किस बात की चिंता है विपक्ष को?
▶️ राजद का दावा है कि इस स्पेशल रिवीजन की आड़ में लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं, जिससे न केवल उनका वोट देने का अधिकार छिनेगा बल्कि कई सरकारी योजनाओं जैसे राशन कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति, और आरक्षण जैसी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ सकता है, क्योंकि ये सुविधाएं वोटर आईडी से जुड़ी होती हैं।
▶️ तेजस्वी यादव और INDIA गठबंधन का मानना है कि इस प्रक्रिया के जरिए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है। चूंकि ये वर्ग अक्सर महागठबंधन का मजबूत वोटबैंक माने जाते हैं, उनके वोट हटाए जाने से चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है। दस्तावेजी प्रक्रिया में कई गरीब और ग्रामीण मतदाताओं के पास 1987 से पहले के कागजात उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उनका नाम हटाए जाने की संभावना बढ़ सकती है।
▶️ चुनाव आयोग ने महज 25-30 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है, जो जमीनी स्तर पर काफी चुनौतीपूर्ण है। महागठबंधन का कहना है कि इतनी जल्दी में किए जा रहे रिवीजन में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम छूट सकते हैं, और इसका सबसे ज्यादा असर उनके पारंपरिक वोटरों पर पड़ेगा।
▶️ महागठबंधन इसे "लोकतंत्र पर हमला" बता रहा है और जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर आक्रोश और चेतावनी दोनों फैला रहा है। लेकिन इससे उलट बीजेपी इसे वोटर सूची को पारदर्शी बनाने का कदम बता रही है, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और भी गहरा हो सकता है। इससे महागठबंधन की 'समावेशी राजनीति' कमजोर हो सकती है।
🔴 भाजपा और जदयू का क्या कहना है?
एनडीए की ओर से अब तक इस आरोप पर कोई सीधा जवाब नहीं आया है, लेकिन भाजपा सूत्रों का कहना है कि वोटर लिस्ट का रिवीजन एक रूटीन प्रक्रिया है, जो हर चुनाव से पहले की जाती है। इसे सियासी रंग देना विपक्ष की डर की राजनीति है।












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