MP News: मोहन यादव सरकार में सोयाबीन किसानों को कैसे मिलेगा भावांतर योजना का लाभ, राशि सीधे खाते में, जानिए
Soybean Farmers MP News: मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने किसानों की मांग पर भावांतर भुगतान योजना को फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। यह योजना सात साल बाद लौट रही है, जिसे कमलनाथ सरकार ने 2018 में बंद कर दिया था।
अब सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर फसल बिकने पर सरकार अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी हालत में उन्हें घाटा नहीं होने दिया जाएगा। यह फैसला किसान संघों के सुझाव पर लिया गया है, और इससे प्रदेश के करीब 25 लाख सोयाबीन किसान लाभान्वित होंगे।

हाल ही में अनियमित बारिश और कीट प्रकोप से सोयाबीन फसल को नुकसान पहुंचा है, ऐसे में यह योजना किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
भावांतर योजना क्या है? सोयाबीन किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
भावांतर भुगतान योजना मध्य प्रदेश सरकार की एक किसान हितैषी पहल है, जो 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। योजना के तहत, किसान अपनी सोयाबीन मंडियों में बेच सकते हैं, बिना किसी उपार्जन या भंडारण की चिंता के। यदि मंडी में बिक्री मूल्य MSP से कम होता है, तो सरकार MSP और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर (भावांतर) सीधे किसान के खाते में जमा कर देगी।
इस साल सोयाबीन का MSP केंद्र सरकार द्वारा 5,328 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी फसल मंडी में 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बिकती है, तो 328 रुपये का अंतर सरकार भरपाई करेगी। इससे किसानों को मंडी की झंझटों से मुक्ति मिलेगी, और उनकी आय में स्थिरता आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "सोयाबीन अगर MSP से कम में बिकेगी तो सरकार अंतर की राशि देगी।"
पंजीयन कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- योजना का लाभ उठाने के लिए पंजीयन अनिवार्य है। सरकार ने पंजीयन की प्रक्रिया को सरल बनाया है, जो ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन होगी। यहां पूरी प्रक्रिया है:
- पंजीयन की तारीखें: ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन 10 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। जल्दी करें, क्योंकि देरी से लाभ से वंचित हो सकते हैं।
कहां करें पंजीयन:
- आधिकारिक वेबसाइट: ई-उपार्जन पोर्टल (mukhyamantrikrishisamrudhi.mp.gov.in या mpkrishi.mp.gov.in) पर जाएं।
- ऑफलाइन विकल्प: नजदीकी ग्राम पंचायत, तहसील या कृषि कार्यालय में जाकर पंजीयन कराएं। जिला स्तर पर प्रशासनिक अमला तैनात रहेगा।
आवश्यक दस्तावेज:
- आधार कार्ड या समग्र आईडी।
- बैंक खाता विवरण (DBT के लिए)।
- खसरा-खतौनी (भूमि स्वामित्व प्रमाण)।
- मोबाइल नंबर (OTP वेरिफिकेशन के लिए)।
- फसल का अनुमानित रकबा (सर्वे के आधार पर)।
पंजीयन प्रक्रिया:
- पोर्टल पर लॉगिन करें (मोबाइल नंबर से रजिस्टर)।
- फॉर्म भरें: नाम, पता, फसल का प्रकार (सोयाबीन), रकबा, बैंक डिटेल्स।
- OTP से वेरीफाई करें।
- पंजीयन के बाद रसीद डाउनलोड करें। पंजीकृत किसान और रकबे का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा होगा।
- फसल बिक्री: पंजीयन के बाद नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक मंडी में सोयाबीन बेचें। बिक्री के बाद इलेक्ट्रॉनिक बिल (e-Kaccha Bill) जनरेट होगा, जो भावांतर गणना के लिए आधार बनेगा।
पैसे कैसे आएंगे खाते में? DBT से सीधी ट्रांसफर
भावांतर अवधि: 1 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक।
- गणना: मंडी बिक्री मूल्य और MSP के आधार पर अंतर की राशि तय होगी। उदाहरण: 10 क्विंटल सोयाबीन 5,000 रुपये/क्विंटल पर बिकी, MSP 5,328 तो कुल 3,280 रुपये (328 x 10) सरकार देगी।
- ट्रांसफर: राशि पंजीयन के समय दर्ज बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से आएगी। कोई मध्यस्थ नहीं, पारदर्शिता सुनिश्चित। ट्रांसफर 15-30 दिनों में होगा, SMS अलर्ट के साथ।
- हेल्पलाइन: समस्या पर 1800-233-3040 या स्थानीय कृषि हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
योजना के फायदे और सरकार की अपील
यह योजना सोयाबीन किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाएगी, और सरकार को भंडारण की चिंता से मुक्ति देगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का प्रचार-प्रसार हर स्तर पर हो, ताकि अधिकतम किसान लाभान्वित हों। इसके अलावा, फसल क्षति पर भी सर्वे और मुआवजा दिया जा रहा है।
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