MP News: ईद पर कैदियों को झटका, भोपाल सेंट्रल जेल में खुली मुलाकात बंद, विधायक आरिफ मसूद ने जताई आपत्ति

MP News Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल में इस बार ईद का त्योहार खास नहीं रहने वाला है। जेल प्रशासन ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए इस बार ईद पर कैदियों को उनके परिजनों से खुली मुलाकात की अनुमति नहीं दी है।

यह फैसला जेल परिसर में चस्पा किए गए नोटिस के माध्यम से सार्वजनिक किया गया, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि इस साल ईद पर खुली मुलाकात नहीं होगी, बल्कि सामान्य मुलाकात की सुविधा ही उपलब्ध होगी। यह परंपरा का उल्लंघन है, जो हर साल त्योहारों पर कैदियों और उनके परिवारों के लिए एक खास अवसर हुआ करती थी।

Open meetings of prisoners in Bhopal Central Jail stopped on Eid MLA Arif Masood raised objection

निर्माण कार्य के कारण खुली मुलाकात पर रोक

भोपाल सेंट्रल जेल में हर साल त्योहारों पर, खासकर ईद, दीपावली और राखी जैसे अवसरों पर, कैदियों को उनके परिजनों से खुली मुलाकात का मौका मिलता था। इस दौरान, परिवार के लोग जेल परिसर में खुले में मिलकर कैदियों से बातचीत करते, साथ बैठकर त्योहार की खुशियाँ साझा करते और एक दूसरे के साथ गले मिलते। लेकिन इस बार जेल प्रशासन ने इसका कड़ा विरोध किया। जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण खुली मुलाकात की व्यवस्था करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, "निर्माण कार्यों के कारण सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से खुली मुलाकात देना मुश्किल है, हालांकि, सामान्य मुलाकात की सुविधा दी जाएगी, जिसमें परिजन कैदी से कांच की दीवार के माध्यम से बात कर सकेंगे।"

पहली बार टूटी परंपरा: कैदियों और उनके परिजनों में नाराजगी

यह पहली बार है कि भोपाल सेंट्रल जेल में ईद पर कैदियों को खुली मुलाकात का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जिससे कैदी और उनके परिजन दोनों ही नाराज नजर आ रहे हैं। एक कैदी के परिजन ने कहा, "ईद हमारे लिए एक बहुत बड़ा त्योहार है, जब हम अपने भाई से मिलकर खुशियाँ मनाते थे। इस बार हमें यह अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो बहुत दुखद है।" दूसरे परिजनों ने भी इस फैसले पर विरोध जताते हुए कहा, "निर्माण कार्य तो पहले भी होते रहे हैं, लेकिन कभी इस कारण से मुलाकात की व्यवस्था नहीं बदली। यह निर्णय अचानक क्यों लिया गया, यह समझ से बाहर है।"

विधायक आरिफ मसूद का हस्तक्षेप: डीजी को पत्र

भोपाल के विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई है और पुलिस महानिदेशक (डीजी) को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने पत्र में कहा, "जेल में सालों से त्योहारों पर खुली मुलाकात की परंपरा रही है, जो कभी भी सुरक्षा के लिहाज से खतरे में नहीं पड़ी। यह परंपरा कैदियों और उनके परिवारों के लिए बेहद भावनात्मक महत्व रखती है। जेल प्रशासन का यह निर्णय सिर्फ कैदियों और उनके परिवारों को ही नहीं, बल्कि समाज में भी गलत संदेश दे रहा है।"

मसूद ने डीजी से आग्रह करते हुए कहा कि "ईद के इस खास मौके पर, कैदियों को उनके परिवारों से खुली मुलाकात का अवसर दिया जाए। इससे न सिर्फ उनके मनोबल को बल मिलेगा, बल्कि यह उनका संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ अधिकार भी है। अगर जरूरत पड़े तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाने के लिए तैयार हैं।"

सोशल मीडिया पर बहस: क्या कैदियों को भी खुशियों का हक नहीं?

जेल प्रशासन के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, और निर्माण कार्य के दौरान कोई भी जोखिम नहीं लिया जा सकता। लेकिन एक बड़ा वर्ग इस फैसले का विरोध कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, "कैदियों को भी त्योहार मनाने का हक है, उन्हें उनके परिवारों से मिलकर खुशी मनाने का मौका मिलना चाहिए। जेल प्रशासन को इस फैसले पर पुनः विचार करना चाहिए।"

कुछ अन्य यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या निर्माण कार्य इतना बड़ा है कि इस कारण कैदियों को अपने परिवारों से मिलने का यह अवसर छिन जाए? क्या जेल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सकता था?

निर्माण कार्य का असर: क्या सुरक्षा को खतरा हो सकता था?

भोपाल सेंट्रल जेल में पिछले कुछ महीनों से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। जेल परिसर में नई बैरक, मुलाकात कक्ष और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम हो रहा है। इसके चलते कई हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है, और कैदियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जेल प्रशासन का कहना है कि इस समय की परिस्थितियों में खुली मुलाकात की व्यवस्था को लागू करना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं था।

क्या यह फैसला जायज था?

इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्माण कार्य वास्तव में इतना बड़ा था कि खुली मुलाकात को पूरी तरह से बंद कर देना जरूरी था? क्या जेल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाएँ नहीं कर सकता था, ताकि कैदियों और उनके परिजनों को इस अवसर पर खुशी का मौका मिल सके? और क्या इस फैसले से कैदियों के मनोबल पर असर नहीं पड़ेगा?

ईद का त्योहार परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक अवसर होता है, और जेल में बंद कैदियों के लिए यह त्योहार किसी राहत से कम नहीं होता। ऐसे में यह कदम उन लोगों के लिए एक बड़ा आघात साबित हो सकता है, जो इस अवसर को अपने परिवार के साथ मिलकर मनाने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षारत थे।

आने वाले दिनों में क्या होगा?

अब सबकी नजरें पुलिस महानिदेशक के जवाब पर टिकी हैं। क्या डीजी इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और जेल प्रशासन के फैसले को बदलने का प्रयास करेंगे? या फिर यह विवाद कुछ और दिन और उग्र हो सकता है? फिलहाल, यह तय है कि भोपाल सेंट्रल जेल में इस बार ईद की खुशियाँ फीकी रहने वाली हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+