Bagaha Tiger Rescue Operation: टीम के ठिकाना बदलते ही 'आदमखोर बाघ' भी बदल रहा ठिकाना, जारी है खोज

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में काम करनेवाले वन कर्मियों की पूरी फौज बाघ को ढूंढने में लगी हुई है। दिन रात एक कर बाघ की तलाश जारी है। बाघ के पैर का निशान देख कर रेस्क्यू टीम अपना ठिकाना बदल रही है तो बाघ भी अपना ठिकाना बदल...

बगहा, 1 अक्टूबर, 2022। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के तराई इलाके में लोग आदमखोर बाघ की वजह से दहशत में हैं। 19 दिन बीत जाने के बाद भी बाघ पर काबू में नहीं पाया जा सका है। ग्रामीण इलाकों से लेकर जंगलों तक वनकर्मियों की फौज को तैनात किया गया है। कैमरों की मदद से बाघ का सुराग ढूंढा जा रहा है। बाघ को रेस्क्यू करने के लिए 24 घंटे में शिफ्टों में टीम काम कर रही है । गश्ती दल के इलाकों में निगरानी करने के बावजूद भी 'आदमखोर बाघ' को काबू नहीं किया जा सका है। ग्रामीणों को वन क्षेत्र में जाने से मना कर दिया गया है। वहीं वनकर्मियों ने बताया कि वह बाघ को पकड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, जल्द ही कामयाबी मिलेगी। वहीं लगातार ड्यूटी करने से कुछ लोगों की तबियत भी बिगड़ गई है।

'आदमखोर बाघ' भी बदल रहा ठिकाना

'आदमखोर बाघ' भी बदल रहा ठिकाना

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में काम करनेवाले वन कर्मियों की पूरी फौज बाघ को ढूंढने में लगी हुई है। दिन रात एक कर बाघ की तलाश जारी है। बाघ के पैर का निशान देख कर रेस्क्यू टीम अपना ठिकाना बदल रही है तो बाघ भी अपना ठिकाना बदल रहा है। एख क्षेत्र में बाघ के पैर का निशान देखने को मिलता है तो टीम वहां डेरा डालती है, अगले ही पल बाघ के पैर का निशान फिर कहीं और दिखता है तो टीम वहां डेरा जमाती है। रेस्क्यू टीम और बाघ के बीच 'आंख मिचोली' का सिलसिला जारी है। वनकर्मी ना तो रात में सो पा रहे हैं और ना ही दिन में पेट भर खाना खा रहे हैं। उनका बस एक मिशन बना हुआ है कि जल्द से जल्द बाघ को रेस्क्यू किया जाए।

बाघ को पकड़ने के लिए 300 कर्मी तैनात

बाघ को पकड़ने के लिए 300 कर्मी तैनात

नेशामणि (वन संरक्षक, टाइगर रिजर्व) की मानें तो वनकर्मी चुनौतियों से जूझते हुए अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं, जल्द ही कामयाबी मिल जाएगी। कई दिनों से लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में ड्यूटी कर रहे कई वनकर्मियों की तबितय खराब हो गई, जिन्हें छुट्टी पर भेजा गया है। उन वनकर्मियों की जगह पर दूसरे कर्मियों की तैनाती की गई है। बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने 300 कर्मियों को तैनात किया है।

'कभी सड़क पर तो कभी बगीचे में बना रहे खाना'

'कभी सड़क पर तो कभी बगीचे में बना रहे खाना'

रेस्क्यू ऑपरेशन में तैनात वनकर्मी रात के अंधेरे में खुद को महफूज़ रखते हुए आग जलाकर बाघ की तलाश में जुटे हुए हैं। इसके साथ जानवरों से बचने के लिए पटाखे का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। वनकर्मियों की राते पेड़ों पर गुज़र रही है, दिन पहरेदारी करने में गुज़र रहा है। ड्यूटी करते हुए सभी कर्मियों की हालत बहुत की खराब हो रही है। कभी सड़क पर तो कभी बगीचे में खाना बनाकर वह लोग अपनी भूख मिटा रहे हैं।

बाघ को रेस्क्यू करने के लिए एक्सपर्ट की टीम

बाघ को रेस्क्यू करने के लिए एक्सपर्ट की टीम

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल-2 हरनाटाड़ क्षेत्र में आदमखोर बाघ को रेस्क्यू करने के लिए एक्सपर्ट की टीम बुलाई गई है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पीके गुप्ता के नेतृत्व में संजय गांधी जैविक उद्यान के रेस्क्यू दल को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में डेरा डाल चुके हैं। रेस्क्यू करने पहुंची एक्सपर्ट की टीम में तीन वनकर्मी एक पशु चिकित्सक समरेंद्र कुमार पहुंचे हैं। रेस्क्यू टीम पांच वन क्षेत्रों के कर्मियों के साथ मिलकर बाघ को काबू करने की योजना बना रहे हैं।

बाघ को खुले इलाके में ट्रैंकुलाइज़र करने की योजना

बाघ को खुले इलाके में ट्रैंकुलाइज़र करने की योजना

एक्सपर्ट शूटर शफाअत अली को रेस्क्यू टीम में बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिये शामिल किया गया है। रेस्क्यू के लिये बनाये गये प्लान के मुताबिक टीम के सभी मेम्बर अपने काम को अंजाम देंगे। बाघ को काबू करने के बाद इलाके से 30 किमी बिना आबादी वाले क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। एक्सपर्ट की मानें तो ट्रैंकुलाइज़र (बाघ को बेहोश करने वाली दवा) का असर क़रीब 40 मिनट तक ही रहता है। इसके मद्देनज़र खुले जगह मे ही बाघ को ट्रैंकुलाइज किया जाएगा, ताकि बेहोश करने के बाद बाघ को आसानी से ढूंढा जा सके।

5 महीने में करीब आधा दर्जन लोग हुए शिकार

5 महीने में करीब आधा दर्जन लोग हुए शिकार

आदमखोर बाघ ने पिछले 5 महीने में करीब आधा दर्जन ग्रामीणों को आदमखोर बाघ अपना शिकार बना चुका है। हाल ही में हरनाटांड़ के बैरिया कला गांव में बाघ ने एक महिला को अपना शिकार बना लिया था। जिसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाया था। इसके साथ ही हरनाटांड़ वन कार्यालय का घेराव भी किया था। रिहायशी इलाके के आसपास बाघ के पैरों का निशान को देखने के बाद फिर से लोगों में दहशत का माहौल है।

सुरक्षा के मद्देनज़र कैंप कर रही टीम

सुरक्षा के मद्देनज़र कैंप कर रही टीम

वन विभाग के अधिकारियों ने पांचों वन क्षेत्र कर्मियों को अलर्ट कर दिया है। इसके साथ ही ग्रामीणों को जंगल के तरफ़ जाने से मना भी किया गया है। हर्नाटांड़ वन क्षेत्र के बैरिया कला गांव के पास जंगल के पास दो दर्जन वन कर्मियों की टीम सुरक्षा के मद्देनज़र कैंप कर रही है।

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