Bihar Election: बिहार के 8 वो बाहुबली नेता, राजनीति पर आज भी इन परिवारों का दबदबा, कौन कहां से लड़ रहा चुनाव

Bihar Election 2025: वनइंडिया की खास सीरीज "खानदानी नेता" में आज हम बात कर रहे हैं उन बाहुबली नेताओं की, जिनका असर बिहार की राजनीति में दशकों से देखा जा रहा है। बिहार की राजनीति की खासियत यह रही है कि यहां सियासत केवल नेताओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके परिवार भी चुनावी मैदान में कूद पड़ते हैं। पिता की विरासत को बेटा आगे बढ़ाता है, तो कहीं पत्नी या भाई सत्ता में पकड़ बनाए रखते हैं। इसी कारण बिहार की राजनीति में बाहुबल और खानदानी असर दोनों का तड़का हमेशा देखने को मिलता है।

2025 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर उन चेहरों और उनके परिवारों की चर्चा तेज हो गई है, जिनका नाम बाहुबली राजनीति के साथ जुड़ा है। आइए जानते हैं उन 7 बाहुबली नेताओं और उनके परिवारों के बारे में, जिनका दबदबा आज भी कायम है।

Bihar bahubali leaders

1️⃣. अनंत सिंह - 'छोटे सरकार' से लेकर पत्नी तक का सियासी सफर

मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह को बिहार की राजनीति में "छोटे सरकार" कहा जाता है। कई बार विवादों और आपराधिक मामलों में फंसे रहने के बावजूद उनकी पकड़ इलाके में कम नहीं हुई। उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होने के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी के टिकट पर जीत दर्ज की।

हालांकि, बाद में उन्होंने विधानसभा में नीतीश सरकार का समर्थन कर सभी को चौंका दिया। अब चर्चाएं हैं कि इस बार अनंत सिंह खुद जेडीयू के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

2️⃣ सूरजभान - जीत की कहानी से लेकर पत्नी की राजनीति तक

सूरजभान का नाम भी बिहार की बाहुबली राजनीति में अहम है। साल 2000 में उन्होंने मोकामा सीट से निर्दलीय जीत दर्ज कर बाहुबली दिलीप सिंह को हराया था। 2004 में वे लोकसभा पहुंचे।

उनकी पत्नी वीणा देवी भी मुंगेर से सांसद रह चुकी हैं। इस बार सूरजभान खुलकर कह चुके हैं कि मोकामा से अनंत सिंह को हराना ही उनका लक्ष्य है। फिलहाल उनका परिवार चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) के साथ एनडीए का हिस्सा है।

3️⃣ शहाबुद्दीन - पत्नी की हार और बेटे की नई पारी

सीवान के दिवंगत बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। उनकी पत्नी हिना शहाब ने तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हर बार हार का सामना किया।

अब सियासी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बेटे ओसामा ने हाल ही में आरजेडी ज्वॉइन की है। चर्चा है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में ओसामा पहली बार चुनावी मैदान में नजर आ सकते हैं।

4️⃣ राजन तिवारी - मां, भाई और अब खुद की नई भूमिका

बाहुबली राजन तिवारी का परिवार भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनकी मां कांति देवी ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं, जबकि बड़े भाई राजू तिवारी गोविंदगंज से विधायक रह चुके हैं।

राजू फिलहाल चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (आर) के प्रदेश अध्यक्ष हैं। राजन तिवारी भी अपनी पहचान को लेकर फिर से सक्रिय होते दिख रहे हैं।

5️⃣ सुनील पांडे - पिता से बेटे तक का राजनीतिक ट्रैक

भोजपुर जिले से राजनीति में उतरे बाहुबली सुनील पांडे का सियासी करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। पिछले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन अब उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बेटे विशाल प्रशांत बीजेपी से विधायक बन चुके हैं। तरारी सीट से हुए उपचुनाव में विशाल ने जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि पांडे परिवार की पकड़ अब भी बनी हुई है।

6️⃣ आनंद मोहन - पत्नी सांसद और बेटा विधायक

मधेपुरा के बाहुबली आनंद मोहन आज भी राजनीति में बड़ा नाम हैं। उनकी पत्नी लवली आनंद जेडीयू से सांसद हैं, जबकि बेटा चेतन आनंद 2020 में आरजेडी से विधायक बने।

हाल ही में चेतन ने भी नीतीश सरकार का समर्थन कर सबको चौंका दिया। यह साफ है कि आनंद मोहन का परिवार अलग-अलग दलों में रहकर भी सत्ता समीकरण में अपनी अहम मौजूदगी बनाए हुए है।

7️⃣ पप्पू यादव - निर्दलीय ताकत और पत्नी की राज्यसभा एंट्री

पूर्णिया के बाहुबली नेता पप्पू यादव इस समय निर्दलीय सांसद हैं। उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय किया था, लेकिन सीट बंटवारे में खुद को दरकिनार पाए तो निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

उनकी पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं। अब दोनों मिलकर कांग्रेस के लिए भी सक्रियता दिखा रहे हैं। माना जा रहा है कि 2025 में पप्पू यादव कांग्रेस के साथ तालमेल बनाकर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

8️⃣ प्रभुनाथ सिंह - बेटों की कोशिश और नए समीकरण

छपरा के बाहुबली प्रभुनाथ सिंह भले जेल में हों, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत अभी भी चर्चा में रहती है। उनके बेटे रणधीर सिंह विधायक रह चुके हैं और फिलहाल जेडीयू में शामिल हो चुके हैं। भतीजे और अन्य परिजन भी सियासत में सक्रिय हैं। हालांकि, लगातार हार के चलते इस परिवार के सामने अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

बिहार की राजनीति में बाहुबल और परिवारवाद का गहरा असर है। अनंत सिंह से लेकर पप्पू यादव और आनंद मोहन तक - हर बाहुबली अपने परिवार को सियासत में उतार चुका है। कोई पत्नी विधायक या सांसद बनीं, तो किसी बेटे ने चुनाव जीतकर राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। 2025 के चुनाव में इन परिवारों की सियासी भूमिका एक बार फिर चर्चा में होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि बाहुबली राजनीति की यह विरासत इस बार किसके लिए जीत का हथियार बनेगी और किसके लिए चुनौती।

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