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MP में बड़ा फैसला: 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी मिलेगी परिवार पेंशन, 50 साल पुराना नियम बदला

MP Pension Rule: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 1976 के सिविल सेवा (पेंशन) नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी गई।

इस फैसले के साथ ही 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी अब परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा, जो अब तक नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं था।

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नए संशोधन "मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2026" के रूप में लागू होंगे और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। वित्त विभाग को इनके प्रकाशन और क्रियान्वयन का अधिकार दिया गया है।

क्या बदला 50 साल पुराने नियमों में?

वर्ष 1976 के पेंशन नियमों में केंद्र सरकार ने समय-समय पर संशोधन किए थे, लेकिन मध्य प्रदेश में कई प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हुए थे। कर्मचारी संगठनों की लंबे समय से मांग थी कि केंद्र की तर्ज पर प्रदेश में भी परिवार पेंशन और आश्रितों से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट और विस्तारित किया जाए।

अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसाओं के आधार पर अब कैबिनेट ने संशोधन को मंजूरी दी है। इससे लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

NPS कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत

1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त सभी सरकारी कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं। इन कर्मचारियों के वेतन से 14 प्रतिशत अंशदान कटता है, जबकि राज्य सरकार भी उतनी ही राशि जमा करती है।

अब यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके पति/पत्नी और आश्रितों को परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। यह प्रावधान अब तक स्पष्ट नहीं था, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बनी रहती थी। सरकार के इस फैसले से NPS कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का नया कवच मिलेगा।

  • दिव्यांग और आश्रितों के लिए विशेष प्रावधान
  • नए नियमों में सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं-
  • मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग आश्रित (पुत्र/पुत्री/भाई-बहन) को आजीवन परिवार पेंशन मिलेगी।
  • आश्रित की आय सीमा अब न्यूनतम पेंशन 7,750 रुपये + महंगाई राहत के आधार पर तय होगी।
  • परिवार पेंशन की पात्रता सबसे बड़ी संतान (बेटा या बेटी) को दी जाएगी।
  • इन प्रावधानों से उन परिवारों को स्थायी सुरक्षा मिलेगी जिनके पास अन्य आय के साधन सीमित हैं।

बेटियों के लिए बड़ा और क्रांतिकारी फैसला

नए नियमों का सबसे चर्चित और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहलू बेटियों को लेकर है। अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियां भी माता-पिता की परिवार पेंशन की पात्र होंगी। पहले यह सुविधा सीमित थी और 25 वर्ष की आयु सीमा लागू थी, लेकिन अब आयु प्रतिबंध हटा दिया गया है। इसका अर्थ है कि जरूरतमंद बेटियां उम्र की बाध्यता से मुक्त होकर परिवार पेंशन प्राप्त कर सकेंगी। यह फैसला महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पेंशन प्रक्रिया में प्रशासनिक सुधार

सरकार ने केवल पात्रता में ही नहीं, बल्कि प्रक्रिया में भी बदलाव किए हैं-
तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पेंशन रोकने का निर्णय अब संबंधित प्रशासकीय विभाग ले सकेगा।
प्रथम और द्वितीय श्रेणी अधिकारियों के मामलों में निर्णय कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
केंद्र सरकार की सेवा से मध्य प्रदेश में आए कर्मचारियों की पेंशन गणना में केंद्रीय सेवा की अवधि जोड़ी जाएगी।
पेंशन मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
इन सुधारों से अनावश्यक देरी और जटिलताओं में कमी आने की उम्मीद है।

कितने कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?

प्रदेश में लगभग सात लाख नियमित कर्मचारी हैं, जिनमें बड़ी संख्या NPS के अंतर्गत आती है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार तीन से चार लाख कर्मचारियों के परिवारों को सीधे तौर पर इस फैसले से लाभ मिलेगा। पेंशनर्स एसोसिएशन ने इसे 18 वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया है। एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

सामाजिक सुरक्षा की नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक संशोधन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुधार है। इससे कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी। मोहन यादव सरकार का यह फैसला कर्मचारी-हितैषी नीति का संकेत देता है, जो सामाजिक न्याय और आर्थिक सुरक्षा पर केंद्रित है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम

सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधित पेंशन नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इसके बाद सभी पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रितों को नए प्रावधानों का लाभ मिल सकेगा।

पचास साल पुराने नियमों में यह बदलाव प्रदेश की पेंशन व्यवस्था को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने की दि

शा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे हजारों परिवारों को भविष्य की चिंता से राहत और आर्थिक सहारा मिलेगा।

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