MP News: भोपाल में धंसी सड़क ने कैसे खोली सरकार की पोल, जानिए, भ्रष्टाचार और लापरवाही का गहरा गड्ढा

MP News Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर तेज बारिश के बाद सड़क में 10 फीट गहरा गड्ढा बन गया। यह गड्ढा केवल सड़क का नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और निर्माण कार्यों की घटिया गुणवत्ता का प्रतीक है। यह चौराहा शहर का सबसे व्यस्त इलाका है, जहां हर दिन लाखों वाहन गुजरते हैं।

इस घटना ने न केवल नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि सरकार की जवाबदेही और निगरानी की कमी को भी उजागर किया।

Road collapsed in Bhopal corruption and negligence in MP government- Jitu Patwari Congress

भोपाल में सड़कों का हाल

बोर्ड ऑफिस चौराहे पर सड़क धंसने की घटना कोई इकलौती नहीं है। भोपाल के कोलार, अरेरा कॉलोनी, और रोशनपुरा जैसे इलाकों में सीवेज बहाव के कारण सड़कें कमजोर हो चुकी हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनी सड़कें बारिश में नालों में तब्दील हो जाती हैं। यह स्थिति न केवल यातायात को प्रभावित करती है, बल्कि नागरिकों की जान को भी खतरे में डालती है।

पूरे प्रदेश में गड्ढों की सरकार

यह समस्या केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के हर कोने में सड़कों की हालत खस्ता है, और बारिश ने इस स्थिति को और बदतर कर दिया है। आइए, क्षेत्रवार स्थिति पर नजर डालें:

इंदौर: सुपर कॉरिडोर, जिसे करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया, तीन बार मरम्मत के बाद भी जर्जर है। द्वारकापुरी, सुदामा नगर, और विजयनगर में सड़कों की हालत बदहाल है। BRTS रोड पर रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं।

ग्वालियर: बारिश में सड़कें झील बन जाती हैं। गोला का मंदिर से शिंदे की छावनी तक गड्ढों की भरमार है, जिससे वाहन चालकों की जान जोखिम में है।

जबलपुर: राइट टाउन और कैंट क्षेत्र में जलभराव से सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं। दो साल पुरानी सड़कें बार-बार उखड़ रही हैं, और पुल-पुलिया ढहना आम बात है।

सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़: ग्रामीण सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में ठेकेदारों की मनमानी और भ्रष्टाचार ने सड़कों को बदहाल कर दिया। कई पुल उद्घाटन के तुरंत बाद ढह गए।

रीवा, सतना, सिंगरौली, सीधी: कोयले और खनिजों के ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को पूरी तरह जर्जर कर दिया। सीधी में पिछले साल एक पुल ढहने से लोगों की जान गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा: आदिवासी क्षेत्रों में सड़कें आज भी कच्ची हैं। जहां सड़कें हैं, वहां माफिया की डंपिंग से वे क्षतिग्रस्त हो रही हैं। शासकीय विद्यालयों और अस्पतालों तक पहुंचने के रास्ते भी नहीं हैं।

चौंकाने वाले आंकड़े

मध्य प्रदेश सरकार ने 2018 से 2024 तक सड़क निर्माण पर 45,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए, लेकिन RTI से खुलासा हुआ कि 80% ग्रामीण सड़कें दो साल से पहले ही उखड़ गईं। सड़क निर्माण के 60% टेंडर एक ही ठेकेदार समूह को दिए गए, जिससे भ्रष्टाचार की बू आती है। लोकायुक्त और EOW ने सात जिलों में सड़क निर्माण में भारी अनियमितताओं की पुष्टि की है।

भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी

  • क्या नगर निगम और PWD ने जानबूझकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया?
  • वर्षों से चल रहे निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी क्यों व्याप्त है?
  • मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री केवल उद्घाटन में व्यस्त क्यों हैं, जबकि जमीनी निगरानी नदारद है?

जनता का सवाल

  1. "मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और उनकी 'डबल इंजन सरकार' बताएं कि जब राजधानी में ही सड़कें इस हाल में हैं, तो गांवों और कस्बों का क्या हाल होगा?"
  2. "सड़क निर्माण का पैसा जनता की सुविधा में गया या भ्रष्टाचारियों की जेब में?"
  3. "जनता की जिंदगी के साथ इस खिलवाड़ का जवाब कौन देगा?"
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