शिवराज सिंह चौहान का नाम BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे, श्राद्ध पक्ष से पहले नियुक्ति की संभावना
MP News BJP: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे आगे चल रहा है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और BJP के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान ने अपने अनुभव, जनाधार, जातीय समीकरण, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सहमति के दम पर अन्य दावेदारों को पीछे छोड़ दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्राद्ध पक्ष (15 सितंबर 2025 से शुरू) से पहले उनकी नियुक्ति की घोषणा हो सकती है। यह घटना BJP की राष्ट्रीय राजनीति में एक नया अध्याय शुरू कर सकती है।

शिवराज सिंह चौहान: एक अनुभवी और जनप्रिय नेता
शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें मध्य प्रदेश में 'मामा' के नाम से जाना जाता है, ने अपने 30 साल से अधिक के राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। 66 वर्षीय चौहान ने मध्य प्रदेश में चार बार (2005-2018 और 2020-2023) मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और BJP को 2008, 2013, और 2023 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत दिलाई। उनकी लाडली लक्ष्मी योजना और भवंतर भुगतान योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें विशेष रूप से महिलाओं, OBC समुदाय, और किसानों के बीच लोकप्रिय बनाया।
चौहान ने 1972 में 13 साल की उम्र में RSS से जुड़कर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। उन्होंने 1990 में बुधनी से विधानसभा चुनाव जीता और 1991 से 2005 तक विदिशा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने विदिशा से 8,21,408 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। उनके इस मजबूत जनाधार और संगठनात्मक कौशल ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे ला खड़ा किया है।
जातीय समीकरण और RSS की सहमति
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में जातीय समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। वर्तमान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी OBC समुदाय से, और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन भी OBC समुदाय से हैं। ऐसे में, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि BJP सामान्य वर्ग से एक मजबूत नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुन सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान, जो किरार (OBC) समुदाय से हैं, इस समीकरण को और मजबूत करते हैं।
चौहान की RSS के साथ गहरी साझेदारी भी उनकी दावेदारी को मजबूत करती है। 25 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में RSS प्रमुख मोहन भागवत के साथ उनकी 45 मिनट की एकांत मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दी। यह मुलाकात RSS के दिल्ली मुख्यालय, झंडेवालान के केशव कुंज में हुई थी। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन पर चर्चा हुई, और चौहान को RSS का समर्थन प्राप्त होने की बात सामने आई है।
क्यों हैं शिवराज सबसे आगे?
अनुभव और संगठनात्मक कौशल: चौहान ने BJP के मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव, और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी संगठनात्मक क्षमता साबित की है। उनकी लंबी प्रशासनिक पारी और चुनावी जीत का रिकॉर्ड उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।
जनाधार और कल्याणकारी छवि: चौहान की योजनाएं, जैसे लाडली लक्ष्मी योजना और बेटी बचाओ अभियान, ने उन्हें महिलाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाया है। उनकी सादगी और जनता से जुड़ाव उनकी ताकत है।
RSS का समर्थन: RSS के साथ उनका पुराना नाता और हाल की मुलाकात ने उनकी स्थिति को और मजबूत किया है। RSS हमेशा से BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन: चौहान का OBC होना और मध्य भारत से होना BJP को जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
अन्य दावेदारों को पछाड़ा
राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय कोयला मंत्री किशन रेड्डी जैसे नाम भी चर्चा में थे। धर्मेंद्र प्रधान, जो ओडिशा से हैं और ABVP से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले नेता हैं, ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं, किशन रेड्डी तेलंगाना में BJP के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के रूप में सक्रिय हैं। हालांकि, चौहान के अनुभव, RSS के समर्थन, और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में उनके प्रभाव ने उन्हें इन दावेदारों से आगे रखा है।
वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा की स्थिति
वर्तमान BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो चुका था, जिसे 2024 के लोकसभा चुनावों तक बढ़ाया गया था। नड्डा वर्तमान में केंद्रीय स्वास्थ्य, रसायन और उर्वरक मंत्री के साथ-साथ राज्यसभा में सदन के नेता भी हैं। उनकी व्यस्तता और नई भूमिकाओं के कारण BJP अब नए अध्यक्ष की नियुक्ति की ओर बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, नड्डा की सहमति से ही चौहान का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है।
श्राद्ध पक्ष से पहले नियुक्ति की संभावना
BJP के संगठनात्मक नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि श्राद्ध पक्ष (15 सितंबर 2025 से शुरू) से पहले इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा कर लिया जाएगा। चौहान की नियुक्ति की घोषणा सितंबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है, जिससे वह 2029 के लोकसभा चुनावों की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
चौहान का रुख: 'कृषि मेरे रोम-रोम में'
हालांकि, चौहान ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की अटकलों पर सीधा जवाब देने से इनकार किया है। 26 अगस्त 2025 को ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "मेरे रोम-रोम में कृषि और मेरी सांसों में किसान हैं। मैंने कभी इस (राष्ट्रीय अध्यक्ष) के बारे में नहीं सोचा, न ही किसी ने मुझे बताया। मैं अपने कर्तव्यों को पूजा की तरह निभा रहा हूं।" उनकी यह सादगी और समर्पण उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है।
सियासी समीकरण और भविष्य
चौहान की संभावित नियुक्ति को BJP के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो हिंदुत्व के साथ-साथ समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। 2029 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए BJP को एक ऐसे नेता की जरूरत है जो संगठन को मजबूत करे और जनता के बीच पार्टी की पहुंच को बढ़ाए। चौहान का ग्रामीण और OBC मतदाताओं के बीच मजबूत आधार इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भी चौहान को मुख्यमंत्री पद से हटाकर मोहन यादव को नियुक्त किया गया था, जिससे उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई थी। उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति इस नाराजगी को कम करने और उनके कद को और ऊंचा करने का प्रयास हो सकता है।
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