MP MLA रेस्ट हाउस में अधिकारी वीरेंद्र गुप्ता की मनमानी से कर्मचारी त्रस्त, 15 साल से एक जगह जमे रहने का आरोप
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में कर्मचारियों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। यहां स्टाफ क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारी अधिकारियों की मनमानी से जूझ रहे हैं। ताजा मामला विधानसभा के वाहन चालक विनोद चौधरी की शिकायत का है, जिसमें उन्होंने MLA रेस्ट हाउस के स्वागत अधिकारी वीरेंद्र गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
चौधरी का दावा है कि गुप्ता पिछले 15 साल से एक ही जगह पर 'जमे' हुए हैं और तानाशाही रवैया अपनाते हुए क्वार्टरों की मरम्मत-मेंटेनेंस को रोक रहे हैं। यह शिकायत न सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर समस्या उजागर करती है, बल्कि सरकारी ट्रांसफर नियमों की खामियों और भ्रष्टाचार की जड़ों को भी कुरेदती है।

स्टाफ क्वार्टरों में लंबे समय से उपेक्षा का सिलसिला
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के कर्मचारी MLA रेस्ट हाउस के पीछे स्थित स्टाफ क्वार्टरों (ब्लॉक-3) में रहते हैं। ये क्वार्टर विधायकों और अधिकारियों की सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण जगह के बिल्कुल करीब हैं, लेकिन कर्मचारियों के लिए ये बदहाल हो चुके हैं। 2019 से इन क्वार्टरों की देखभाल और मरम्मत का जिम्मा स्वागत अधिकारी वीरेंद्र गुप्ता पर है, जो लोक निर्माण विभाग (PWD) से डेपुटेशन पर तैनात हैं।
सरल शब्दों में समझें: स्टाफ क्वार्टर सरकारी कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा हैं, जहां पुताई, छत की मरम्मत, आंगन की सफाई जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी की जानी चाहिए। लेकिन चौधरी की शिकायत के मुताबिक, 2019 से कोई बड़ा मेंटेनेंस कार्य नहीं हुआ। दीवारें जर्जर, छतें टपक रही हैं, और बरसात में पानी भर जाता है। विधानसभा सचिवालय के सूत्र बताते हैं कि कर्मचारी कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन गुप्ता की वजह से काम अटक जाते हैं। यह समस्या सिर्फ एक क्वार्टर की नहीं, बल्कि पूरे ब्लॉक की है, जहां 50 से ज्यादा परिवार प्रभावित हैं।
विनोद चौधरी की शिकायत: निरीक्षण के आदेशों पर अमल न होने का खुलासा
विनोद चौधरी विधानसभा सचिवालय में वाहन चालक हैं और विधायकों-अधिकारियों की सेवा में लगे रहते हैं। उनकी शिकायत विधानसभा सचिव को 8 अक्टूबर को सौंपी गई, जिसमें उन्होंने अपने आवास क्रमांक A-1 (MLA रेस्ट हाउस-3 के पीछे) की समस्या बताई। चौधरी ने लिखा:
- 12 अगस्त 2024 का निरीक्षण: एक अधिकारी ने क्वार्टर का दौरा किया। रिपोर्ट में दो मुख्य कार्य सुझाए गए-आंगन की मरम्मत (गड्ढों को भरना) और नए शेड का निर्माण (बारिश से बचाव के लिए)।
- कार्रवाई शून्य: आज तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। चौधरी ने गुप्ता से बात की, तो उन्होंने मौखिक वादा किया। लेकिन उप-कार्यालय से पता चला कि गुप्ता ने ही काम न कराने का फैसला लिया।
- गुप्ता का कथित बयान: चौधरी ने शिकायत में उद्धृत किया, "जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा, 'नहीं करवा रहा काम, जो करना है कर लो। शिकायत करना है करो, मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता। आज तक मुझे कोई हटा नहीं सका, देखता हूं। मेरे होते हुए तेरे क्वार्टर में काम कैसे होता है?'"
यह बयान गुप्ता की कथित तानाशाही को उजागर करता है। चौधरी ने कहा कि इससे वे और उनके परिवार डरे हुए हैं। शिकायत में उन्होंने मांग की-काम तुरंत शुरू करो, गुप्ता को हटाओ, और जांच करो।
15 साल से एक जगह पर 'जमे' वीरेंद्र गुप्ता: ट्रांसफर नियमों का उल्लंघन?
शिकायत का सबसे बड़ा आरोप यह है कि वीरेंद्र गुप्ता 15 साल से MLA रेस्ट हाउस के उप-कार्यालय में तैनात हैं। सरकारी नियम क्या कहते हैं? मध्य प्रदेश सिविल सेवा (ट्रांसफर) नियमों के तहत, कोई भी अधिकारी एक ही जिले या पद पर 3-5 साल से ज्यादा नहीं रह सकता। इसका उद्देश्य मनमानी, भ्रष्टाचार और पक्षपात रोकना है।
गुप्ता का बैकग्राउंड: सूत्रों के मुताबिक, ऊपरी अधिकारियों के साथ उनके अच्छे संबंधों से ट्रांसफर नहीं हो पाया।
प्रभाव: लंबे समय से एक जगह रहने से गुप्ता पर 'तानाशाह' का ठप्पा लग गया। अन्य कर्मचारी बताते हैं कि शिकायतें दब जाती हैं, और काम केवल 'अपनों' के लिए होते हैं।
कानूनी पहलू: यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। लोकायुक्त या सामान्य प्रशासन विभाग ऐसी शिकायतों पर जांच शुरू कर सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, "ट्रांसफर पॉलिसी सख्त होनी चाहिए, वरना भ्रष्टाचार बढ़ेगा।"
कर्मचारियों की दैनिक परेशानियां: मेंटेनेंस की कमी से मानसिक-शारीरिक तनाव
स्टाफ क्वार्टरों की हालत देखकर कर्मचारियों का जीना मुहाल हो गया है। ब्लॉक-3 में मुख्य समस्याएं:
एक अनाम कर्मचारी ने बताया, "गुप्ता साहब से शिकायत करो तो धमकी मिलती है। हम विधानसभा की सेवा करते हैं, लेकिन अपनी सुविधा के लिए तरसते हैं।" यह स्थिति कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर रही है, जो विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए शुभ संकेत नहीं।
विधानसभा सचिव की भूमिका: शिकायत पर जांच और कार्रवाई का इंतजार
चौधरी की शिकायत विधानसभा सचिव को मिल चुकी है। सचिवालय के नियमों के तहत, ऐसी शिकायतों पर 15-30 दिनों में जांच होनी चाहिए। संभावित कदम:
- तत्काल: निरीक्षण टीम भेजकर क्वार्टरों का जायजा।
- मध्यम अवधि: गुप्ता का ट्रांसफर या निलंबन।
- दीर्घकालिक: PWD और सचिवालय के बीच मेंटेनेंस SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाना।
अभी तक सचिवालय से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन सूत्र कहते हैं कि मामला संवेदनशील है। अगर कार्रवाई न हुई, तो कर्मचारी संघ बड़े प्रदर्शन की धमकी दे रहे हैं।
राज्य स्तर पर असर: ट्रांसफर पॉलिसी और भ्रष्टाचार पर बहस
यह मामला सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं। मध्य प्रदेश में कई विभागों में अधिकारी 10-15 साल से एक जगह जमे हैं, जो 'जीरो टॉलरेंस' नीति के खिलाफ है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का ऐलान किया। लोकायुक्त ने 2025 में 200+ ट्रांसफर मामलों की जांच की। कर्मचारी संघों ने कहा, "विधानसभा जैसे जगह पर यह अनदेखी बर्दाश्त नहीं। सख्त ट्रांसफर पॉलिसी लागू हो।"












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