Bhopsl AIIMS: कैंसर और प्लास्टिक सर्जरी की मदद से स्तन कैंसर का सफल ऑपरेशन

Bhopal Aiims News: राजधानी भोपाल में स्थित एम्स हॉस्पिटल में एक और सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। बता दे 40 वर्षीय महिला पिछले 6 महीने कैंसर (breast cancer) की बीमारी से परेशान थी, लेकिन इलाज करने के लिए उसके पास पैसों का अभाव था। ऐसी स्थिति में उसे किसी ने सलाह दी कि वह भोपाल एम्स में जाकर अपना इलाज करवाएं। इसके बाद महिला का राजधानी में पीड़ित महिला का प्लास्टिक सर्जरी की मदद से स्तन कैंसर का सफल ऑपरेशन किया गया

बता दे नर्मदापुरम की रहने वाली 40 साल की एक मरीज पिछले 6 महीनों से बाएं स्तन में कैंसर की गांठ से पीड़ित थी। शहर के अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद उसे बताया गया कि इसके इलाज में ऑपरेशन द्वारा स्तन को निकालना होगा, जिसका खर्चा लगभग 3 लाख रुपये आएगा। यह जानकर महिला टूटने लगी थी। घर वालों से सलाह कर उसने सोच क्यों न एम्स में एक बार दिखा लिया जाए।

Successful operation of breast cancer of 40 year old woman with the help of plastic surgery in AIIMS

एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ नीलेश श्रीवास्तव द्वारा रोगी की विभिन्न क्लिनिकल, रेडियोलॉजिकल और हिस्टोपैथोलॉजिकल जाँचे कराईं और इलाज के लिए योजना बनाई गई, जिससे मरीज के स्तन का कैंसरग्रस्त भाग ऑपरेशन के द्वारा निकाल कर प्लास्टिक सर्जरी की सहायता से उसे सामान्य रूप दिया जा सके।

ऑपरेशन के दौरान सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी करके फ्रोजन सेक्शन के लिए भेजा गया। घातकता के लिए सकारात्मक पाए जाने पर ट्यूमर और एक्सिलरी विच्छेदन के व्यापक स्थानीय डिसेक्शन करते हुए पार्श्व इंटरकोस्टल परफोरेटर फ्लैप लगाया गया ।यह सर्जरी एम्स के प्रोफेसर और प्रभारी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विनय कुमार के मार्गदर्शन में की गई। डॉ नीलेश श्रीवास्तव सहायक प्रोफेसर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग, डॉ. दीपक कृष्णा एसोसिएट प्रोफेसर, बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी और डॉ. संदीप (सहायक प्रोफेसर एनेस्थीसिया) के नेतृत्व वाली टीम द्वारा सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया।

प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ मनाल खान ने बताया, कि यह एक बेहद कास्मेटिक ऑपरेशन है, जिसके द्वारा कैंसर पीड़ित रोगी के स्तन को पूरा निकालने के बजाय केवल कैंसर संक्रमित भाग को निकाल कर, प्लास्टिक सर्जरी द्वारा स्तन को सामान्य आकार दे दिया जाता है । इससे न केवल मरीज के शरीर को सामान्य स्वरूप मिलता है, मरीज मनोवैज्ञानिक रूप से काफी सकारात्मक रहता है।

यह प्रक्रिया एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में नियमित रूप से की जा रही है। सेंटिनल नोड बायोप्सी अत्यधिक विच्छेदन को रोक सकती है और रुग्णता को कम कर सकती है, जो कि अब एम्स में किया जा रहा है।पुनर्निर्माण के साथ स्तन संरक्षण सर्जरी भविष्य में कंधे की शिथिलता की रुग्णता के साथ-साथ बगल के विच्छेदन को बचा सकती है, साथ ही स्तन के सामान्य आकार को बनाए रखने में भी मददगार है।

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