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सीहोर का चिंतामन गणेश मंदिर क्यों है खास, 2 हजार साल पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने की थी स्थापना

सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। कहते हैं कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। ऐसी मान्यता है कि यहां के गणेश जी प्रार्थना जल्दी सुनते हैं चिंता दूर करते हैं

सीहोर,1 सितंबर। कोरोना महामारी के 2 साल बाद पूरे देश भर में धूमधाम से गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। गणेश मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लेकिन सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर देश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है कहते हैं कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। ऐसी मान्यता है कि यहां के गणेश जी प्रार्थना जल्दी सुनते हैं चिंता दूर करते हैं व मुरादे भी पूरी करते हैं। सीहोर के चिंतामन गणेश भारत में स्थित चार स्वयंभू मूर्ति में से एक माने जाते हैं।

2000 साल पुराना इतिहास है चिंतामन गणेश मंदिर का

2000 साल पुराना इतिहास है चिंतामन गणेश मंदिर का

बुधवार से गणेश चतुर्थी की शुरुआत हो चुकी है ऐसे में आपको सीहोर के चिंतामन गणेश के इतिहास के बारे में जानकारी देते हैं

गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी पृथ्वी बल्लभ ने बताया कि 2000 साल पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने गणेश के इस मंदिर की स्थापना की थी। उन्होंने इस मंदिर का नाम चिंतामन सिद्धि गणेश मंदिर रखा था। सिद्ध गणेश मंदिर होने के कारण शहर को सिद्धपुर कहा जाने लगा धीरे-धीरे सिद्धपुर से लोग इसे सीहोर कहने लगे हैं।


पंडित जी ने मंदिर का इतिहास बताते हुए कहा कि लगभग 2000 साल पहले उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने एक सपना देखा था। उन्हें सपने में गणेश जी ने कहा था कि क्यों मेरे दर्शन करने इतनी दूर रणथंबोर जाते हो। मैं तुम्हें पुष्प के रूप में पार्वती नदी के काहरी पर मिलूंगा। राजा रात में ही उज्जैन से काहरी पहुंचे। उन्होंने रात में फूल रखा और जैसे ही आगे बढ़ने के लिए तैयार हुए, वैसे ही आकाशवाणी हुई कि राजन रात में तुम इस पुष्प को जहां तक लेजा सकते हो, ले जाओ, लेकिन सूर्योदय होते ही ये आगे नहीं बढ़ेगा। चलते-चलते थोड़ी देर बाद सूर्य उदय हो गया और रथ के पहिए जमीन में धंस गए। इसके बाद "पुष्प" गणेश जी की प्रतिमा में बदल गई और जमीन पर स्थापित हो गई।

उल्टा स्वास्तिक बनाकर मांगते हैं मन्नत

उल्टा स्वास्तिक बनाकर मांगते हैं मन्नत

प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक जाने वाले भक्त भगवान गणेश मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक का चिन्ह बना कर अपनी मन्नत मांगते इसके बाद जब मन्नत पूरी हो जाती है तो उसे सीधा कर कर वास्तविक बना कर जाते हैं।

यहां आने वाले कई भक्तों ने वनइंडिया को बताया कि उनकी मनोकामना पूरी हुई है और वह इसलिए हर साल इस गणेश मंदिर पर चिंतामन गणेश जी के दर्शन करने आते हैं।

चार स्वयंभू प्रतिमाओं से एक है सीहोर की ये प्रतिमा

चार स्वयंभू प्रतिमाओं से एक है सीहोर की ये प्रतिमा

इस मंदिर की खासियत यह है कि देश के चार स्वयंभू प्रतिमा है उनमें से ये एक है सीहोर का चिंतामन गणेश मंदिर। 2 हजार साल पहले उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने इसकी प्रतिमा की स्थापना की थी। इसके अलावा राजस्थान रणथंबोर (सवाई माधोपुर ) अवंतिका उज्जैन के चिंतामन गणेश गुजरात के सिद्धपुर और चौथा मध्य प्रदेश के सीहोर मैं इस प्रकार के चिंतामन गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है।

हर बुधवार चिंतामन के दर्शन करने आते थे विक्रमादित्य

हर बुधवार चिंतामन के दर्शन करने आते थे विक्रमादित्य

राजा विक्रमादित्य हर बुधवार चिंतामन के दर्शन करने सिद्धपुर(सीहोर) आते थे। विक्रम संवत 155 में यहां गर्भ ग्रह का निर्माण हो गया था। आज से 350 साल पहले पेशवा बाजीराव ने इस मंदिर में सभागृह का निर्माण कराया था।

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सर्वप्रथम पूजा जाता है ऐसी मान्यता है कि शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश का पूजन करना जरूरी होता है।

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