Bhopal News: RGPV NAAC फर्जीवाड़ा: कुलगुरु राजीव त्रिपाठी का इस्तीफा, SSR में 22 गड़बड़ियों का खुलासा
MP news: मध्य प्रदेश के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में NAAC मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छिड़ा विवाद शुक्रवार को चरम पर पहुंच गया, जब राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कुलगुरु प्रो. राजीव त्रिपाठी के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया। गुरुवार को ABVP कार्यकर्ताओं के कैंपस घेराव और विरोध प्रदर्शन के बाद शाम 6 बजे प्रो. त्रिपाठी ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा था।
राज्यपाल के आदेश के अनुसार, नए कुलगुरु की नियुक्ति तक RGPV के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के हेड प्रो. एस सी चौबे को कार्यवरी कुलगुरु बनाया गया है। ABVP ने SSR (सेल्फ स्टडी रिपोर्ट) में 22 गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसे "अकादमिक भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण" करार दिया है, जिससे विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है।

यह घटना RGPV के लिए एक बड़ा झटका है, जो हाल ही में NAAC से A++ ग्रेड प्राप्त करने का दावा कर रहा था। ABVP का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने फर्जी और भ्रामक तथ्यों के आधार पर यह ग्रेड हासिल किया, जिसमें छात्र संख्या, रिसर्च पेपर, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेसमेंट डेटा में हेराफेरी की गई।
संगठन ने मंगलवार को ही तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह "नरखेड़ा" परमार से मुलाकात कर सबूत पेश किए थे और कुलगुरु समेत दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। गुरुवार को दोपहर 2 बजे से शुरू हुए कैंपस प्रदर्शन में सैकड़ों छात्रों ने कुलगुरु के कक्ष का घेराव किया, नारेबाजी की और इस्तीफे की मांग की। प्रो. त्रिपाठी ने इस्तीफे में कहा कि वे तत्काल प्रभाव से पद छोड़ना चाहते हैं या राज्यपाल के अनुसार जो भी समय उपयुक्त हो।
ABVP के प्रदेश मंत्री केतन चतुर्वेदी ने बताया, "RGPV ने A++ ग्रेड के लालच में SSR रिपोर्ट में झूठे आंकड़े भरे। रिपोर्ट को NAAC टीम के आने से पहले सार्वजनिक किया जाना था, लेकिन 17 नवंबर को अचानक अपलोड कर दिया गया, जो पारदर्शिता की खुली धज्जियां उड़ाता है। हमने NAAC की सेंट्रलाइज्ड कम्प्लेंट मैनेजमेंट कमिटी को भी शिकायत भेजी है।
" चतुर्वेदी ने कहा कि यदि प्रक्रिया में अनियमितताएं साबित हुईं तो A++ ग्रेड की पुनर्मूल्यांकन की मांग करेंगे। कार्यकर्ता शिवम जाट ने 22 अनियमितताओं का ब्यौरा देते हुए कहा कि रिपोर्ट में छात्रों की संख्या 20% बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई, जबकि वास्तविक संख्या कम है। रिसर्च पेपर्स के क्लेम फर्जी हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर की फोटोज पुरानी हैं। "यह सिर्फ ग्रेडिंग का खेल नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है," जाट ने जोर देकर कहा।

प्रो. राजीव त्रिपाठी का इस्तीफा RGPV के लिए चौंकाने वाला कदम है। वे 2022 से कुलगुरु थे और उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने कई नई पहलें की थीं, जैसे ऑनलाइन कोर्सेस का विस्तार और इंडस्ट्री पार्टनरशिप। लेकिन NAAC प्रक्रिया में कथित कमियां उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी विफलता साबित हुईं। इस्तीफे के बाद कैंपस में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ छात्रों ने ABVP के प्रदर्शन को "राजनीतिक स्टंट" बताया, जबकि अधिकांश ने पारदर्शिता की मांग का समर्थन किया। एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "ग्रेडिंग अच्छी हो तो पढ़ाई का स्तर भी ऊंचा होना चाहिए, लेकिन यहां प्लेसमेंट और फैकल्टी की कमी है।"
नए कार्यवरी कुलगुरु प्रो. एस सी चौबे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अनुभवी प्रोफेसर हैं। उन्होंने 25 वर्षों से अधिक समय से RGPV में काम किया है और रिसर्च में योगदान दिया है। राज्यपाल के आदेश में कहा गया है कि वे नई नियुक्ति तक विश्वविद्यालय का संचालन करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने भी NAAC प्रक्रिया पर जांच के आदेश दिए हैं। मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा, "हम पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। दोषी साबित होने पर सख्त कार्रवाई होगी।" ABVP ने स्वागत करते हुए कहा कि यह शुरुआत है, लेकिन FIR और ग्रेड रद्द करने की मांग बरकरार है।
यह विवाद मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए चेतावनी है। NAAC ग्रेडिंग विश्वविद्यालयों की रैंकिंग का आधार है, जो फंडिंग और प्रतिष्ठा तय करती है। RGPV, जो 1998 में स्थापित हुआ और 219 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों से संबद्ध है, A++ ग्रेड से उम्मीदें बांध रहा था। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अन्य संस्थानों में भी ऐसी अनियमितताएं हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि NAAC के रिवाइज्ड मैनुअल 2020 के अनुसार SSR समय पर अपलोड नहीं होने से ही प्रक्रिया अवैध हो जाती है। ABVP ने राज्यपाल को भी ज्ञापन सौंपा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन प्रो. चौबे ने कैंपस में शांति बनाए रखने की अपील की है। मामला अब NAAC और उच्च शिक्षा विभाग की जांच पर टिका है। यदि आरोप साबित हुए तो न केवल ग्रेड रद्द हो सकता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। ABVP ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय न मिला तो राज्य स्तर पर आंदोलन तेज होगा। यह घटना न केवल RGPV बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के तकनीकी शिक्षा तंत्र को हिला रही है, जहां गुणवत्ता और पारदर्शिता की मांग तेज हो रही है।
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