Bihar Chunav: कांग्रेस के 6 दिग्गज, बेटों के लिए टिकट की जुगाड़ में! राहुल-प्रियंका तक कर रहे हैं पैरवी
Bihar Congress Candidates: आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलकों में सियासी गहमागहमी बढ़ गई है। हर पार्टी अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी में जुटी है, लेकिन इस बार कांग्रेस में पारिवारिक राजनीति का असर साफ नजर आ रहा है। कई वरिष्ठ नेता अपने बेटों को चुनावी मैदान में उतारने के प्रयास में हैं।
टिकट वितरण के लिए आयोजित स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में सिर्फ जीतने वाले प्रत्याशियों पर ध्यान नहीं था, बल्कि नेता पुत्रों की 'लॉन्चिंग' पर भी फोकस किया गया। इस रणनीति ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच नई बहस छेड़ दी है।

अखिलेश प्रसाद सिंह
बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह अपने बेटे आकाश कुमार सिंह को कांग्रेस या उसके सहयोगी दल से टिकट दिलाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। ध्यान दें कि आकाश कुमार सिंह ने लोकसभा चुनाव 2024 में महाराजगंज और 2019 में पूर्वी चंपारण संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। अब अखिलेश सिंह फिर से अपने बेटे के लिए सक्रिय पैरवी कर रहे हैं और उनका लक्ष्य है कि आकाश इस बार चुनावी मैदान में मजबूत तरीके से उतरे।
पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार
पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार भी अपने बेटे अंशुल अभिजीत को फिर से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रही हैं। पहले पटना साहिब लोकसभा चुनाव में हार चुके बेटे को इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाकर राजनीतिक रूप से नया मंच देने की योजना है। इस कदम से पार्टी के भीतर परिवारवाद की छवि और स्पष्ट होती दिख रही है, जबकि यह रणनीति आगामी चुनावों में उनके बेटे की मजबूत पहचान बनाने की कोशिश भी है।
पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा
पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा अपने बेटे माधव झा को चुनावी राजनीति में सक्रिय करने की तैयारी कर चुके हैं। वे चाहते हैं कि उनके बेटे को दरभंगा या समस्तीपुर में किसी विधानसभा सीट से उतारा जाए, ताकि वह राजनीतिक मंच पर अपनी पहचान बना सके।
पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद खान
पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शकील अहमद खान लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं। अब वे अपने बेटे को चुनावी टिकट दिलाकर राजनीतिक विरासत सौंपने की योजना बना रहे हैं। शकील अहमद खान के दादा और पिता भी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं, और अब वे अपने बेटे के जरिए परिवार की राजनीतिक परंपरा को आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि एक और पीढ़ी को मजबूत राजनीतिक मंच पर स्थापित किया जा सके।
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पूर्व मंत्री अवधेश सिंह
वहीं, वजीरगंज से छह बार के विधायक और पूर्व मंत्री अवधेश सिंह भी इस बार खुद की जगह अपने बेटे को टिकट दिलाने की जुगत में जुटे हैं। वे चाहते हैं कि उनका बेटा उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाए और विधानसभा में उनकी जगह ले। ऐसे कदम न सिर्फ पार्टी के भीतर परिवारवाद की छवि को और गहरा करते हैं, बल्कि सत्ता के हस्तांतरण को भी एक बार फिर 'वंशवाद' की राजनीति के रूप में उजागर करते हैं।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव
पप्पू यादव भी अपने बेटे सार्थक रंजन को कांग्रेस से टिकट दिलाने की कोशिश में जुटे हैं। इसके लिए वे न केवल राहुल गांधी, बल्कि प्रियंका गांधी तक से लगातार पैरवी कर रहे हैं। उनका मकसद है कि बेटे को कांग्रेस के मंच से चुनावी राजनीति में उतारा जाए और एक नई सियासी पारी की शुरुआत कराई जाए। इस तरह वे अपने परिवार की नई पीढ़ी को कांग्रेस की राजनीति में स्थापित करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
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