Bihar Chunav: मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस बनाने पर क्यों राजी हुए तेजस्वी यादव? पर्दे के पीछे हुई डील
Bihar Chunav Mukesh Sahni: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ती जा रही है। गुरुवार को महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव को सीएम और मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित कर दिया गया है। सहनी पिछले काफी हफ्तों से खुद को उप-मुख्यमंत्री का दावेदार घोषित करने की मांग कर रहे थे, लेकिन आखिरी वक्त में उनकी मांग पूरी हुई है। गठबंधन में तकरार और घटक दलों की नाराजगी की अटकलों पर विराम लगाने के लिए लिया फैसला माना जा रहा है।
बिहार की राजनीति में इन दिनों रोज नए समीकरण बनते और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अब चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा है कि तेजस्वी यादव ने आखिर किन शर्तों पर मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस बनाने के लिए सहमति दी है। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि यह फैसला बहुत सोच-समझकर रणनीतिक कदम के तौर पर लिया गया है।

Mukesh Sahni के नाम पर तेजस्वी क्यों हुए राजी
⦁ सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के बीच पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बातचीत चल रही थी। सहनी निषाद समाज के सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। बिहार में आधिकारिक तौर पर मल्लाह जाति की आबादी 34,10093 बताई गई है, जो कुल आबादी का 2.60 प्रतिशत है।
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⦁ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुकेश सहनी भले ही 14 फीसदी वोट बैंक का दावा करते हों, लेकिन उसमें सच्चाई नहीं है। यह जरूर सच है कि कम से कम 10 से 12 सीटें ऐसे हैं जिन पर अगर निषादों का वोट एकमुश्त किसी पार्टी को मिले, तो चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
⦁ बताया जा रहा है कि पटना में कांग्रेस के सीनियर नेता अशोक गहलोत की मुलाकात लालू यादव और तेजस्वी यादव से एक दिन पहले हुई है। चुनाव से पहले गठबंधन में विवाद की अटकलों पर विराम लगाने और एकजुटता का संदेश देने पर सहमति बनी। इसके बाद मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम फेस घोषित किया गया है।
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⦁ बिहार में चुनावी हार-जीत के जातिगत समीकरणों को देखें, तो ऐसा लगता है कि तेजस्वी यादव यह समझ चुके हैं कि 2025 का चुनाव सिर्फ यादव-मुस्लिम समीकरण से नहीं जीता जा सकता हैं। एनडीए की सोशल इंजीनियरिंग को देखते हुए उन्होंने सामाजिक समीकरण को विस्तार देने की कोशिश की है।
Bihar Chunav नतीजों के बाद ही असली असर दिखेगा
मुकेश सहनी के राजनीतिक जीवन को देखें, तो वह आसानी से पलटी मार लेते हैं। सहनी एनडीए के साथ भी रह चुके हैं और अब महागठबंधन में आने के बाद बीजेपी को हराने के लिए गंगाजल लेकर कसमें खा रहे हैं। सूत्रों की मानें, तो तेजस्वी यादव उन्हें डिप्टी सीएम उम्मीदवार बनाने पर राजी नहीं थे। अशोक गहलोत के हस्तक्षेप के बाद यह सहमति बनी है।
निषाद और मछुआरा समुदाय दरभंगा, मधुबनी, सीवान और मुजफ्फरपुर बेल्ट जैसे इलाकों के कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। अब चुनावी नतीजों के बाद ही यह समझ आएगा कि महागठबंधन का यह दांव कितना सफल रहा है।
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