तेज प्रताप यादव की बगावत से लालू परिवार में उथल-पुथल, महुआ से अकेले लड़े तो तेजस्वी को कितना होगा नुकसान?

Tej Pratap Yadav (Bihar Chunav 2025): बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने अब खुलकर बगावत का झंडा थाम लिया है। उन्होंने एलान किया है कि वे महुआ विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। यह वही सीट है, जहां से वर्तमान विधायक मुकेश कुमार हैं, जो तेजस्वी यादव के खास माने जाते हैं।

बगावत के ऐलान के पीछे क्या है वजह?

तेज प्रताप यादव को कुछ महीने पहले उनके पिता लालू यादव ने पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके पीछे सोशल मीडिया पर उनका एक पोस्ट बताया गया, जिसमें उन्होंने एक महिला से रिश्ते की बात कबूल की थी (बाद में पोस्ट डिलीट कर कहा गया कि अकाउंट हैक हो गया था)। लेकिन जानकार मानते हैं कि यह महज बहाना था। पार्टी के भीतर लंबे समय से तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच टकराव की खबरें थीं, जो अब खुलकर सामने आ गई हैं।

Tej Pratap Yadav Bihar Chunav 2025

तेज प्रताप ने कहा, "महुआ से चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर चुका हूं। जो विरोधी हैं, उन्हें खुजली हो गई है। वे गाल खुजलाते रहेंगे।" साथ ही उन्होंने 'टीम तेज प्रताप' के जरिए युवाओं को समर्थन देने की बात कही।

तेज प्रताप अकेले लड़ेंगे, तो तेजस्वी को कितना नुकसान?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप का निर्दलीय लड़ना RJD को वोटों के बंटवारे के रूप में नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां मुकाबला बेहद करीबी होगा।

2020 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और NDA के वोट शेयर में महज 0.23% का अंतर था -NDA को 37.26% और महागठबंधन को 37.03% वोट मिले थे। इस मामूली अंतर के बावजूद NDA को 125 सीटें और महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं।

अब जरा सोचिए, अगर तेज प्रताप महुआ और कुछ अन्य सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारते हैं, तो राजद का 1-2% वोट भी कट सकता है - और इतना अंतर हार-जीत तय कर सकता है।

इससे पहले भी तेज प्रताप ने 2019 लोकसभा चुनाव में जहानाबाद और शिवहर में अपने प्रत्याशी उतारे थे। जहानाबाद में उनके उम्मीदवार चंद्रप्रकाश को 7,755 वोट मिले, जिससे RJD वहां 1,751 वोटों से हार गई। ये उदाहरण बताता है कि तेज प्रताप का हस्तक्षेप RJD को नुकसान पहुंचा सकता है।

बगावत की टाइमिंग और असर

तेज प्रताप की बगावत ऐसे समय में हुई है जब RJD तेजस्वी यादव के नेतृत्व में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में परिवार की टूट तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े करेगी। विपक्ष इसे मुद्दा बनाएगा और कहेगा कि जो नेता अपने परिवार को एकजुट नहीं रख सकता, वह राज्य कैसे चलाएगा?

तेज प्रताप ने हाल ही में X पर राजद के आधिकारिक अकाउंट, अपनी बहन मीसा भारती, राज लक्ष्मी यादव और हेमा यादव समेत परिवार के कई लोगों को अनफॉलो कर दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि सिर्फ सियासी नहीं, पारिवारिक स्तर पर भी दूरियां बढ़ चुकी हैं।

विरोधियों को मिल रहा मुद्दा

BJP जैसे दल पहले भी तेज प्रताप को अपने पाले में लाने की कोशिश कर चुके हैं या उनकी बगावत को हवा देते रहे हैं। ऐसे में अब फिर से विपक्ष इस बगावत को तेजस्वी की कमजोरी साबित करने की कोशिश करेगा।

तेज प्रताप यादव का महुआ से निर्दलीय चुनाव लड़ना RJD के लिए चिंता का विषय है। भले ही उनकी अपनी जीत की संभावना कम हो, लेकिन वह तेजस्वी के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं। आने वाले चुनाव में अगर राजद को कुछ करीबी सीटों पर हार मिलती है, तो उसका जिम्मेदार शायद कोई विरोधी नहीं, बल्कि खुद तेज प्रताप ही होंगे।

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