MP NEWS : पोषण आहार योजना में घोटाले पर सीएम शिवराज को विपक्षी नेताओं ने घेरा
एमपी शिवराज सरकार पर मिड-डे मील के नाम पर बड़े घोटाले के आरोप लग रहे हैं। अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि योजना सिर्फ कागजों पर चलाकर लाखों स्कूली बच्चों का हक़ जिम्मेदारों ने डकार लिया।
भोपाल, 05 सितंबर। स्कूलों में बच्चों की भागीदारी बढ़ाने और उनके पोषण में सुधार के लिए मिड डे मील योजना हैं। कुछ दिनों पहले मप्र के आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए खिलौनों का अभियान भी चला, इसी बीच मिड-डे मील के नाम पर बड़े घोटाले के आरोप लग रहे हैं। अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया जा रहा है कि योजना सिर्फ कागजों पर चलाकर लाखों स्कूली बच्चों का हक़ जिम्मेदारों ने डकार लिया। जिन बच्चों ने स्कूलों की शक्ल नहीं देखी, उनके नाम पर करोड़ों का राशन बांट दिया गया। इस बड़ी धांधली के लिए पोषण आहार के परिवहन का भी सहारा लिया गया। विपक्ष ने इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लिया है, तो वही सरकार की दलील है कि CAG की जिस रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है, वह अंतिम नहीं है। वह रिपोर्ट सिर्फ राय हैं।

सीएम शिवराज के पास है ये मंत्रालय
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पोषण आहार योजना में गड़बड़ी को लेकर विपक्ष ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को घेरना शुरू कर दिया है। दरअसल पोषण आहार योजना से संबंध मंत्रालय सीएम शिवराज के पास ही है। ऐसे में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर शिवराज सिंह सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने देखा कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने पहले व्यापम घोटाले से युवाओं का भविष्य बर्बाद किया अब गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं के साथ अन्याय! क्या मामा ने ऐसे घोटाले करने के लिए ही महाराज के साथ तोड़फोड़ करके सरकार बनाई थी।
वहीं कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार भ्रष्टाचार के रोज नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है मामू को अपनी काली कमाई के धनबल का इतना भरोसा हो गया है कि वे समझते हैं कि सभी बिकाऊ है।
प्रशांत भूषण ने भी ट्विटर के जरिए शिवराज सिंह चौहान पर हमला किया उन्होंने लिखा कि मामा का अनाज घोटाला! परिवहन ट्रक जो मोटरसाइकिल पाए गए! लाभार्थियों की संख्या में गया था अतिशयोक्ति! राज्य के ऑडिटर ने पाया कि बच्चों के लिए मजबूत सरकार के पोषण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के स्तर में वृद्धि हुई है, जिससे वे कुपोषित हो गए हैं।
बता दे कि एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना काल के ब्रेक के बाद 2 साल बाद शुरू की गई मिड डे मील योजना में 6 टेक होम राशन (THR) बनाने वाली संयंत्रों/फर्मो ने 6.94 करोड़ की लागत वाले 1125.64 एमटी टीएचआर का परिवहन करने का दावा किया। वाहन डेटाबेस के सत्यापन के बाद पता चला कि इस्तेमाल किए गए वाहन वास्तव में मोटरसाइकिल, कार, ऑटो, ट्रक और टैंकर के रूप में पंजीकृत थे, जबकि डेटाबेस में ट्रक बिल्कुल भी मौजूद नहीं है। इसी के आधार पर विपक्ष के नेता शिवराज सरकार पर आरोप लगा रहे है कि ट्रकों के जो नंबर बताए गए थे। वह दरअसल मोटरसाइकिल, ऑटो और टैंकर के थे। यहीं नहीं लाखों ऐसे बच्चे जो स्कूल नहीं जाते, उनके नाम पर भी करोड़ों रुपए का राशन बांट दिया गया।
वही सरकार की दलील है कि CAG की जिस रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है, वह अंतिम नहीं है। वह रिपोर्ट सिर्फ राय हैं।












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