MP News: "सांसद शर्मा का लव जिहाद पर तीखा वार: 'आरोपियों की नसबंदी करो, तभी थमेगा अपराध' "

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लव जिहाद के मुद्दे ने एक बार फिर सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भोपाल के सांसद और बीजेपी के नेता आलोक शर्मा के लव जिहाद के खिलाफ विवादास्पद बयान के बाद, हिंदूवादी संगठन संस्कृति बचाओ मंच ने उनका खुलकर समर्थन किया है।

मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने न केवल सांसद के बयान को सही ठहराया, बल्कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और भोपाल पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी से लव जिहाद के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की।

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भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि लव जिहाद में शामिल आरोपियों की नसबंदी की जाए। शर्मा का दावा है कि ऐसी सजा से इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। यह बयान भोपाल में हाल ही में सामने आए लव जिहाद के मामलों के बाद आया है, जहां आरोपियों पर हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग और दुष्कर्म के आरोप हैं।

शर्मा ने कहा, "मध्य प्रदेश शांति का टापू है। यहां लव जिहाद करने वालों की गिरफ्तारी तो होगी ही, साथ ही उनकी नसबंदी भी कराई जानी चाहिए।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी कॉलेजों में सुनियोजित तरीके से हिंदू लड़कियों को टारगेट किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने पुराने भोपाल में हिंदू आबादी के पलायन और घटती जनसंख्या पर चिंता जताई।

हालांकि, इस बयान पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आपत्ति जताई और इसे सस्ती लोकप्रियता का हथकंडा बताया। मसूद ने कहा कि अपराध को धर्म से जोड़ना गलत है और ड्रग्स माफियाओं पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इसके साथ ही, तिवारी ने एक कथित फार्म हाउस पर बुलडोजर चलाने की मांग उठाई, जो उनके दावे के अनुसार सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है और जहां शोषण की घटनाएँ हुईं। यह मामला अब भोपाल में चर्चा का केंद्र बन चुका है, जो सामाजिक तनाव और राजनीतिक बयानबाजी को बढ़ा रहा है।

MP News: आलोक शर्मा का विवादास्पद बयान

भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने हाल ही में लव जिहाद के मामलों पर एक सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, "मध्य प्रदेश शांति का टापू है। यहां लव जिहाद करने वालों की गिरफ्तारी तो होगी ही, उनकी नसबंदी भी कराई जानी चाहिए।" शर्मा ने यह मांग मुख्यमंत्री मोहन यादव से की, ताकि ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। यह बयान भोपाल में हाल के लव जिहाद से जुड़े एक मामले के बाद आया, जिसमें तीन हिंदू छात्राओं के साथ बलात्कार और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगा था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों-फरहान, साद, और साहिल-को गिरफ्तार किया था, जिन्हें कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाकर अपराध करने का दोषी पाया गया।

शर्मा का यह बयान सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर वायरल हो गया, जिसके बाद कुछ लोगों ने इसे समर्थन दिया, तो कुछ ने इसे उत्तेजक और असंवैधानिक करार दिया। इस बीच, संस्कृति बचाओ मंच ने इस बयान को "हिंदू समाज की रक्षा के लिए जरूरी" बताते हुए सांसद के साथ खड़े होने का ऐलान किया।

MP News: संस्कृति बचाओ मंच का समर्थन और माँगें

संस्कृति बचाओ मंच, जो भोपाल में हिंदूवादी विचारधारा को बढ़ावा देने और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने के लिए जाना जाता है, ने सांसद आलोक शर्मा के बयान का पुरजोर समर्थन किया। मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "सांसद आलोक शर्मा ने जो कहा, वह हर उस व्यक्ति की भावना को व्यक्त करता है, जो हिंदू समाज और हमारी संस्कृति की रक्षा के लिए चिंतित है। लव जिहाद एक सुनियोजित साजिश है, जिसका मकसद हमारी बेटियों को गुमराह करना और हमारी सामाजिक संरचना को तोड़ना है।"

तिवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि वे पुलिस अधिकारियों को लव जिहाद के मामलों में तत्परता से कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट निर्देश दें। उन्होंने कहा, "पुलिस का रवैया कई बार लचीलापन दिखाता है, जो अपराधियों का हौसला बढ़ाता है। हम चाहते हैं कि हर लव जिहाद के मामले में तुरंत FIR दर्ज हो और आरोपियों को कठोर सजा मिले।"

इसके अलावा, तिवारी ने भोपाल पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी से विशेष अपील की। उन्होंने कहा, "कमिश्नर साहब से हमारा निवेदन है कि पुलिस इस मामले में ढील न बरते। जिस फार्म हाउस पर शोषण की घटनाएँ हुईं, वह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके बनाया गया है। इस फार्म हाउस पर बुलडोजर चलाया जाए और इसके मालिक को भी मुजरिम बनाया जाए।" तिवारी ने दावा किया कि यह फार्म हाउस भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित है और इसका इस्तेमाल "अवैध और अनैतिक गतिविधियों" के लिए किया जा रहा था।

लव जिहाद का मामला और भोपाल में तनाव

यह पूरा विवाद भोपाल में हाल के एक लव जिहाद से जुड़े मामले के बाद और गहरा गया। अप्रैल 2025 में, भोपाल के एक कॉलेज की तीन हिंदू छात्राओं ने आरोप लगाया कि तीन मुस्लिम युवकों-फरहान, साद, और साहिल-ने उनकी पहचान छिपाकर दोस्ती की और फिर उनके साथ बलात्कार कर वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। इस मामले ने पूरे शहर में सनसनी मचा दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

हालाँकि, मामला यहीं नहीं थमा। जब आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, तो वकीलों और कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कोर्ट परिसर में उनकी पिटाई कर दी। संस्कृति बचाओ मंच और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी जेपी अस्पताल में आरोपियों पर हमला करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोका। इस घटना ने भोपाल में सामुदायिक तनाव को बढ़ा दिया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "मध्य प्रदेश में जिहाद या लव जिहाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अपराधियों को कठोर सजा दी जाएगी, चाहे वे राज्य में हों या बाहर भाग जाएँ।" उनकी इस चेतावनी के बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी, लेकिन संस्कृति बचाओ मंच का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।

बुलडोजर की मांग और अतिक्रमण का मुद्दा

संस्कृति बचाओ मंच की बुलडोजर चलाने की मांग ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। चंद्रशेखर तिवारी ने दावा किया कि जिस फार्म हाउस में कथित शोषण की घटनाएँ हुईं, वह सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया है। उन्होंने कहा, "यह फार्म हाउस अपराध का अड्डा बन चुका है। इसके मालिक को संरक्षण देने वाले भी बख्शे नहीं जाने चाहिए। हमारी मांग है कि इस अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए और मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो।"

यह मांग मध्य प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई के हाल के मामलों से प्रेरित लगती है। उदाहरण के लिए, छतरपुर में 2024 में एक थाने पर हमले के बाद मुख्य आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाया गया था। इसी तरह, आगर मालवा में बैल की हत्या के मामले में चार आरोपियों के घरों के अवैध हिस्सों को ध्वस्त किया गया था। तिवारी ने इन उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि "मध्य प्रदेश की सरकार ने पहले भी अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल किया है। अब समय है कि लव जिहाद के मामलों में भी ऐसा ही सख्त रवैया अपनाया जाए।"

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सांसद आलोक शर्मा के बयान और संस्कृति बचाओ मंच की मांगों ने भोपाल में तीखी प्रतिक्रियाएँ जन्म दी हैं। कुछ संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे "हिंदू समाज की रक्षा" के लिए जरूरी बताया, जबकि विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक संगठनों ने इसे "सामुदायिक तनाव को भड़काने वाला" करार दिया।

कांग्रेस नेता और भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद ने कहा, "लव जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सामुदायिक तनाव पैदा करना गलत है। अपराध को अपराध की तरह देखा जाना चाहिए, न कि धर्म के चश्मे से। नसबंदी जैसी बातें संविधान और मानवाधिकारों के खिलाफ हैं।" उन्होंने सरकार से माँग की कि वह ऐसी बयानबाजी पर रोक लगाए।

वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के स्थानीय नेता ने कहा, "यह बयान और बुलडोजर की माँग मुस्लिम समुदाय को टारगेट करने की साजिश है। हम सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की कार्रवाइयों के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।"

सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। X पर कई यूजर्स ने सांसद शर्मा के बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे "उत्तेजक और खतरनाक" बताया।

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