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बिहार चुनाव जीते हुए कितने नेता परिवारवाद वाले? जानें किस पार्टी में सबसे ज्यादा रिश्तेदार विधायक?

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नतीजे तो आ गए, लेकिन एक बहस अब भी खत्म नहीं हुई है परिवारवाद की। हर चुनाव की तरह इस बार भी सारे दल एक-दूसरे पर टिकट बांटने में रिश्तेदारी निभाने के आरोप लगाते रहे लेकिन जब नतीजों की लिस्ट सामने आई, तो साफ हुआ कि परिवारवाद किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है।

एनडीए से लेकर राजद तक, सभी दलों में नेताओं के रिश्तेदार बड़ी संख्या में जीते हैं। सवाल यह है कि किस पार्टी में परिवारवाद का असर सबसे ज्यादा दिखा? ऐसे आइए जानें किस पार्टी के सबसे ज्यादा परिवारवाद वाले नेता चुनाव जीतकर विधायक बने हैं।

Bihar Election 2025

NDA भी 'परिवारवाद' से अछूता नहीं-BJP और JDU के 11-11 रिश्तेदार विधायक

🔹 सबसे पहले बात NDA की। दावा चाहे जितना हो कि वह परिवारवाद से दूर है, लेकिन आंकड़े कुछ और बताते हैं। बीजेपी और जेडीयू दोनों के 11-11 विधायक ऐसे हैं जो किसी न किसी राजनीतिक परिवार से आते हैं। यानी दोनों पार्टियों में लगभग एक जैसे चेहरे रिश्तेदारी के सहारे विधानसभा पहुंच गए।

🔹 बीजेपी के नीतीश मिश्रा, श्रेयसी सिंह, संजीव चौरसिया, नितिन नवीन, सुजीत कुमार, रमा निषाद, केदार नाथ सिंह, विशाल प्रशांत,राकेश रंजन और त्रिवक्रम नारायण सिंह जैसे चेहरे इस सूची में शामिल हैं।

🔹 वहीं जेडीयू के अनंत सिंह, ऋतुराज कुमार, चेतन आनंद, कोमल सिंह,शालिनी मिश्रा,मंजीत कुमार सिंह, रंधीर कुमार सिंह, महेश्वर हजारी,शुभेंदु मुकेश,विभा देवी और मनोरम देवी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

RLM में भी परिवारवाद-उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी विधायक बनीं

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। पार्टी को छह सीटों पर उम्मीदवार उतारने का मौका मिला और इनमें से चार जीत गए। खास बात यह है कि इन चार में से दो रिश्तेदार हैं।

सबसे चर्चा में रहे उपेंद्र कुशवाहा, जिन्होंने सासाराम सीट से अपनी पत्नी स्नेहलता को चुनाव मैदान में उतारा और वे जीत भी गईं। इसके अलावा उन्होंने नीतीश सरकार में मंत्री रहे संतोष सिंह के भाई आलोक कुमार सिंह को टिकट दिया, जो अपने क्षेत्र से जीतकर आए।

LJP(R) में भी परिवारवाद-राजू तिवारी जीते

चिराग पासवान की लोजपा (आर) को इस चुनाव में 19 सीटें मिलीं। पार्टी ने बाहुबली राजन तिवारी के भाई राजू तिवारी को टिकट दिया और वे भी जीतकर विधानसभा पहुंच गए। हालांकि LJP (R) में परिवारवाद का प्रतिशत अन्य दलों जितना बड़ा नहीं हैलेकिन मौजूद जरूर है।

राजद ने दूसरों पर आरोप लगाए, लेकिन खुद भी पीछे नहीं-20% विधायक परिवार से

भले ही NDA लगातार राजद को परिवारवाद का गढ़ कहता रहा लेकिन इस चुनाव में राजद ने 25 सीटें जीतीं, जिनमें से 5 विधायक नेताओं के रिश्तेदार हैं, यानी लगभग 20%।

तेजस्वी यादव तो पहले ही राजनीतिक परिवार का हिस्सा हैं। इनके अलावा ओसामा साहब जो पूर्व बाहुबली सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे भी जीतकर आए।

इसके साथ ही करिश्मा राय (पूर्व CM दरोगा राय की पोती), राहुल कुमार (पूर्व मंत्री जगदीश शर्मा के बेटे) और कुमार सर्वजीत (पूर्व सांसद राजेश कुमार के बेटे) भी चुनाव जीतने में सफल रहे।

कौन जीता परिवारवाद की लड़ाई? किस पार्टी का पलड़ा भारी?

अगर आंकड़ों की बात करें, तो:

🔹 HAM - 80%

🔹 RLM - 50%

🔹 RJD - 20%

🔹 BJP - 12.35%

🔹 JDU - 12.9%

🔹 LJP (R) - कुछ बड़े नाम पर आधारित, लेकिन कम प्रतिशत

सबसे ज्यादा परिवारवाद जीतन राम मांझी की पार्टी HAM में देखने को मिला, जबकि NDA के दोनों बड़े दल BJP और JDU में लगभग समान स्तर पर हैं। राजद भी लगभग 20% परिवारवाद के साथ पीछे नहीं है।

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