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Bihar Chunav 2025: बिहार के 9 जिलों की 72 सीटों पर हो सकता है खेला? NDA को मिलेगी इस बार बड़ी चुनौती

Bihar Assembly Election 2025: बिहार में 2025 के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। आगामी बिहार चुनाव पर इस बार दो मुद्दे हावी रहेंगे...पहला जाति जनगणना, दूसरा वक्फ कानून...। विधानसभा चुनाव से पहले वक्फ (संशोधन) अधिनियम बिहार में एक बड़ा सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। इस कानून के विरोध में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 'वक्फ बचाओ अभियान' शुरू किया है।

बिहार विधानसभा चुनावों में बदलाव लाने की उम्मीद से AIMPLB ने वक्फ कानून के खिलाफ अपने विरोध तेज कर दिए हैं, उनका पूरा फोकस मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों पर है। उनका अभियान खास तौर पर बिहार के 9 जिलों में केंद्रित है। AIMPLB की यह सक्रियता इस बात की ओर संकेत करती है कि यह मुद्दा आगामी चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां उनकी संख्या निर्णायक है।

Bihar Chunav 2025

🔴 बिहार की 72 सीटों पर 'वक्फ' से बदलेगा चुनावी समीकरण?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक AIMPLB ने आगामी चुनावों को लेकर कहा है कि 'संभावना है कि ये (वक्फ बचाओ अभियान) कार्यक्रम चुनाव परिणामों को भी प्रभावित कर सकते हैं।' बिहार के जिन नौ जिलों पर AIMPLB फोकस कर रहा है।

AIMPLB के निशाने पर बिहार के 9 जिले हैं, पटना, अररिया, किशनगंज, भागलपुर, बेगूसराय, सहरसा, मधुबनी, सीवान और दरभंगा। इन नौ जिलों में कुल 72 विधानसभा सीटें आती हैं, जो बिहार के कुल 243 विधानसभा सीट का लगभग 30% हिस्सा है। बिहार की आबादी का लगभग 17.7% हिस्सा बनाने वाले मुसलमान इन 72 विधानसभा सीटों में से कम से कम 30 पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

इन नौ जिलों में पटना में 14 विधानसभा सीटें, अररिया में 6 सीटें, किशनगंज में 6 सीटें, भागलपुर में 6 सीटें, बेगूसराय 7 सीटें, सहरसा 4 सीट, मधुबनी 10 सीटें, सिवान 8 विधानसभा सीटें, दरभंगा में 6 सीटे हैं।

🔴 बिहार चुनाव: मुस्लिम जनसंख्या और राजनीतिक महत्व

बिहार की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 17.7% है। इन 72 सीटों में से कम से कम 30 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में AIMPLB की यह रणनीति नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले NDA के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। AIMPLB और विपक्षी पार्टियां वक्फ अधिनियम जैसे संवेदनशील मुद्दे को सामने रखकर मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

🔴 बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का चुनावी गणित

2020 के विधानसभा चुनाव में इन 72 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दबदबा रहा:

🔹 भाजपा (BJP): 25 सीटें

🔹 जनता दल (यूनाइटेड - JD(U)): 11 सीटें

🔹 विकासशील इंसान पार्टी (VIP): 2 सीटें

🔹 कुल NDA: 38 सीटें

विपक्षी महागठबंधन ने 72 में से 28 सीटें जीती थीं

🔹 आरजेडी (RJD): 11 सीटें

🔹 कांग्रेस (Congress): 5 सीटें

🔹 सीपीआई (एमएल) (एल) ने 4

🔹 सीपीआई ने 2 सीटें

🔹 एआईएमआईएम-5 सीटें, (इसके पांच में से चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए)।

इसका मतलब यह हुआ कि NDA ने इन 72 में से 38 सीटों पर जीत हासिल कर ली थी, जो कि बहुमत से ज्यादा है। बिहार में मुसलमानों को आरजेडी के कट्टर समर्थकों के रूप में देखा जाता है, इसलिए पिछले चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अहम हो गया था। लेकिन इस चुनाव में
अगर मुस्लिम मतदाता AIMPLB के अभियान से प्रभावित होकर एकतरफा मतदान करते हैं, तो यह समीकरण पूरी तरह से बदल सकता है।

🔴 वक्फ बचाओ अभियान और AIMPLB की रणनीति NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती

AIMPLB ने साफ किया है कि 'वक्फ बचाओ अभियान' सिर्फ कानूनी या धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक जागरूकता अभियान भी है। उनका मानना है कि अगर यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो वे NDA की सहयोगी पार्टियों -खासकर जेडी(यू) और लोक जनशक्ति पार्टी-को मुस्लिम समर्थन से वंचित कर सकते हैं। इस अभियान के जरिए AIMPLB न केवल मुस्लिम मतदाताओं को लामबंद कर रही है, बल्कि विपक्षी दलों को भी इस मुद्दे के बहाने एक मंच पर लाने की कोशिश कर रही है।

वक्फ बचाओ अभियान में AIMPLB और अन्य मुस्लिम निकायों के साथ मिलकर जेडी(यू) सहित भाजपा सहयोगियों को निशाना बना रहे हैं, उन पर वक्फ अधिनियम पर "मुसलमानों को धोखा देने" का आरोप लगा रहे हैं। अपने कार्यक्रम में वो कह रहे हैं कि एनडीए दलों ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन करके "मुसलमानों की पीठ में छुरा घोंपने" का काम किया है। उनके कार्यक्रम में निर्देश दिए गए हैं कि उनसे कहा कि वे सरकार पर विवादास्पद कानून को वापस लेने के लिए दबाव डालें या हर जगह समुदाय के विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहें।

इन कार्यक्रम में खास तौर पर जेडी(यू) अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, चिराग पासवान और एचएएम (एस) नेता जीतन राम मांझी के अलावा बिहार के बाहर अन्य भाजपा सहयोगियों जैसे एनसीपी अध्यक्ष अजीत पवार और टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू का नाम ले रहे हैं।

वक्फ कानून को लेकर बढ़ता विरोध आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एक अहम राजनीतिक कारक बन सकता है, खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में। अगर AIMPLB के 'वक्फ बचाओ अभियान' को पर्याप्त जनसमर्थन मिला, तो यह NDA के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की क्षमता रखता है।

इन 72 सीटों में से कई सीटें चुनाव परिणाम की दिशा तय कर सकती हैं, और ऐसे में यह साफ है कि वक्फ कानून केवल धार्मिक या कानूनी मुद्दा न रहकर अब सीधे-सीधे एक चुनावी मुद्दा बन चुका है।

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