जानिए सागर के पापेट गांव में मस्जिद खुदाई से कैसे निकली राम-सीता मूर्तियां, हिंदू संगठनों ने शुरू की पूजा
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा विकासखंड के पापेट गांव में शुक्रवार दोपहर एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर दिया। जामा मस्जिद के परिसर में कमरों के पुनर्निर्माण के लिए चल रही नींव की खुदाई के दौरान भगवान राम और माता सीता की प्राचीन मूर्तियां मिलने के दावे ने हिंदू संगठनों को भड़का दिया।
संस्कृति बचाओ मंच और अन्य हिंदू संगठनों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मूर्तियों की पूजा-अर्चना की और खुदाई वाली जगह पर एक चबूतरा बना दिया। उनका दावा है कि यह स्थान सदियों पुराना मंदिर स्थल है, जिस पर मुस्लिम आक्रांताओं ने मस्जिद का निर्माण कर लिया था।

मुस्लिम पक्ष ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मूर्तियां पास की खखरी से आई चंदेली पत्थर हैं और मस्जिद की जमीन पर कोई खुदाई नहीं हुई। पुलिस और प्रशासन ने भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है, लेकिन तनाव बरकरार है।
घटना की शुरुआत शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे हुई, जब मस्जिद परिसर में बाउंड्री वॉल और कमरों के पुनर्निर्माण का काम चल रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, नींव खोदते समय चंदेली पत्थर से बनी दो मूर्तियां मिलीं, जिन्हें स्थानीय लोग भगवान राम और माता सीता की प्रतिमाएं मान रहे हैं। मूर्तियां निकलने की सूचना जैसे ही फैली, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई।
संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी ने दावा किया, "यह जगह मूल रूप से प्राचीन राम मंदिर की थी। मुस्लिम आक्रांताओं ने इसे तोड़कर मस्जिद बनाई और बाकी जमीन पर कब्जा कर लिया। मूर्तियां खुदाई से साबित करती हैं कि यहां हिंदू धरोहर दबी हुई थी। हमारी मांग है कि इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण हो और मस्जिद को हटाया जाए।" कार्यकर्ताओं ने मूर्तियों का अभिषेक किया, आरती उतारी और चबूतरा बना दिया, जहां मूर्तियों को स्थापित कर पूजा शुरू कर दी।
हिंदू पक्ष के लोगों ने चबूतरा हटाने की किसी भी कोशिश पर "खून बहने" की चेतावनी दी। भीड़ में शामिल एक ग्रामीण ने कहा, "हम शांतिपूर्ण तरीके से पूजा कर रहे हैं, लेकिन हमारी आस्था पर कोई अंकुश नहीं लग सकता। यह राम जन्मभूमि विवाद की तरह ही मामला है, जहां सुप्रीम कोर्ट ने पुरातात्विक सबूतों के आधार पर फैसला दिया। यहां भी ASI की जांच होनी चाहिए।" हिंदू संगठनों का जमावड़ा दोपहर से शाम तक बढ़ता रहा, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हो गए। उन्होंने भगवा झंडे लहराए और "जय श्री राम" के नारे लगाए।
मुस्लिम पक्ष ने इन दावों को साजिश बताते हुए खारिज कर दिया। जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष सगीर खान ने बताया, "यह पूरी तरह गलत है। मस्जिद की जमीन पर कोई खुदाई नहीं हुई। बाउंड्री वॉल के लिए बाहर की जमीन पर काम हो रहा था, जहां पास की खखरी से चंदेली पत्थर गिर गए। ये मूर्तियां नहीं, बल्कि पुराने निर्माण के अवशेष हैं। मस्जिद 200 साल पुरानी है और गांव के सगीर खान ने इसे दान में जमीन दी थी। हिंदू संगठन बिना सबूत के बवाल मचा रहे हैं।" मुस्लिम समुदाय के लोग भी मस्जिद परिसर में जमा हो गए, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। हालांकि, अभी तक कोई हिंसा नहीं हुई, लेकिन तनाव चरम पर है।
पुलिस और प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। सागर एसपी अमित कुमार के निर्देश पर बंडा थाना प्रभारी विनीत तिवारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की और मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए कस्टडी में ले लिया।
एसपी ने कहा, "स्थिति नियंत्रण में है। हमने चबूतरा हटाने की बजाय सुरक्षा घेराबंदी कर दी है। कल से ASI या पुरातत्व विभाग की टीम बुलाकर जांच कराई जाएगी। किसी भी पक्ष को जबरदस्ती नहीं करने दी जाएगी।" जिला कलेक्टर ने भी जिला पंचायत CEO को निर्देश दिए हैं कि गांव में शांति समिति की बैठक बुलाई जाए। फिलहाल, गांव में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं और धारा 144 लागू करने पर विचार चल रहा है।
यह विवाद अयोध्या राम जन्मभूमि मामले की याद दिला रहा है, जहां खुदाई में मिले अवशेषों ने कोर्ट के फैसले को प्रभावित किया था। स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि पापेट गांव चंदेल काल का हिस्सा रहा है, जहां कई हिंदू मंदिर थे। लेकिन मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि मस्जिद का निर्माण शांतिपूर्ण तरीके से हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव सदियों से बना हुआ है, लेकिन यह घटना उसे भंग कर सकती है।
संस्कृति बचाओ मंच ने राज्य स्तर पर अपनी मांग को जोरदार बनाने का ऐलान किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले की तरह ही यहां भी न्याय की मांग करेंगे। मूर्तियां हिंदू आस्था का प्रतीक हैं, इन्हें अपमानित नहीं होने देंगे।" दूसरी ओर, मुस्लिम संगठनों ने शांति अपील की है और कहा है कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
गांव के आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और दुकानें जल्दी बंद हो रही हैं। प्रशासन ने पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त फोर्स मंगाई है। यह मामला अब सागर से बाहर फैलने की कगार पर है, और विशेषज्ञों का कहना है कि तत्काल पुरातात्विक जांच ही एकमात्र समाधान है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है, और अगले कुछ घंटों में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है। शांति ही एकमात्र रास्ता है, ताकि पापेट जैसे शांत गांव में फिर से सद्भाव लौट आए।
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