Gopalganj News:चर्चाओं में हीरा और मोती की जोड़ी, बैल से पुलिस और मालिक दोनों परेशान

बिहार में अपराध के कई मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। इस शराब की तस्करी को लेकर अजूबा मामला आया है, जिसकी वजह से बैल के मालिक और पुलिस दोनों ही परेशान है।

गोपालगंज, 1 अक्टूबर 2022। बिहार में अपराध के कई मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। इस शराब की तस्करी को लेकर अजूबा मामला आया है, जिसकी वजह से बैल के मालिक और पुलिस दोनों ही परेशान है। बैल पर ना मालिक का अधिकारी है और पुलिस बैल की नीलामी नहीं कर पा रही है। बैल पर अधिकार नहीं होने के बावजूद उसे चारा खिलाने से बैल मालिक परेशान है, क्योंकि वह उस बैल को अपने काम में इस्तेमाल नहीं कर सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला क्या है, किस तरह बैल की वजह से पुलिस और मालिक दोनों परेशान है।

बैलों की सेवा करते-करते मालिक परेशान

बैलों की सेवा करते-करते मालिक परेशान

भगवानपुर (नौतन प्रखण्ड, बेतिया) निवासी ओमप्रकाश यादव (बैल मालिक) ने बताया कि 9 महीने पूरे होने वाले है, वह बिना काम करवाए अपने दोनों बैलों की सेवा कर रह है। अब उसके पास पैसे नहीं बचे हैं कि वह बैल को छोड़ सकता है। दरअसल शराबबंदी के बाद शराब तस्करी मामले में पुलिस ने ओम प्रकाश यादव की बैलगाड़ी और बैल को ज़ब्त किया था। उसके बाद से बैल और बैलगाड़ी ओमप्रकाश के नहीं रहे लेकिन बैलों को चारा उसे ही खिलाना पड़ रहा है। अब ओमप्रकाश यादव के पास में चारा खिलाने के पैसे नहीं बचे हैं।

सरकार बैल को आजाद करे या खर्चा दे- ओमप्रकाश

सरकार बैल को आजाद करे या खर्चा दे- ओमप्रकाश

विक्रम कुमार (थाना अध्यक्ष) ने बताया कि ओमप्रकाश को हर महीने 10 हजार रुपये बैलों की देखभाल के लिए थाना द्वारा दी जाती है। बैलों के नीलाम करने की कोशिश की जा रही है, जो भी कानूनी कार्रवाई है वह सब की जा रही है। वहीं ओमप्रकाश यादव (बैल मालिक) का आरोप है कि 50 हजार से ज्यादा रुपये पिछले 9 महीने में बैलों के चारा में खर्च चुके हैं। थाना की तरफ से अभी तक एक रुपये भी नहीं दिया गया है। ओमप्रकाश यादव का कहना है कि बैलों को नीलाम करने के लिए 60 हजार रुपये क़ीमत रखी गई है, जो कि मुमकिन नहीं है। इसलिए सरकार हमारे बैल को आज़ाद करे या फिर इस पर हो रहे खर्चे की राशि दे।

बैलगाड़ी से हो रही थी शराब की तस्करी

बैलगाड़ी से हो रही थी शराब की तस्करी

बैलों ने किस तरह से पुलिस और मालिक दोनों को परेशान कर रखा है, यह तो आपने पढ़ लिया लेकिन यह पूरा मामला क्या है वह भी जान लीजिए। 25 जनवरी 2022 को यादोपुर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार छापेमार कार्रवाई की थी। रामपुर टेंगराही गांव के पास बांध पर बैलगाड़ी में चारा (घास) से छिपाकर रखे शराब पुलिस ने बरामद किया था। इस मामले में चार लोग अभियुक्त बनाए गए थे, जिसमे तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, इन लोगों में ओमप्रकाश यादव भी शामिल था । वहीं एक आरोपी मौक़े से फरार हो गया था।

शराब तस्करी मामले बैल और बैलगाड़ी ज़ब्त

शराब तस्करी मामले बैल और बैलगाड़ी ज़ब्त

मिथिलेश प्रसाद सिंह (तत्काालीन थानाध्य क्ष) के बयान पर एंटी लिकर टास्कत फोर्स ने मामला दर्ज कर किया था। शराब तस्करी मामले में बैलगाड़ी को जब्तक किया गया था। बैलगड़ी ज़बत् कर अभियुक्त के ज़िम्मे बैल की देखभाल डाल दिया। चूंकि ओमप्रकाश यादव अभियुक्त था इसलिए उसके भाई के नाम जिम्मेनामा दस्तावेज़ बनाया गया। वहीं ओमप्रकाश की मानें तो उसके भाई के नाम पर जिम्मेनामा बनाया गया और बैल की जिम्मेदारी मेरे ऊपर सौंप दी गई। उसने कहा कि जब मैं जेल गया तो छह महीने तक पत्नी ने किसी तरह से बैलो की सेवा की। मेरे जेल से बाद भी बौलों की सेवा (चारा-पानी) हम लोग कर रहे हैं।

बैलों और बैलगाड़ी के नहीं मिले खरीदार

बैलों और बैलगाड़ी के नहीं मिले खरीदार

ओमप्रकाश यादव ने कहा कि बैलो की सेवा की वजह से कहीं जा भी नहीं पा रहे हैं। बैलों से कोई काम लिया तो उसे नुकसान की जवाबदेही भी हम लोगों पर ही आएगी। पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुझपर कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं पुलिस महकमा भी बैलों के चक्कर से निजात पाना चाहता है, इस बाबत गोपालगंज के डीएम को रिपोर्ट भी सौंपी गई थी। जिलाधिकारी ने बैलों और बैलगाड़ी की कीमत 60 हज़ार रुपये तय करते हुए नीलामी की तारीख भी तय कर दी थी। लेकिन तय कीमत पर बैलों और बैलगाड़ी के खरीदार ने नहीं मिले।

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