क्या आदिवासियों को रिझाने आ रहे गृहमंत्री अमित शाह, 22 अप्रैल को तेंदूपत्ता संग्राहकों का सम्मेलन
मध्यप्रदेश में आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए बीजेपी ने कमर कस ली है। 22 अप्रैल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भोपाल दौरा है। जहां पर वे तेंदूपत्ता संग्राहको को के सम्मेलन में शामिल होंगे।
भोपाल, 20 अप्रैल। मध्य प्रदेश में भले ही अभी शिवराज सिंह चौहान की BJP वाली सरकार है, लेकिन 2018 में बीजेपी ने 3 प्रदेशों में जो हार देखी और खासकर मध्य प्रदेश में उसकी हार की सबसे बड़ी वजह आदिवासी वोटर्स का कांग्रेस की ओर जाना था। 2018 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासी सीटों पर बीजेपी को भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में बीजेपी अब आदिवासी जनजाति गौरव दिवस और अब तेंदूपत्ता संग्राहक को रिझा कर आदिवासी वोट बैंक बढ़ाना चाहती है। जैसे उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को साधने में बीजेपी कामयाब रही। वैसे ही मध्य प्रदेश में अब रूठे वोटर्स को मनाने के लिए बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। अब यह जानना होगा कि मध्य प्रदेश में भव्य कार्यक्रम करके बीजेपी छत्तीसगढ़ के आदिवासियों को कैसे वापस अपना बना सकेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भोपाल के जंबूरी मैदान में वन समितियों का महासम्मेलन आयोजित होगा। शुक्रवार 22 अप्रैल को दोपहर 2:30 से आयोजित सम्मेलन में प्रदेश के एक लाख से अधिक वन समितियों के सदस्य सम्मिलित होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan ) करेंगे। कार्यक्रम में वनमंत्री कुंवर विजय शाह, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr. Narottam Mishra) नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह, सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया, सांसद विष्णुदत्त शर्मा एवं प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
गृह मंत्री की उपस्थिति में प्रदेश में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने का शुभारंभ होगा। वन समितियों के सम्मेलन की तैयारी भोपाल के जंबूरी मैदान में युद्ध स्तर पर जारी है। लगभग 1 लाख लोगों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। इस मेगा कार्यक्रम में 8 बड़ी स्क्रीन भी लगाई जा रही हैं। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल पर संस्कृति कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
जिला वन मंडल अधिकारी पाठक ने बताया कि भोपाल में 126 वन समितियां हैं। इसमें 8 लघु वन उपज समिति हैं, जो तेंदूपत्ता संग्राहक का काम करती हैं। भोपाल में 17 हजार से अधिक वन समितियों के सदस्य हैं। इनमें से 12 हजार लघु वन उपज समिति में सदस्य हैं, जो तेंदूपत्ता संग्रहण का काम करते हैं।
भोपाल जिले के समर्धा में 39, बैरसिया में 50 और नजीराबाद में 37 वन समितियां कार्यरत हैं। यह सभी समिति ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण, तालाब निर्माण, गोडाउन, और गौ-शाला निर्माण का काम भीॉ करती हैं।












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