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जानिए MP के दमोह में कैसे हुआ जातिगत अपमान, कुशवाहा युवक से ब्राह्मण के पैर धोवाकर पानी पिलाया

मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पटेरा ब्लॉक के सतरिया गांव में एक ऐसी घटना घटी है, जो मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली है। यहां कुशवाहा समाज के युवक पुरुषोत्तम कुशवाहा को कथित तौर पर ब्राह्मण युवक अन्नू पांडे के पैर धोकर उसका पानी पीने की अपमानजनक सजा दी गई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुरुषोत्तम को पैर धोते और माफी मांगते दिखाया गया है, लेकिन पानी पीने का वीडियो गायब है। यह पूरा मामला गांव की आपसी शराबबंदी से जुड़ा है, जो दो व्यक्तियों के विवाद से सामुदायिक स्तर पर जातिगत तनाव में बदल गया। पीड़ित परिवार डरा-सहमा है और शिकायत दर्ज नहीं करना चाहता, जबकि पुलिस-प्रशासन अभी भी औपचारिक शिकायत का इंतजार कर रहा है।

VIDEO viral in Damoh Sataria village Kushwaha youth made to wash Brahmin feet and drink water

विपक्ष ने इसे "जातिवादी साजिश" बताते हुए CBI जांच की मांग की है, वहीं स्थानीय प्रशासन इसे "आपसी सुलह" का मामला बता रहा है। बुंदेलखंड के ग्रामीण समाज में व्याप्त रूढ़ियों और सामाजिक भेदभाव की यह घटना दमोह के इतिहास में काला धब्बा बन गई है।

यह घटना न केवल कानूनी अपराध है - जिसमें SC/ST एक्ट की धाराओं का उल्लंघन हो सकता है - बल्कि सामाजिक सद्भाव को चोट पहुंचाने वाली भी है। वीडियो वायरल होने के बाद गांव में तनाव का माहौल है, और कुशवाहा समाज के लोग भी चुप हैं। पुरुषोत्तम ने न केवल माफी मांगी, बल्कि 5100 रुपये का अर्थदंड भी दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह "सजा" न्याय है या अपमान? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं ग्रामीण भारत में जाति-आधारित हिंसा को बढ़ावा देती हैं।

शराबबंदी से AI पोस्ट तक, अपमान की सजा

सतरिया गांव, जो दमोह से करीब 40 किलोमीटर दूर पटेरा ब्लॉक में स्थित है, एक छोटा-सा ग्रामीण इलाका है जहां ग्रामवासियों ने आपसी सहमति से शराबबंदी लागू की है। यह नियम गांव की शांति और नैतिकता बनाए रखने के लिए था, लेकिन हाल ही में यह विवाद का केंद्र बन गया। जानकारी के अनुसार, ब्राह्मण युवक अन्नू पांडे पर गांव में शराब बेचने का आरोप लगा। ग्रामीणों की शिकायत पर पंचायत ने उसे पकड़ लिया और सजा सुनाई - पूरे गांव में घूमकर माफी मांगना और 2100 रुपये का अर्थदंड। अन्नू ने यह सजा स्वीकार कर ली।

इस बीच, कुशवाहा समाज के पुरुषोत्तम कुशवाहा ने अन्नू का एक फोटो एडिट किया। AI टूल की मदद से उन्होंने अन्नू को जूते की माला पहने दिखाया और इसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। पोस्ट में कैप्शन था, "शराबबंदी का उल्लंघन करने वालों को सबक।" गांव में जैसे ही यह बात फैली, विवाद भड़क गया। पुरुषोत्तम ने हड़बड़ी में मात्र 15 मिनट में पोस्ट डिलीट कर दी और अन्नू से माफी मांग ली। लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। अन्नू पांडे ने पुरुषोत्तम और उसके परिवार को गालियां दीं, जिसके बाद सतरिया और आसपास के ब्राह्मण समाज के लोग एकजुट हो गए।

उन्होंने इसे "समस्त ब्राह्मण समाज का अपमान" बताते हुए पुरुषोत्तम को बुलाया। वहां मौजूद ग्रामीणों - जिसमें कुशवाहा समाज के लोग भी शामिल थे - ने पुरुषोत्तम को सजा दी: अन्नू के पैर धोना, उस पानी को पीना और समस्त ब्राह्मण समाज से माफी मांगना। वीडियो में पुरुषोत्तम पैर धोते और माफी मांगते दिख रहे हैं, लेकिन पानी पीने का क्लिप गायब है। इसके अलावा, पुरुषोत्तम से 5100 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे ब्राह्मणों को "जन्म से पूजनीय" मानते हैं, इसलिए शिकायत नहीं करना चाहते। लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया।

तारीख/समय,घटना

  • 5-7 अक्टूबर 2025,सतरिया गांव में अन्नू पांडे पर शराब बेचने का आरोप; पंचायत सजा सुनाती है - माफी और 2100 रुपये जुर्माना।
  • 8 अक्टूबर 2025,पुरुषोत्तम कुशवाहा AI एडिटेड फोटो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं; 15 मिनट बाद डिलीट और माफी।
  • 9 अक्टूबर 2025,"अन्नू पांडे परिवार को गालियां देते हैं; ब्राह्मण समाज एकजुट, पुरुषोत्तम को बुलाते हैं।"
  • 10 अक्टूबर 2025,"पुरुषोत्तम को पैर धोने और पानी पीने की सजा; वीडियो रिकॉर्ड, 5100 रुपये अर्थदंड। माफी मंगवाई जाती है।"
  • 11 अक्टूबर 2025,वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
  • 12 अक्टूबर 2025,"पुलिस-प्रशासन अलर्ट; विपक्ष CBI जांच की मांग। दोनों पक्ष ""आपसी सुलह"" का दावा।"

सामाजिक प्रभाव: रूढ़ियां जिंदा, परिवार डरा-सहमा

यह घटना बुंदेलखंड के ग्रामीण समाज में व्याप्त जातिगत रूढ़ियों को उजागर करती है। पैर धोना और पानी पीना - जो परंपरागत रूप से "अपमान" का प्रतीक माना जाता है - ने कुशवाहा समाज में आक्रोश पैदा किया है। हालांकि, पीड़ित परिवार ने कहा, "हम ब्राह्मणों से डरते हैं। शिकायत की तो गांव छोड़ना पड़ेगा।" गांव में कुशवाहा समाज के लोग भी मौजूद थे, लेकिन चुप रहे। सामाजिक कार्यकर्ता रेखा सिंह ने कहा, "यह SC/ST एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। ग्रामीण पंचायतें कानून से ऊपर नहीं।"

सोशल मीडिया पर वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। इंस्टाग्राम रील्स में इसे "कानून की मजबूती पर सवाल" बताया गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे "बीजेपी सरकार में जातिवाद का बोलबाला" बताते हुए दमोह में प्रदर्शन की चेतावनी दी। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ट्वीट किया, "दमोह का यह कांड मानवता को शर्मसार करता है। CBI जांच हो, दोषियों को सजा मिले।" वहीं, BJP ने इसे "व्यक्तिगत विवाद" बताया और कहा कि प्रशासन निगरानी रखेगा।

पुलिस-प्रशासन की प्रतिक्रिया: शिकायत का इंतजार, लेकिन अलर्ट

दमोह SP अजय कुमार वार्ष्णेय ने कहा, "हमें वीडियो की जानकारी है, लेकिन औपचारिक शिकायत नहीं मिली। अगर आती है, तो IPC 506 (धमकी) और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।" पटेरा तहसीलदार ने गांव में शांति समिति बिठाई है। कलेक्टर सतेन्द्र सिंह ने कहा, "यह आपसी मामला लगता है, लेकिन निगरानी रखी जाएगी।" हालांकि, मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेने की संभावना जताई है। पीड़ित परिवार की चुप्पी प्रशासन के लिए चुनौती है।

विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई

कांग्रेस ने इसे "मोहन यादव सरकार की विफलता" बताया। दमोह विधायक राहुल सिंह लोधी ने कहा, "जातिगत अपमान बर्दाश्त नहीं। हम हाईकोर्ट जाएंगे।" BJP ने पलटवार किया, "विपक्ष सियासत कर रहा है। गांव में सुलह हो गई।" यह मुद्दा बुंदेलखंड में जातिगत समीकरण बिगाड़ सकता है, जहां कुशवाहा और ब्राह्मण वोट बैंक महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण पंचायतों को कानूनी बंधन में लाने की जरूरत है।

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