MP News Naxalite: बालाघाट में महिला नक्सली का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, क्यों छोड़ा संगठन, जानिए पूरा कारण
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मेहनत रंग ला रही है। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पहली बार किसी महिला नक्सली ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का साहसी कदम उठाया है। यह घटना न केवल जिले के लिए मील का पत्थर है, बल्कि पूरे नक्सल-ग्रस्त क्षेत्र में एक संदेश दे रही है कि हिंसा का रास्ता कहीं नहीं ले जाता।
सुनीता (23 वर्ष), पिता विसरू, निवासी विरमन गांव, इंद्रावती क्षेत्र, जिला बीजापुर (छत्तीसगढ़) ने 31 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे हॉकफोर्स के चौरिया कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया।

हॉकफोर्स के सहायक सेनानी रूपेंद्र धुर्वे के समक्ष उसने अपनी इंसास राइफल, तीन मैगजीन, पिट्ठू बैग और वर्दी सौंप दी। यह आत्मसमर्पण बालाघाट के लांजी थाना क्षेत्र के पिटकोना पुलिस आउटपोस्ट के चौरिया कैंप में हुआ, जो जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर जंगल में स्थित है। आइए, जानते हैं इस घटना की पूरी दास्तां, सुनीता के संगठन में शामिल होने से लेकर आत्मसमर्पण के पीछे के कारणों तक।
बालाघाट का नक्सल इतिहास: चार दशकों की लड़ाई में पहला ऐसा कदम
बालाघाट जिला नक्सलवाद से जूझ रहा है। 1980 के दशक से यहां माओवादी संगठन की पैठ रही है, खासकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की त्रि-जंक्शन (एमएमसी जोन) में। यह क्षेत्र घने जंगलों, आदिवासी बहुल इलाकों और खराब सड़क संपर्क के कारण नक्सलियों के लिए सुरक्षित आश्रय रहा है।
2016-17 से एमएमसी जोन को मजबूत करने की कोशिश में नक्सली यहां सक्रिय हुए, लेकिन सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई से उनकी कमर टूट रही है। हॉकफोर्स, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त अभियानों ने दर्जनों नक्सलियों को या तो मार गिराया या आत्मसमर्पण कराया। लेकिन महिला नक्सली का ऐसा आत्मसमर्पण पहली बार हुआ है।
पुलिस महानिरीक्षक (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) राकेश कुमार पांड्रो ने बताया, "सुनीता पर इनाम था और वह संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी थी। उसका आत्मसमर्पण नक्सलियों के लिए बड़ा झटका है। यह 2023 की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का पहला सफल उदाहरण है।" बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने कहा, "सुनीता से पूछताछ जारी है। जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा करेंगे।" यह घटना केंद्र सरकार की 'नक्सल-मुक्त भारत' अभियान की सफलता का प्रतीक है, जहां अक्टूबर 2025 में ही छत्तीसगढ़ में 238 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
सुनीता की नक्सली यात्रा: 2022 में शामिल, रामदेर की गार्ड बनी
सुनीता की कहानी किसी फिल्मी ड्रामा से कम नहीं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के इंद्रावती क्षेत्र के विरमन गांव की रहने वाली सुनीता गरीबी और सामाजिक असमानता से त्रस्त थी। 2022 में, मात्र 20 वर्ष की उम्र में, वह माओवादी संगठन से जुड़ी। पुलिस के अनुसार, उसे माड़ क्षेत्र में छह महीने का कठोर प्रशिक्षण दिया गया - हथियार चलाना, वैचारिक प्रचार और जंगल युद्ध की ट्रेनिंग। प्रशिक्षण के बाद उसे एमएमसी जोन प्रभारी और सेंट्रल कमेटी सदस्य (सीसीएम) रामदेर की हथियारबंद गार्ड में तैनात किया गया। रामदेर एक कुख्यात नक्सली नेता है, जो इंद्रावती, माड़ और दर्रेकासा क्षेत्रों में सक्रिय है।
सुनीता एरिया कमेटी मेंबर (एसीएम) भी थी और रामदेर के 11 सदस्यीय दस्ते का हिस्सा। वह इंद्रावती, माड़ और एमपी के बालाघाट के जंगलों में घूमती रही। हाल ही में दस्ता दर्रेकासा क्षेत्र पहुंचा था। सुनीता ने पूछताछ में बताया कि संगठन में महिलाओं को भी पुरुषों की तरह हथियार थमाए जाते थे, लेकिन वास्तविकता कुछ और थी - लगातार भूख, थकान और हिंसा का दबाव। वह इंसास राइफल के साथ सक्रिय थी, जिस पर सरकार ने इनाम घोषित किया था।
आत्मसमर्पण का फैसला: संगठन में टूट का संकेत, सीनियरों के सरेंडर ने तोड़ा मन
तो सवाल वही - सुनीता ने अचानक हथियार क्यों डाले? पूछताछ से खुलासा हुआ कि संगठन में बदलाव के संकेत मिल रहे थे। रामदेर ने ही अपने दस्ते को बताया कि सोनू दादा, रूपेश दादा और उनके कई साथी छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अक्टूबर 2025 में छत्तीसगढ़ के बस्तर में 78 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिसमें कई सीनियर कैडर शामिल थे। रूपेश उर्फ सतीश, सेंट्रल कमेटी मेंबर, ने 210 अन्य के साथ हथियार डाले। इससे निचले स्तर के सदस्यों में हताशा फैली।
सुनीता ने कहा, "सीनियरों के सरेंडर से लगा कि संगठन कमजोर हो रहा है। लगातार ऑपरेशन, भूख और परिवार से दूरी ने तोड़ दिया।" 31 अक्टूबर की सुबह 4 बजे उसने दस्ते से अलग होकर जंगल में हथियार डंप किए और पैदल चलकर चौरिया कैंप पहुंची। वहां सहायक सेनानी रूपेंद्र धुर्वे को आत्मसमर्पण की इच्छा बताई। सुनीता का यह कदम संगठन के पतन का संकेत है - रामदेर के दस्ते के योगेश और मल्लेश पहले ही भाग चुके हैं। अन्य सदस्य भी सरेंडर की तैयारी में हैं।
सीएम यादव की प्रतिक्रिया: पुलिस की प्रशंसा, नक्सलियों को सख्त चेतावनी
इस सफलता पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट साझा की, जिसमें कहा, "14 लाख रुपए की इनामी नक्सली सुनीता ने आज बालाघाट में आत्मसमर्पण कर दिया है। उससे बड़ी संख्या में हथियार व अन्य सामग्री बरामद की गई है। इस सफलता के लिए पुलिस बल प्रशंसा की पात्र है। अब जो कुछ नक्सली बचे हैं, वे आत्मसमर्पण करें या फिर पुलिस का सामना करने के लिए तैयार रहें।" पोस्ट के साथ एक वीडियो भी था, जिसमें आत्मसमर्पण की प्रक्रिया और बरामद हथियार दिखाए गए।
मुख्यमंत्री ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "यह आत्मसमर्पण नक्सल-मुक्त भारत अभियान की दिशा में बड़ा कदम है। हमारी सरकार हिंसा छोड़ने वालों को सम्मानजनक जीवन देगी, लेकिन हिंसा जारी रखने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस है।" उन्होंने नक्सली 'बच्चों' (युवा कैडर) को अपील की कि मुख्यधारा में लौट आएं, वरना सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करेंगे। यह बयान न केवल प्रेरणा देता है, बल्कि नक्सलियों में डर भी पैदा करता है।
खुलासे जो डराएंगे नक्सलियों को: चिलौरा हत्याकांड का कनेक्शन
सुनीता के बयानों ने पुलिस को नई लीड दी। उसने बताया कि रामदेर, रोहित, विमला, तुलसी, चंदू दादा, प्रेम, अश्विरे और सागर चिलौरा निवासी देवेंद्र की हत्या में शामिल थे। ये सभी चिलौरा की ओर बढ़ रहे थे, जब सुनीता ने सरेंडर का फैसला लिया। पुलिस अब इनकी तलाश तेज कर रही है। एसपी मिश्रा ने कहा, "ये खुलासे एमएमसी जोन को कमजोर करेंगे। हम हॉकफोर्स को अलर्ट कर दिया है।"
नई नीति का पहला लाभ, भविष्य की उम्मीदें
मध्य प्रदेश सरकार की 2023 की नक्सली आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति सुनीता को नई जिंदगी देगी। इसमें आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, आवास और सुरक्षा का प्रावधान है। एएसपी पांड्रो ने कहा, "सुनीता को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। हमारा लक्ष्य है कि सरेंडर करने वालों को सम्मानजनक जीवन मिले, ताकि अन्य प्रेरित हों।" सुनीता ने कहा, "मैं परिवार से मिलना चाहती हूं। हिंसा से कुछ नहीं मिला।"
यह घटना बालाघाट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शांति की नई किरण है। केंद्र सरकार के अनुसार, 2025 में 1,639 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरेंडर पॉलिसी और सिक्योरिटी ऑपरेशंस से नक्सलवाद का अंत नजदीक है। बालाघाट एसपी मिश्रा ने अपील की, "नक्सली भाइयों-बहनों, मुख्यधारा में लौट आओ। सरकार का दरवाजा खुला है।"
सुनीता का आत्मसमर्पण न केवल एक व्यक्तिगत जीत है, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा। क्या यह एमएमसी जोन में नक्सलियों की लहर लाएगा? आने वाले दिन बताएंगे। लेकिन साफ है - अंधेरे का अंत हो रहा है, उजाला आ रहा है।
-
PM Modi Meeting: 'Lockdown की अफवाहों पर लगाम', PM की मुख्यमंत्रियों संग ढाई घंटे चली बैठक, दिए 8 मैसेज-List -
Gold Silver Price Today: सोना चांदी धड़ाम, सिल्वर 15,000 और गोल्ड 4000 रुपये सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Khamenei Last Photo: मौत से चंद मिनट पहले क्या कर रहे थे खामनेई? मिसाइल अटैक से पहले की तस्वीर आई सामने -
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Uttar Pradesh Petrol-Diesel Price: Excise Duty कटौती से आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्या? 60 शहरों की रेट-List -
KBC वाली तहसीलदार गिरफ्तार, कहां और कैसे किया 2.5 करोड़ का घोटाला? अब खाएंगी जेल की हवा -
Lockdown का PM मोदी ने क्या सच में ऐलान किया? संकट में भारत? फिर से घरों में कैद होना होगा?- Fact Check -
साथ की पढ़ाई, साथ बने SDM अब नहीं मिट पा रही 15 किलोमीटर की दूरी! शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि बिखर गया रिश्ता? -
Kal Ka Mausam: Delhi-Noida में कल तेज बारिश? 20 राज्यों में 48 घंटे आंधी-तूफान, कहां ओलावृष्टि का IMD अलर्ट? -
27 की उम्र में सांसद, अब बालेन सरकार में कानून मंत्री, कौन हैं सोबिता गौतम, क्यों हुईं वायरल? -
'मेरा पानी महंगा है, सबको नहीं मिलेगा', ये क्या बोल गईं Bhumi Pednekar? लोगों ने बनाया ऐसा मजाक -
Gajakesari Yoga on Ram Navami 2026: इन 4 राशियों की बदलेगी किस्मत, पैसा-सम्मान सब मिलेगा












Click it and Unblock the Notifications