बिहार उपचुनाव : क्या 'कन्हैयाब्रांड’ कांग्रेस से डर गए राजद के तेजस्वी यादव?
पटना, 05 अक्टूबर। कन्हैया ने कोई लीला भी नहीं दिखायी। लेकिन राजद पहले डर गया। दो सीटों पर उपचुनाव के लिए पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिये। उसने खेल के सिद्दांत को लागू किया। आक्रमण ही सुरक्षा की सर्वोत्तम नीति है। राजद ने सोचा अगर एक बार 'कन्हैयावाली कांग्रेस' से कॉम्प्रोमाइज कर लिया तो आगे भी करना पड़ेगा। सो पहले ही तन गया।

कुशेश्वरस्थान और तारापुर में कैंडिडेट देकर राजद ने सुलह के सारे रास्ते बंद कर दिये। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने दो टूक कह दिया है कि अब किसी भी हाल में कैंडिडेट वापस नहीं होंगे। वैसे देखा जाय तो कुशेश्वरस्थान सीट पर कांग्रेस का दावा बनता था। 2020 के चुनाव में इस सीट पर महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस के अशोक राम ने चुनाव लड़ा था। अशोक राम दूसरे स्थान पर रहे थे और करीब सात हजार वोटों से हारे थे। लेकिन राजद ने इस तथ्य को दरकिनार कर इस सीट से अपना उम्मीदवार उतार दिया। अब कांग्रेस ने भी दोनों सीटों से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। वह अपने आत्मसम्मान को बचाने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ना चाहती है।

क्या डर गया राजद ?
राजद भविष्य के आंकलन को लेकर आशंकित है। अगर कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस ने चुनाव लड़ा तो कन्हैया को तत्काल चुनाव प्रचार का मौका मिल जाएगा। लोग तेजस्वी से कन्हैया की तुलना करने लगेंगे। अगर कहीं कांग्रेस जीत गयी गयी तो फिर बिहार में कन्हैया की जय-जयकार हो जाएगी। कन्हैया का यह एक्सपोजर तेजस्वी की राह में रोड़ा बन सकता है। इससे अच्छा है कि कांग्रेस के चुनाव लड़ने की संभावना को ही खत्म कर दिया जाय। न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी। हां, अगर कांग्रेस चाहे तो बिहार में चुनावी अपनी अलग बंशी बजा सकती है। अपना उम्मीदवार दे कर। राजद ने तो पहले ही महागठबंधन को तोड़ दिया है। कांग्रेस को तो सिर्फ रस्मअदायगी करनी है। राजद के इस फैसले से कांग्रेस के नेता नाराज हैं। कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान भी जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे कन्हैया से 23 साल पहले जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गये थे। उन्होंने कहा, तेजस्वी यादव फ्रस्ट्रेशन में ऐसा कर रहे हैं।

उपचुनाव के मैदान में
कुशेश्वरस्थान और तारापुर की सीट जदयू की है। 2020 के चुनाव में कुशेश्वरस्थान से जदयू के शशिभूषण हजारी जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के अशोक राम को हराया था। तारापुर सीट से जदयू के मेवालाल चौधरी जीते थे। उन्होंने राजद की दिव्या प्रकाश को हराया था। यहां गौर करने वाली बात ये है कि इन दोनों सीटों पर लोजपा उम्मीदवार होने के बावजूद जदयू ने जीत हासिल की थी। शशिभूषण हजारी और मेवालाल चौधरी के निधन के कारण ये दोनों सीटें खाली हुई हैं। इन दोनों सीटों पर 30 अक्टूबर को उपचुनाव है। राजद ने कांग्रेस के दावे को नजरअंदाज कर कुशेश्वरस्थान से गणेश भारती को उम्मीदवार बनाया है। जब कि अरुण साह तारापुर से राजद के प्रत्याशी होंगे। दूसरी तरफ जदयू ने तारापुर से राजीव कुमार सिंह और कुशेश्वरस्थान से और अमन भूषण हजारी को मैदान में उतारा है। 8 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख है। एनडीए में तो तस्वीर बिल्कुल साफ है लेकिन महागठबंधन में पेचीदगी बढ़ गयी है। बल्कि कहें तो टूट की नींव पड़ चुकी है।

राजद को उसी के अंदाज में जवाब देगी कांग्रेस
अब कन्हैयावाली कांग्रेस ने भी राजद को करारा जवाब देने का मन बना लिया है। कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजीत शर्मा ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार देने की बात कही है। कुशेश्वरस्थान कांग्रेस की सीट थी लेकिन राजद जबरन वहां से चुनाव लड़ रहा है। ऐसे में कांग्रेस के पास और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा, हम दोनों सीटों पर जीतने के लिए लड़ेंगे। 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में महागठबंधन का नाजरा इस बार बिल्कुल बदला हुआ है। याचना करने वाली कांग्रेस अब ताल ठोकने की मुद्रा में है। वह राजद की आंखों में आंखें डाल कर बात कर रही है। कांग्रेस इस चुनाव में खुद को आजमाना चाहती ताकि वह 2024 के लिए अपना भविष्य तय कर सके। कांग्रेस नेता राजद के धोखे से खिन्न हैं। कई नेता तो यहां तक कह रहे हैं कि कांग्रेस को दोनों सीटों पर इसलिए भी चुनाव लड़ना चाहिए ताकि राजद की हार सुनिश्चित हो सके। ये टकराव तभी टल सकता है जब राजद कुशेश्वरस्थान से उम्मीदवार वापस ले। लेकिन राजद की जिद को देख कर इस बात की कम ही संभावना दिख रही है।












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