तेजस्वी यादव के नवरात्रि पोस्ट पर क्यों मचा बवाल? यूजर बोले-'सावन में मटन, नवरात्र में मछली, चुनावी हिंदू हैं'
Bihar Election 2025 (Tejashwi Yadav): शारदीय नवरात्र के पहले ही दिन बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया। मौका तो मां दुर्गा की पूजा का था, लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर तेजस्वी यादव ने ऐसा माहौल बना दिया कि चर्चा भक्ति से ज्यादा राजनीति पर होने लगी।
तेजस्वी ने मां दुर्गा से बिहार को गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से निजात दिलाने की प्रार्थना की, लेकिन लोगों का ध्यान उनके वीडियो से ज्यादा उनकी निजी छवि और पिछले बयानों पर टिक गया। आइए जानें आखिर पूरा माजरा क्या है।

तेजस्वी यादव का वीडियो और मैसेज
तेजस्वी यादव ने 3 मिनट 41 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया जिसमें वे पूजा-पाठ करते नजर आए। कैप्शन में लिखा गया-"हे मां! बिहार ने 20 साल तक गरीबी, पलायन, अपराध और भ्रष्टाचार सहा है। अब बिहार को इस दुख से उबारिए। जनसेवा के लिए तेजस्वी को शक्ति दीजिए ताकि हर घर में समृद्धि और खुशहाली ला सकें।" वीडियो में मां दुर्गा से उन्हें आशीर्वाद देने की अपील भी थी। साफ था कि यह मैसेज सीधा चुनावी राजनीति से जुड़ा हुआ था।
सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए तेजस्वी यादव, यूजर बोले- मटन खाने वाले लोग
वीडियो सामने आते ही X (पूर्व ट्विटर) पर यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने तेजस्वी के भाव को सराहा तो कईयों ने उन्हें "चुनावी हिंदू" कहकर घेर लिया। एक यूजर ने लिखा - "सावन में मटन, नवरात्र में मछली... ये है असल जिंदगी। लेकिन चुनाव आते ही पूजा-पाठ... ये है चुनावी जिंदगी।"
कल्पना श्रीवास्तव नाम की यूजर ने तंज कसा - "चुनावी भक्त को मां दुर्गा शायद नैतिकता का पाठ भी पढ़ा दें।" एक और यूजर शिवम ने कमेंट किया - "जो मातृशक्ति का अपमान करते हैं और जातीय जहर फैलाते हैं, उन्हें सत्ता से हमेशा दूर रखना चाहिए।"
बीजेपी ने भी साधा निशाना
बीजेपी ने भी इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। पार्टी प्रवक्ता अरविंद सिंह ने तेजस्वी पर हमला बोलते हुए कहा -"आपके माता-पिता के कार्यकाल ने बिहार को बरबाद किया। नीतीश कुमार और एनडीए सरकार ने राज्य को नई दिशा दी। सत्ता की बेचैनी छोड़ दीजिए, कुर्सी आपको नहीं मिलने वाली।" उनके मुताबिक, यह पूजा पोस्ट महज चुनावी स्टंट है जिससे बिहार की जनता प्रभावित नहीं होगी।
पुराने विवाद फिर से याद
तेजस्वी यादव पर सोशल मीडिया यूजर्स ने पुराने किस्से भी उठा दिए। किसी ने उनके सावन के दौरान मटन खाने की तस्वीर पोस्ट की, तो किसी ने नवरात्रि में मछली खाने का जिक्र किया। यूजर्स ने कहा कि यह दोहरा चरित्र है-एक तरफ पब्लिकली धार्मिक आस्था दिखाना और दूसरी तरफ निजी जिंदगी में अलग आचरण।
चुनावी साल और बढ़ती सियासी सरगर्मी
यह पूरा विवाद ऐसे वक्त में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में हर नेता का हर पोस्ट और बयान सीधे-सीधे वोट बैंक की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव के इस पोस्ट ने एक बार फिर दिखा दिया कि चुनावी साल में भक्ति और राजनीति अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी रहती हैं।
तेजस्वी का नवरात्रि पोस्ट आस्था का संदेश देने से ज्यादा चुनावी बहस का मुद्दा बन गया। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यह सचमुच श्रद्धा है या फिर सिर्फ चुनावी रणनीति?












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