Bahubali Anand Mohan Release: रिहाई के निकाले जा रहे सियासी मायने, तेज़ हुई ये चर्चा

Bahubali Anand Mohan सिंह की रिहाई के बाद बिहार में सियासी पारा चढ़ गया है। चर्चा तेज़ है कि आनंद मोहन को बाहर लाने के लिए 23 साल पुराने नियम में बदलाव किया गया है।

 Bahubali Anand Mohan Political Points On His Release Know Why Discussion on Bihar Politics

Politics On Anand Mohan Release: बिहार के बाहुबली नेता की रिहाई पर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ चुका है। उनके जेल से रिहा होने के बाद विपक्ष हमलावर है, वहीं सियास गलियारों में अटकलों का बाज़ार गर्म हो चुका है।

आनंद मोहन की रिहाई के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन की सरकार ने अपनी सियासी पैठ मज़बूत करने के लिए नियम में बदलाव क्या है? महागठंबधन के लिए उनका बाहर आना फायदेमंद साबित होगा? इससे बिहार की सियासत कितनी प्रभवित होगी?

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    सियासी जानकारों का कहना है कि महागठबंधन को अगड़ों को साधने के लिए आनंद मोहन जैसी शख्सियत की ज़रूरत थी। राजद में कोई बड़ा राजपूत चेहरा नहीं था। राजपूत समुदाय से जगदानंद सिंह तो हैं, लेकिन उन्हें राजपूत नेता के तौर पर पहचान नहीं मिल सकी।

    अगड़ों को साधने के लिए महागठबंधन में आनंद मोहन परफेक्ट साबित हो सकते हैं। कई संगठन आनंद मोहन की रिहाई के लंबे अरसे से लड़ाई लड़ रहे थे। उनके समर्थकों का मानना था कि उन्हें साज़िश के तहत फंसाया गया और वह रिहा नहीं हो पा रहे हैं।

    महागठंबधन की सरकार आने के बाद वह रिहा हुए हैं, इस वजह से 'महागठबंधन सरकार' को इसका फायदा पहुंचेगा। इशारे इशारे में आनंद मोहन भी जता चुके हैं कि उन्हें रिहा करने में सीएम नीतीश कुमार का अहम योगदान रहा है।

    जेल मैनुअल में हुए बदलाव के बाद गुरुवार सुबह 6.15 बजे आनंद मोहन को रिहा किया गया। सहरसा जेल से रिहा होने की सारी काग़ज़ी कार्रवाई रात में ही पूरी कर ली गई थी। DM की हत्या मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी।

    आनंद मोहन के रिहा होने पर पद्मा (DM जी कृष्णैया की बेटी) ने नाराजगी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले पर सरकार को दोबारा सोचना चाहिए। यह एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे देश के साथ नाइंसाफी हुई है।

    भीम आर्मी भारत एकता मिशन (दलित संगठन) ने पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा कि सरकार ने अपराधियों को बचाने के लिए कानून में बदलाव किया है। यह बहुत ही गलत काम किया गया है। आनंद मोहन की रिहाई पर आनंद IAS एसोसिएशन ने भी ऐतराज़ जताया है। वह इसके खिलाफ कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं।

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