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Rewa MP News: लोकायुक्त का एक्शन, जूनियर इंजीनियर और सोलर कर्मचारी को 10,000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति को साकार करते हुए लोकायुक्त संगठन ने आज एक और सफल ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। रीवा संभाग के कार्यालय में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPPKVVCL) के जूनियर इंजीनियर किशोर त्रिपाठी और सोलर कंपनी के कर्मचारी प्रमोद द्विवेदी को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के सख्त निर्देशों पर DIG मनोज सिंह के मार्गदर्शन में हुई। शिकायतकर्ता लकी दुबे ने सोलर पैनल इंस्टॉलेशन के मीटर कन्वर्जन फाइल पर हस्ताक्षर के बदले 18,000 रुपये की मांग का खुलासा किया था। आज 10,000 रुपये के लेन-देन में दोनों आरोपी फंस गए।

Rewa Lokayukta action junior engineer caught red-handed taking bribe of Rs 10 000

भ्रष्टाचार का सरल मतलब: रिश्वत क्यों और कैसे काम करती है?

सबसे पहले, रिश्वत को सरल शब्दों में समझें। सरकारी कामों में अधिकारी या कर्मचारी अपना काम करने के बदले पैसे मांगते हैं-यह रिश्वत है। यहां मामला सोलर पैनल इंस्टॉलेशन का है। शिकायतकर्ता ने शहर में तीन सोलर पैनल लगाए, लेकिन मीटर कन्वर्जन (सोलर से बिजली ग्रिड में जोड़ने का प्रोसेस) की फाइल पर हस्ताक्षर के लिए रिश्वत मांगी गई। प्रति फाइल 6,000 रुपये-कुल 18,000। यह न सिर्फ बिजली विभाग की लापरवाही दिखाता है, बल्कि सोलर एनर्जी जैसे पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट को बाधित करता है। मध्य प्रदेश में सोलर सब्सिडी स्कीम के तहत लाखों लोग लाभ ले रहे हैं, लेकिन रिश्वत से गरीब प्रभावित होते हैं। लोकायुक्त का ट्रैप इसी सिस्टम को साफ करने का हथियार है।

8 अक्टूबर 2025: शिकायत दर्ज

लकी दुबे (उम्र 25 वर्ष, पिता दिनेश दुबे, निवासी सीधी जिला सीधी) ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने शहर में तीन सोलर पैनल लगाए हैं। मीटर कन्वर्जन फाइल (जो बिजली कनेक्शन को सोलर-अनुकूल बनाती है) पर हस्ताक्षर के लिए आरोपी किशोर त्रिपाठी (जूनियर इंजीनियर, MPPKVVCL शहर संभाग रीवा) और प्रमोद द्विवेदी (सोलर कंपनी कर्मचारी, उम्र 34 वर्ष, पिता शिवकान्त द्विवेदी, निवासी निराला नगर रीवा) ने प्रति फाइल 6,000 रुपये मांगे। कुल तीन फाइलें-18,000 रुपये। दुबे ने कहा, "बिना पैसे के फाइल अटकी रहेगी।"

8 अक्टूबर शाम: सत्यापन

लोकायुक्त टीम ने तुरंत जांच की। शिकायतकर्ता से गुप्त बातचीत करवाई गई। आरोपीगण ने फोन पर पुष्टि की-'प्रति फाइल 6,000, कुल 18,000 दो तो हस्ताक्षर हो जाएगा।' सत्यापन सफल रहा।

9 अक्टूबर सुबह: ट्रैप प्लान

महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देश पर DIG मनोज सिंह ने टीम गठित की। निरीक्षक उपेन्द्र दुबे को ट्रैपकर्ता बनाया गया। दल में संदीप सिंह भदौरिया (निरीक्षक), प्र.आर. सुरेश कुमार, मुकेश मिश्रा, शिवलाल प्रजापति, पवन पाण्डेय, आर. लवलेश पाण्डेय, मनोज मिश्रा, जितेंद्र सिंह शामिल। शिकायतकर्ता को 10,000 रुपये (ट्रैप राशि) के साथ आरोपी के कक्ष में भेजा गया।

9 अक्टूबर दोपहर: गिरफ्तारी

कार्यपालन यंत्री कार्यालय, MPPKVVCL शहर संभाग रीवा-आरोपी किशोर त्रिपाठी का कक्ष। दुबे ने 10,000 रुपये दिए, आरोपीगण ने लिये। तुरंत टीम ने घेराबंदी की। रिश्वत के पैसे पर केमिकल टेस्ट (फिनाइलोलाइन) से पुष्टि-दोनों के हाथों पर निशान। दोनों गिरफ्तार।

यह ट्रैप लोकायुक्त रीवा संभाग की 2025 की 50वीं सफल कार्रवाई है। पिछले साल 120+ ट्रैप हुए, जिनमें बिजली विभाग के 20% मामले थे।

आरोपी कौन हैं?

किशोर त्रिपाठी: जूनियर इंजीनियर, MPPKVVCL रीवा। उनका काम फाइलों का सत्यापन और हस्ताक्षर। लेकिन रिश्वत लेकर फाइलें पास कर रहे थे। विभाग में 10+ साल का अनुभव, कई शिकायतें पहले भी।

प्रमोद द्विवेदी: सोलर कंपनी (नाम स्पष्ट नहीं) का कर्मचारी। वे ब्रोकर की भूमिका में-शिकायतकर्ता से पैसे ऐंठकर इंजीनियर तक पहुंचाते। निराला नगर रीवा निवासी, सोलर इंस्टॉलेशन में सक्रिय।

दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत केस। यह धारा रिश्वत लेने पर 3-7 साल की सजा और जुर्माना देती है। कोर्ट में चार्जशीट 60 दिनों में।
लोकायुक्त टीम का रोल: सख्ती के पीछे कौन?

ट्रैपकर्ता: निरीक्षक उपेन्द्र दुबे-उन्होंने रिश्वत लेन-देन का प्रत्यक्ष प्रमाण लिया।

  • टीम सदस्य: संदीप सिंह भदौरिया (निरीक्षक), प्र.आर. सुरेश कुमार, मुकेश मिश्रा, शिवलाल प्रजापति, पवन पाण्डेय, आर. लवलेश पाण्डेय, मनोज मिश्रा, जितेंद्र सिंह। ये गवाह और सहायक थे।
  • मार्गदर्शन: DIG मनोज सिंह ने रणनीति बनाई। महानिदेशक योगेश देशमुख ने 'ट्रैप पर फोकस' का आदेश दिया।
  • रीवा लोकायुक्त कार्यालय ने कहा, "शिकायत मिलते ही एक्शन। सोलर जैसी स्कीमों में रिश्वत बर्दाश्त नहीं।"

बिजली विभाग में भ्रष्टाचार पर बहस

मध्य प्रदेश में CM मोहन यादव की सरकार 'भ्रष्टाचार मुक्त' का दावा करती है। यह ट्रैप MPPKVVCL (पूर्वी क्षेत्र) को झकझोर रहा। कांग्रेस ने कहा, "बिजली बिल बढ़ाने के पीछे रिश्वत ही है।" BJP: "लोकायुक्त की सख्ती जारी।

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