लिंगराज मंदिर: भक्तों के लिए खुला भुवनेश्वर का सबसे बड़ा देवालय, एंट्री के लिए वैक्सीन के 2 डोज जरूरी
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित सबसे बड़ा देवालय "लिंगराज मंदिर" भक्तों के लिए खुल गया है। कोरोनाकाल से इस मंदिर में भक्तों के प्रवेश पर रोक थी। करीब 5 महीने बाद आज इसे श्रद्धालुओं के लिए पुन: खोल दिया गया। मंदिर ट्रस्ट की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए। ट्रस्ट के अनुसार, कोविड वैक्सीन की दोनों डोज़ लगवा चुके श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति होगी और एक बार में 100 श्रद्धालु ही मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।
- यहां इस मंदिर की विशेषताएं जानिए..

भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर अब खुला
लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर है। कई कारणों से इस मंदिर का विशेष महत्व है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव की पत्नी को यहां भुवनेश्वरी कहा जाता है। वहीं, शिव यहां लिंगराज कहे जाते हैं। मंदिर का एक अन्य पहलू ये है कि यह ओडिशा में शैव और वैष्णववाद संप्रदायों के समन्वय का प्रतीक है। इसकी वजह बताई जाती है कि, भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु का एक अवतार) और लिंगराज मंदिर दोनों एक ही समय पर अस्तित्व में आए होंगे। इस मंदिर में देवता को हरि-हारा के नाम से जाना जाता है, जिसमें हरि का अर्थ भगवान विष्णु और हर का तात्पर्य- भगवान शिव से है।

11वीं शताब्दी में बना यह विशाल मंदिर
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, यह मंदिर 11वीं शताब्दी में बना। ऐसा माना जाता है कि, इसका निर्माण सोमवंशी राजा ययाति प्रथम (Yayati I) ने करवाया था। श्री लिंगराज मंदिर को जगन्नाथ धाम पुरी का सहायक शिव मंदिर माना जाता है। यह मंदिर लाल पत्थर से निर्मित है जो कलिंग शैली की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर के परिसर में ही छोटे-छोटे 100 से ज्यादा मंदिर हैं, जिनमें कई देवताओं की प्रतिमा मौजूद हैं। बताया जाता है कि, विशाल परिसर में फैले इस मंदिर में 150 सहायक मंदिर हैं।

सिर्फ हिंदू आते हैं, गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित
लिंगराज मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। सरकार द्वारा अगस्त 2020 में लिंगराज मंदिर को 350 वर्ष पूर्व वाली संरचनात्मक स्थिति प्रदान करने की घोषणा की गई थी। यहां बिंदुसागर झील दर्शनार्थियों के बीच काफी प्रसिद्ध है, जो मंदिर के उत्तर दिशा में स्थित है। बिंदुसागर झील के पश्चिमी तट पर एकाराम वन नाम का बगीचा भी है। कहते हैं कि- पौराणिक ग्रंथों में भुवनेश्वर की राजधानी ओडिशा को एकामरा वन या आम के पेड़ के वन के रूप में संदर्भित किया गया, तब से बगीचा के नाम ऐसा हो गया।

यहां स्वत: स्थापित हुई थी शिवलिंग
लिंगराज को 'स्वयंभू' मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। अर्थात् जहाँ शिवलिंग की स्थापना किसी के द्वारा नहीं की गई बल्कि यह स्वत: स्थापित होता है।

मंदिर के 4 अनुभाग
- इसके 150 सहायक मंदिरों वाले विशाल परिसर को चार वर्गों में विभाजित किया गया है। जिनमें...
- विमान (गर्भगृह युक्त संरचना)
- यज्ञ शाला (प्रार्थना के लिये हॉल)
- भोग मंडप (प्रसाद हेतु हॉल)
- नाट्य शाला (नृत्य के लिये हॉल) शामिल हैं।













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