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Bihar News: बिहार में बड़ा घोटाला, सरकारी खजाने से 69 लाख पार, ऑपरेटर के नाम पर अधिकारियों ने खेली बड़ी चाल?

Bihar Transport Department Corruption: बिहार के परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा सिस्टम काम कर रहा है, जहां सरकारी खजाने में सेंध लगाना अब आम बात हो गई है। रोहतास के बाद अब भोजपुर जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में 69 लाख रुपये के टैक्स गबन का बड़ा खुलासा हुआ है। कहने को तो गाज एक डेटा ऑपरेटर पर गिरी है, लेकिन 69 लाख जैसी भारी-भरकम राशि का गायब होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या वाकई एक अदना सा डेटा ऑपरेटर बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के हफ्तों तक टैक्स का पैसा अपनी जेब में रख सकता है? यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की चोरी नहीं, बल्कि पूरे विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।

Bihar Transport Department Corruption

Bhojpur DTO Scam 2026: क्या है 69 लाख का यह 'सफेदपोश' गबन?

भोजपुर डीटीओ कार्यालय में आरटीपीएस काउंटर के जरिए वाहन मालिकों से नकद टैक्स वसूला जाता था। आरोपी डेटा ऑपरेटर अजय कुमार सिंह पर आरोप है कि उसने साल 2025 के दौरान कुल 69,11,698 रुपये की टैक्स राशि जमा तो की, लेकिन उसे सरकारी खजाने (चलान) में नहीं भेजा। कायदे से यह राशि प्रतिदिन नाजिर के माध्यम से बैंक में जमा होनी चाहिए थी, लेकिन यहां महीनों तक वसूली का पैसा सीधे ऑपरेटर की तिजोरी में जाता रहा और विभाग सोता रहा।

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Bihar News Today: कैसे हुआ इस 'महाघोटाले' का भंडाफोड़?

इस गबन का खुलासा तब हुआ जब विभाग के खातों का मिलान किया गया और कैश बुक में भारी अंतर पाया गया। वर्तमान डीटीओ ने जब इसकी आंतरिक जांच कराई, तो पाया कि आरटीपीएस काउंटर से वसूला गया टैक्स गायब है। आरोपी अजय कुमार सिंह को 9 दिसंबर 2025 और फिर 2 जनवरी 2026 को स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेजा गया। जब दो बार मौका देने के बाद भी ऑपरेटर ने कोई जवाब नहीं दिया, तब विभाग ने इसे गबन मानकर 13 जनवरी 2026 को नवादा थाने में केस दर्ज कराया।

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सिर्फ डेटा ऑपरेटर पर कार्रवाई, असली खिलाड़ी कौन?

पुलिस ने आरोपी अजय कुमार सिंह पर बीएनएस की धारा 316(4) और 318(4) के तहत मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन विवाद यहीं से शुरू होता है। सवाल यह है कि क्या कोई डेटा ऑपरेटर इतना ताकतवर हो सकता है कि वह लाखों रुपये अकेले डकार जाए? विभाग के नियमों के अनुसार, डीटीओ और नाजिर को प्रतिदिन के कलेक्शन की निगरानी करनी होती है। ऐसे में बिना तत्कालीन डीटीओ और नाजिर के संरक्षण के इतनी बड़ी राशि का गबन होना नामुमकिन सा लगता है।

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Bihar News Update: EOU जांच की मांग और साख पर उठते सवाल

भोजपुर जिला ट्रक ऑनर एसोसिएशन ने अब इस मामले की जांच 'आर्थिक अपराध इकाई' (EOU) से कराने की मांग की है। एसोसिएशन का साफ आरोप है कि डेटा ऑपरेटर तो सिर्फ एक "मोहरा" है, असली "खिलाड़ी" तत्कालीन सक्षम पदाधिकारी हैं जिन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। मांग की जा रही है कि न केवल गबन की राशि वसूली जाए, बल्कि उन अधिकारियों की संपत्ति की भी जांच हो जिनकी नाक के नीचे जनता की गाढ़ी कमाई लूटी गई।

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