Anil Basak AIR 45 : कभी परिवार था BPL में, पिता लगाते थे फेरी, अब बेटा अनिल बसाक बना IAS
किशनगंज (बिहार) , 27 सितम्बर। 26 साल पहले बिहार के किशनगंज जिले के गांव खारुदाह के बसाक परिवार में दूसरी संतान के रूप में बेटा पैदा हुआ। नाम रखा अनिल बसाक। तब यह परिवार बीपीएल श्रेणी का हुआ करता था। इसके सिर पर पक्की छत तक नहीं थी। आज अनिल बसाक आईएएस हैं।

आईएएस अनिल बसाक का इंटरव्यू
बेइंतहा गरीबी में जीने वाले परिवार से आईएएस निकलने की यह पूरी कहानी हर किसी को प्रेरित करने वाली है। वन इंडिया हिंदी से बातचीत में आईएएस अनिल बसाक ने अपने पिता के संघर्ष और खुद की मेहनत के बारे में विस्तार से बताया।

अनिल बसाक की जीवनी
नाम-अनिल बसाक
पिता बिनोद बसाक
माता-मंजू देवी
जन्म-2 अगस्त 1995
वर्तमान पता-नेपालगढ़ कॉलोनी किशनगंज बिहार
यूपीएससी 2020 में रैंक 45
8वीं-ओरिएंटल पब्लिक स्कूल किशनगंज से
10वीं- अररिया पब्लिक स्कूल से
12वीं बाल मंदिर किशनगंज से
2014 में आईआईटी में चयन
2018 में आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की

अनिल बसाक के पिता का संघर्ष
अनिल को आईएएस बनाने के लिए उनके पिता बिनोद बसाक ने काफी संघर्ष किया। बिनोद बसाक बचपन में राजस्थान के चूरू जिले के सरदारशहर के एक व्यापारी के यहां हाउस हेल्पर का काम किया करते थे। फिर किशनगंज लौट आए और फेरी लगाकर कपड़े बेचने लगे। कपड़ों की जानकारी होने के कारण ही उन्हें सरदारशहर के व्यापारी की किशनगंज स्थित दुकान पर काम करने का अवसर मिला। इसके बाद बिनोद बसाक ने खुद ही कपड़े का छोटा सा व्यवसाय शुरू कर लिया, जो अब भी जारी है। सारा काम वे अकेले ही देखते हैं। उनके पास कोई स्टाफ नहीं है। यह एक तरह से कुटीर उद्योग (माइक्रो इंडस्ट्री) है।

चौथी तक पढ़े बिनोद ने बेटों का बनाया अफसर
बिनोद बसाक खुद चौथी कक्षा तक पढ़ पाए, मगर कई भाषाओं के जानकार हैं। साथ ही उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद उन्होंने अपने ने बेटों के स्कूल की ओर बढ़ते कदम कभी नहीं रोके। चार बेटे अनिल, बाबूल, विक्रम व सुनील को पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर दिया। नतीजा यह है कि अनिल बसाक साल 2021 में आईएएस बने गए और साल 2018 में बाबूल की भी बिजली विभाग में नौकरी लग गई। इसके बाद नया घर बनवाया। बड़े भाई की बिजली विभाग में नौकरी और अनिल के आईआरएस बनने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया। सभी भाई अविवाहित हैं।

गांव से जिला मुख्यायल आया परिवार
अनिल बसाक के जन्म के तीन साल बाद 1998 में इनका परिवार गांव खारुदाह से जिला मुख्यालय किशनगंज आ गया। यहां साल 2005 तक किराए के मकान में रहा। फिर बिनोद ने किशनगंज की नेपालगढ़ कॉलोनी में स्थित 76 हजार रुपए में ढाई कठठा जमीन खरीदी। यह जमीन नॉन रजिस्टर्ड होने की वजह से सस्ती मिली। वर्तमान में उसी पर खुद के मकान बना रखे हैं। धीरे-धीरे परिवार से बीपीएल से मीडिल क्लास श्रेणी में आ गया।

पहली बार में प्री भी पास नहीं हुई
12वीं के बाद अनिल का आईआईटी जेई में चयन हो गया था। ऐसे में दिल्ली आ गए। यहां पर आईआईटी के साथ-साथ इनका रुझान यूपीएससी की तैयारी की ओर हुआ। साल 2016-17 तक अनिल ने दिल्ली में विजन आईएएस और साल 2017-18 में आईएमएस से कोचिंग की और यूपीएससी परीक्षा 2018 में भाग्य आजमाया। पहली बार में प्री भी पास नहीं कर पाए।

अनिल तीसरे प्रयास में बने आईएएस
अनिल ने हार नहीं मानी और साल 2019 में दूसरा प्रयास किया, जिसमें इन्हें 616वीं रैंक मिली और आईआरएस इनकम टैक्स सेवा मिली। 28 दिसम्बर 2020 में आईआरएस के रूप में ज्वाइन कर अनिल बसाक ने एक साल की लीव ले ली। फिर यूपीएससी 2020 में तीसरी बार हिस्सा लिया। 24 सितम्बर 2021 को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का रिजल्ट आया तो अनिल का सपना पूरा हो गया। 45 रैंक हासिल करते हुए अनिल आईएएस बन गए हैं।

कोचिंग के पेपर बनाकर निकाला पढ़ाई का खर्च
अनिल बसाक कहते हैं कि इन्होंने वो दौर भी देखा है जब पाई-पाई के लिए मोहताज होना पड़ता था। दिल्ली में कोचिंग के दौरान दस हजार रुपए में कोचिंग का पेपर तैयार करके खर्च निकालते थे। इसके अलावा अनिल बसाक को विभिन्न तरह की छात्रवृत्ति से करीब पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद मिली। अनिल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉलेज साथियों से भी रुपए उधार लिया करते थे।

परिवार में दसवीं पास करने वाले दूसरे शख्स
अनिल कहते हैं कि वे अपने परिवार में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले दूसरे शख्स हैं। पहले शख्स भाई बाबूल हैं। इसके अलावा अपने जिले किशनगंज से सिविल सेवा में जाने वाले चौथे शख्स हैं। 1990 में किशनगंज जिला बनने के बाद से सिर्फ तीन युवक आईएएस व आईपीएस बन पाए हैं।












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