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MP News: वक्फ बोर्ड को देशभर में सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए स्कॉच अवार्ड, CM मोहन यादव ने की सराहना

MP Waqf Board News: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक बार फिर राज्य का नाम रोशन कर दिया है। देशभर में वक्फ बोर्डों के बीच सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के समारोह में मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड को प्रतिष्ठित 'स्कॉच अवार्ड' से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार बोर्ड द्वारा वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने और आईटी क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए बोर्ड की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि यह राज्य सरकार की डिजिटल इंडिया पहल का परिणाम है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सनवर पटेल ने इस सम्मान को मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति का फल बताते हुए इसे सरकार को समर्पित कर दिया।

MP Waqf Board gets Skoch Award for best work in the country CM Mohan Yadav fastest in IT

स्कॉच अवार्ड का महत्व: नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन का मानचित्रण

स्कॉच अवार्ड एक स्वतंत्र संगठन द्वारा 2003 में स्थापित एक प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसे भारत में उच्च नागरिक सम्मान के रूप में जाना जाता है। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों, परियोजनाओं और संस्थाओं को प्रदान किया जाता है जो अनुकरणीय नेतृत्व का प्रदर्शन करते हैं और सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों में योगदान देते हैं। पुरस्कार मुख्य रूप से डिजिटल और सामाजिक समावेशन, शासन, कॉर्पोरेट नेतृत्व, पर्यावरणीय स्थिरता और समावेशी विकास जैसे क्षेत्रों में उपलब्धियों को मान्यता देते हैं।

स्कॉच ग्रुप के अनुसार, ये पुरस्कार सरकार में डिजिटल परिवर्तन से लेकर ग्रामीण विकास तक की विस्तृत पहलों को कवर करते हैं। 2025 संस्करण में देशभर से 500 से अधिक संस्थाओं ने भाग लिया, और मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड को 'सर्वश्रेष्ठ वक्फ बोर्ड - डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' श्रेणी में चुना गया। समारोह नई दिल्ली के एक प्रमुख होटल में आयोजित हुआ, जहां केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति ईरानी ने मुख्य अतिथि के रूप में पुरस्कार वितरण किया। बोर्ड के प्रतिनिधियों ने बताया कि यह पुरस्कार वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण से जुड़े उनके प्रयासों - जैसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, जीआईएस मैपिंग और ई-गवर्नेंस पोर्टल - की सराहना है। इससे न केवल संपत्तियों की पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि अवैध कब्जों पर भी अंकुश लगा है।

वक्फ बोर्ड की यात्रा: नए कानून के अनुरूप डिजिटल क्रांति

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की स्थापना वक्फ एक्ट 1995 के तहत हुई थी, और वर्तमान में राज्य में 14,980 से अधिक वक्फ संपत्तियां - जैसे मस्जिदें, कब्रिस्तान, दरगाहें आदि - इसके पंजीकृत हैं। 2025 में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक के बाद बोर्ड ने नई दिशा अपनाई है, जो पारदर्शिता, डिजिटलीकरण और अल्पसंख्यक कल्याण पर जोर देता है। बोर्ड ने पिछले दो वर्षों में 80% से अधिक संपत्तियों के रिकॉर्ड को ऑनलाइन किया है, जिससे लाभार्थियों को सुविधा मिली है। अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा, "यह पुरस्कार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इच्छाशक्ति का परिणाम है। हम नए वक्फ कानून की मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, जहां डिजिटल टूल्स से संपत्तियों का प्रबंधन आसान हो गया है। प्राप्त सम्मान को मैं मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को समर्पित करता हूं।"

पटेल ने आगे बताया कि बोर्ड ने आईटी फील्ड में कई नवाचार किए हैं, जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से वक्फ दान, वर्चुअल सर्वे और ब्लॉकचेन-आधारित रिकॉर्डिंग। इससे न केवल भ्रष्टाचार कम हुआ है, बल्कि मुस्लिम समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण में भी योगदान दिया गया है। "हमारा लक्ष्य है कि हर वक्फ संपत्ति डिजिटल हो, ताकि इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे," उन्होंने जोर देकर कहा। केंद्रीय वक्फ काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश अब देश के शीर्ष पांच वक्फ बोर्डों में शामिल हो गया है, जहां डिजिटलीकरण का स्तर 75% से ऊपर है।

मुख्यमंत्री की सराहना और प्रेरणा: भोपाल में उच्च स्तरीय बैठक

पुरस्कार प्राप्ति के ठीक बाद, नई दिल्ली से लौटे वक्फ बोर्ड प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस बैठक में बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल, समीर सिन्हा (उप सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार), विशाल कुमार विश्वकर्मा (अवर सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार), डॉ. ई. रमेश कुमार आईएएस (पीएस, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक विभाग, मध्य प्रदेश शासन), अनुराग चौधरी आईएएस (ओबीसी एवं अल्पसंख्यक विभाग, मध्य प्रदेश शासन), डॉ. सौरभ कुमार सुमन आईएएस (आयुक्त, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक कल्याण), डॉ. फरजाना गजाल (सीईओ, एमपी वक्फ बोर्ड) सहित राजस्थान और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस बैठक में डॉ. मोहन यादव ने सभी को बधाई दी और कहा, "मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा आईटी और ऑनलाइन क्षेत्र में की जा रही सक्रिय भूमिका सराहनीय है। यह पुरस्कार राज्य के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में एक मील का पत्थर है।" उन्होंने बोर्ड की सराहना करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और भविष्य में भी समाज एवं राष्ट्र हित में कार्य करने के लिए सभी को प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से डिजिटल पहलों पर जोर देते हुए कहा, "डिजिटल इंडिया के दौर में वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन प्रबंधन न केवल पारदर्शिता लाता है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बनता है।" बैठक के दौरान चाय-नाश्ते का आयोजन किया गया, और सभी ने मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता की प्रशंसा की।

बोर्ड की उपलब्धियां: पारदर्शिता से सशक्तिकरण तक

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की यह सफलता रातोंरात नहीं आई। पिछले एक वर्ष में बोर्ड ने 5,000 से अधिक संपत्तियों का सर्वे पूरा किया, जिससे 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां मुक्त हुईं। सीईओ डॉ. फरजाना गजाल ने बताया, "हमने ई-वक्फ पोर्टल लॉन्च किया, जहां मुतावल्ली (ट्रस्टी) ऑनलाइन रिपोर्टिंग कर सकते हैं। इससे कागजी कार्रवाई 70% कम हुई है।" केंद्रीय अधिकारियों ने भी सराहना की। समीर सिन्हा ने कहा, "मध्य प्रदेश का मॉडल अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। नए वक्फ विधेयक के तहत डिजिटलीकरण अनिवार्य है, और यहां यह उत्कृष्ट रूप से लागू हो रहा है।"

राजस्थान और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने भी मुलाकात में अनुभव साझा किए। राजस्थान वक्फ बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, "मध्य प्रदेश से प्रेरणा लेंगे। यहां का जीआईएस सिस्टम अवैध कब्जों को रोकने में कारगर साबित हो रहा है।" यह पुरस्कार राज्य सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण नीतियों को मजबूत करता है, जहां ओबीसी और अल्पसंख्यक विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।

अल्पसंख्यक समुदाय में उत्साह, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

यह सम्मान अल्पसंख्यक समुदाय में उत्साह का संचार कर रहा है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में मुस्लिम संगठनों ने बधाई सभाएं आयोजित कीं। एक समुदाय नेता ने कहा, "वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग अब संभव हो रहा है। इससे मदरसों और अनाथालयों को फायदा मिलेगा।" विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सराहना की, हालांकि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ट्वीट कर कहा, "अच्छा कार्य सराहनीय, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण में और निवेश जरूरी।"

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