ओडिशा सरकार ने बंद की 'आशीर्वाद योजना', अब अनाथ बच्चों को इस योजना के तहत मिलेगा लाभ
भुवनेश्वर, सितंबर 14। कोरोना महामारी के दौरान ओडिशा सरकार ने शुरू की 'आशीर्वाद योजना' को ढाई महीने के अंदर ही बंद कर दिया है। राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस योजना को 15 सितंबर से बंद करने का ऐलान किया है। आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस योजना को कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए शुरू किया था। इस योजना के तहत कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को आर्थिक मदद देने का ऐलान सरकार ने किया था, लेकिन अब राज्य में कोरोना के कम होते केस को देखते हुए इस योजना को बंद करने का ऐलान किया गया है।

15 सितंबर से ओडिशा में कोरोना के कारण अनाथ होने वाले बच्चों को बाल संरक्षण योजना (सीपीएस) के तहत कवर किया जाएगा, जिसे पहले राज्य सरकार की एकीकृत बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस) कहा जाता था। डब्ल्यूसीडी विभाग के निदेशक अरविंद अग्रवाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आशीर्वाद योजना के तहत अब तक कवर किए गए सभी अनाथों को 18 वर्ष की आयु या गोद लेने तक लाभ मिलता रहेगा। अधिसूचना में कहा गया है, "आशीर्बाद योजना उन बच्चों को कवर करेगी जो 1 अप्रैल, 2020 और 15 सितंबर, 2021 के बीच अनाथ हो गए थे।"
राज्य सरकार ने 1 अप्रैल, 2020 को या उसके बाद महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रखरखाव के लिए आशीर्वाद योजना शुरू की थी। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में लगभग 8,700 बच्चों को अनाथ घोषित किया गया है और आशीर्वाद योजना के तहत राशि प्राप्त कर रहे हैं। विभाग के सूत्रों ने कहा कि सूची में अन्य 25,000 से 30,000 अनाथों को जोड़ा जाएगा। "हमने अब तक आंगनवाड़ी और आशका कर्मियों के माध्यम से लगभग 30,000 अनाथों की पहचान की सुविधा प्रदान की है।
15 सितंबर के बाद अनाथ बच्चों की पहचान जिला बाल संरक्षण अधिकारियों द्वारा की जाएगी और उन्हें संस्थागत देखभाल के तहत रखा जाएगा या यदि वे अपने विस्तारित परिवारों के साथ रहने का विकल्प चुनते हैं तो उन्हें प्रायोजन योजना सहायता प्रदान की जाएगी।












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