सीहोर में किसानों का अनोखा आंदोलन! ठंड में खेतों में भजन-कीर्तन, बजट 2026 से MSP की कानूनी गारंटी की मांग
Sehore Farmers: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में किसानों की व्यथा अब भजन-कीर्तन की धुन में सुनाई दे रही है। 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश होने से कुछ दिन पहले, किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की कानूनी गारंटी दी जाए।
सीहोर जिले के चंदेरी गांव में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ऐसा तरीका अपनाया है, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है। नारे, धरना या सड़क पर प्रदर्शन नहीं, बल्कि गेहूं की हरी-भरी फसल के बीच बैठकर भजन-कीर्तन के जरिए किसानों ने केंद्र सरकार से अपनी पीड़ा साझा की।

किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में आयोजित इस अनोखे कार्यक्रम में किसानों ने ढोलक, पेटी और झांझ की धुन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 1 फरवरी को लोकसभा में पेश होने वाले केंद्रीय बजट में किसानों के लिए बड़े और ठोस फैसले लेने की अपील की।
सीहोर के खेतों में ठंडी रातों का विरोध: भजन-कीर्तन से MSP की गुहार
सीहोर जिला, जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आते हैं, वहां किसान पिछले कई दिनों से MSP की मांग को लेकर अनोखा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। चंदेरी गांव के एमएस मेवाड़ा, जो लंबे समय से किसानों के हक के लिए लड़ते रहे है। उन्होंने बताया कि 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश होने से पहले यह विरोध तेज किया गया है, ताकि मोदी सरकार का ध्यान आकर्षित हो।
कड़ाके की ठंड में, जब तापमान 5-10 डिग्री तक गिर जाता है, किसान खेतों में अलाव जलाकर बैठते हैं और भजन गाते हैं। "राम भजन" से लेकर "किसान भजन" तक - जैसे "किसान है देश की जान, MSP दो भगवान!" - ये गीत न सिर्फ किसानों की एकजुटता दिखाते हैं, बल्कि गांव-गांव में जागरूकता फैला रहे हैं। एमएस मेवाड़ा कहते हैं, "हम हिंसा नहीं चाहते, बस अपनी फसल का सही दाम। भजन से हमारा संदेश दिल्ली तक पहुंचे।" इस विरोध में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं, जो ट्रैक्टरों पर लाउडस्पीकर लगाकर भजन बजा रहे हैं।
"हे प्रभु मोदी है दाता..." भजन में छलकी किसानों की पीड़ा
किसानों ने भावनात्मक भजन गाया-
"हे प्रभु मोदी है दाता,
हे प्रभु मोदी है दाता,
ऐसी कृपा कीजिए,
सारे किसान मांग रहे हैं,
बजट में MSP दीजिए..."
इस भजन के जरिए किसानों ने केंद्र सरकार से यह आग्रह किया कि बजट 2026 में किसानों की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे जाने की गारंटी दी जाए और प्रमुख फसलों के दामों में बढ़ोतरी की जाए। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत, खाद-बीज-डीजल के दाम और कम समर्थन मूल्य ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।
सोयाबीन ₹8000 और गेहूं ₹5000 प्रति क्विंटल की मांग
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने स्पष्ट रूप से अपनी मांगें रखीं। किसानों की प्रमुख मांग है कि
- सोयाबीन का समर्थन मूल्य ₹8000 प्रति क्विंटल,
- गेहूं का समर्थन मूल्य ₹5000 प्रति क्विंटल तय किया जाए।
इसके साथ ही किसानों ने प्याज और लहसुन जैसी फसलों को भी उनकी लागत के अनुसार उचित कीमत दिलाने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि बार-बार फसल अच्छी होने के बावजूद बाजार में दाम गिर जाते हैं, जिससे उनकी मेहनत बेकार चली जाती है।
एमएस मेवाड़ा ने खुद लिखा भजन, पीएम मोदी से की प्रार्थना
इस पूरे भजन-कीर्तन कार्यक्रम की खास बात यह रही कि भजन को किसान व समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने स्वयं लिखा और प्रस्तुत किया। भजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान के रूप में संबोधित करते हुए उनसे किसानों के जीवन में खुशहाली लाने की प्रार्थना की गई। गीत के शब्दों में किसानों की पीड़ा, बढ़ती उत्पादन लागत, खाद-बीज के महंगे दाम, और फसलों के कम भाव जैसी समस्याओं को भावनात्मक तरीके से पिरोया गया।
MSP की मांग: किसानों की मुख्य समस्या और बजट की उम्मीदें
किसानों की मुख्य मांग है कि सभी 23 फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी दी जाए। वर्तमान में MSP घोषित तो होती है, लेकिन खरीद सिर्फ गेहूं, धान और कुछ फसलों पर ही होती है। सीहोर के किसान, जो मुख्य रूप से सोयाबीन, गेहूं और चना उगाते हैं, कहते हैं कि बाजार में दाम गिरने से उन्हें हर साल लाखों का नुकसान होता है। "MSP पर खरीद हो, तो हमारी कमर सीधी हो जाएगी," एक किसान ने कहा।
1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश होने वाले बजट से किसानों को बड़ी उम्मीदें हैं। पिछले बजटों में PM Kisan योजना में बढ़ोतरी और कृषि क्रेडिट बढ़ाने की घोषणाएं हुईं, लेकिन MSP पर कोई ठोस कानून नहीं बना। सीहोर के किसान संगठनों ने मोदी जी को पत्र लिखा है, जिसमें भजन की वीडियो भी संलग्न की गई है। एमएस मेवाड़ा ने कहा, "बजट में अगर MSP गारंटी नहीं मिली, तो आंदोलन दिल्ली की सड़कों तक पहुंचेगा।"
बजट 2026 और मध्य प्रदेश के किसान: क्या होगा बदलाव?
मध्य प्रदेश में किसान MSP की मांग को लेकर लंबे समय से सक्रिय हैं। राज्य सरकार ने CM उद्यम क्रांति योजना जैसी स्कीम्स से युवा किसानों को मदद दी है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर MSP कानून की जरूरत है। बजट 2026 में कृषि क्षेत्र के लिए ₹1.5 लाख करोड़ से ज्यादा का आवंटन होने की उम्मीद है, जिसमें प्राकृतिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर पर फोकस होगा। लेकिन किसान कहते हैं, "बिना MSP के ये सब बेकार।"
किसानों की आवाज: क्या सुनेंगी मोदी सरकार?
यह अनोखा विरोध दिखाता है कि किसान अब रचनात्मक तरीकों से अपनी बात रख रहे हैं। ठंड में खेतों में भजन गाना उनकी दृढ़ता को दर्शाता है। एमएस मेवाड़ा ने अपील की, "मोदी जी, बजट में किसानों को MSP का तोहफा दें। हम अन्नदाता हैं, हमें न्याय दो।"
सीहोर के किसानों की यह कहानी पूरे मध्य प्रदेश के किसानों की व्यथा है। क्या 1 फरवरी का बजट उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा? समय बताएगा। लेकिन एक बात साफ है - भजन की धुन दिल्ली तक पहुंच चुकी है!












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