Satna: केंद्र सरकार के भेजे 1.99 लाख फ्लैग रिजेक्ट, झंडों में गलत जगह पर बना है अशोक चक्र
सतना, 4 अगस्त। भारत के राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में झंडा संहिता के मानकों का पालन नहीं होने की वजह से 1 लाख 99 हजार तिरंगा झंडो को गुजरात वापस भेज दिया गया है। जानकारों की मानें तो इनकी रंगों में कोई एक कमी नहीं थी बल्कि भौतिक सत्यापन में अलग-अलग किस्म की कई कमियां पाई गई। मसलन, किसी झंडा में कपड़ों के रंग में फर्क पाया गया तो किसी में अशोक चक्र का इश्यू था। राष्ट्रीय ध्वज जैसे संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन किसी भी तरह का कोई रिक्स नहीं लेना चाहता था सो- अहमदाबाद गुजरात से सतना पहुंचे तिरंगा झंडे को स्थानी ट्रांसपोर्ट के माध्यम से 3 अगस्त को वापस भेज दिया गया।

क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि देशव्यापी हर घर तिरंगा अभियान के तहत जिले में 5 लाख घरों में 13 से 15 अगस्त के बीच तिरंगा झंडा फहराए जाने का फैसला लिया गया है।इसके लिए जिले की स्व सहायता समूहों को 3 लाख झंडे बनाने का ऑर्डर दिया गया जबकि शेष दो लाख झंडों की डिमांड भारत सरकार से की गई थी। भारत सरकार ने 31 जुलाई को 1 लाख 99 हजार झंडो से भरे 98 बोरे सतना को भिजवा दिए।क्योंकि मसला राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ा है लिहाजा जिला प्रशासन ने तिरंगा झंडा का अपने कर्मचारियों से भौतिक सत्यापन कराया शैंपीलिंग के तौर पर 24000 झंडो का भौतिक सत्यापन किया गया जिसमें महज 194 झंडों ही मानक पर खरे उतरे।
झंडों को समय पर तैयार करना चुनौती
सतना शहर के स्व सहायता समूह को 72000 तिरंगा झंडों को तैयार करने का टारगेट दिया गयाथा जबकि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए जिलेभर की स्व सहायता समूह से 300000 झंडा तैयार करवाने थे। गुजरात से आए 199000 जनों को रिजेक्ट करने के बाद जिले भर की सेल्फ हेल्प ग्रुप पर दो लाख तिरंगा झंडो को बनाने का अतिरिक्त भार पड़ गया है। ग्रामीण अंचल की बात करें तो 2 अगस्त तक महज 60000 झंडे ही कंप्लीट हो पाए हैं ऐसे में स्व सहायता समूह के सामने वक्त पर झंडा उपलब्ध कराने की चुनौती होगी












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